मरीज़ का पंजीकरण
पंजीकरण अस्पताल से पहला संपर्क है, इसलिए विनम्र, शांत और साफ़ रहें।
- नाम, उम्र, लिंग, पता, फ़ोन, पहचान पत्र, निकट संबंधी और मुख्य तकलीफ़ लिखें।
- एक अलग अस्पताल नंबर (UHID या MRN) और टोकन या समय दें। दोबारा आने वाला मरीज़ वही नंबर इस्तेमाल करता है, ताकि उसके सारे रिकॉर्ड साथ रहें।
- प्रकार: नया, फ़ॉलो-अप (पुराना), आपातकालीन (पहले इलाज, बाद में पंजीकरण), ऑनलाइन या फ़ोन से समय।
- कोई शुल्क हो तो लें, OPD कार्ड या पर्ची दें, और मरीज़ को सही क्लिनिक का रास्ता बताएँ।
गोपनीयता: मरीज़ की जानकारी निजी है। उसकी चर्चा सबके सामने न करें और बिना अनुमति किसी को न दें।
OPD कैसे चलता है
OPD (बाह्य रोगी विभाग) उन मरीज़ों का इलाज करता है जिन्हें रात में रुकना नहीं होता। IPD (अंतः रोगी विभाग) भर्ती मरीज़ों के लिए है।
सामान्य क्रम: पंजीकरण → प्रतीक्षा क्षेत्र → जीवन संकेत और इतिहास → डॉक्टर से परामर्श → जाँच (लैब, एक्स-रे) या फ़ार्मेसी → बिल → विदा, या ज़रूरत हो तो भर्ती। ट्राइएज मरीज़ों को उनकी तकलीफ़ की गंभीरता से छाँटता है, जिससे सीने में दर्द या तेज़ ख़ून बहने वाले मरीज़ को सामान्य जाँच वाले से पहले देखा जाए।
OPD क्लिनिक अक्सर विशेषता के अनुसार होते हैं: सामान्य चिकित्सा, बच्चे, आँख, नाक-कान-गला, हड्डी, महिला स्वास्थ्य, त्वचा।
OPD में सहायता
- संक्रमण नियंत्रण: हर मरीज़ से पहले और बाद हाथ साफ़ करें, काउच साफ़ करें, ज़रूरत पर दस्ताने और मास्क, कचरा सही रंग के डिब्बे में।
- जीवन संकेत (वयस्क, आराम में): तापमान 36.5–37.5 °C, नाड़ी 60–100 प्रति मिनट, साँस 12–20 प्रति मिनट, रक्तचाप लगभग 120/80 mmHg, ऑक्सीजन संतृप्ति 95–100%। साथ में वज़न और लंबाई।
- कमरा तैयार रखें: फ़ॉर्म, उपकरण, टॉर्च, BP मशीन, थर्मामीटर, दस्ताने।
- मरीज़ की मदद करें काउच पर चढ़ने-उतरने में, गोपनीयता के लिए पर्दा या चादर रखें, और ज़रूरत हो तो विपरीत लिंग के मरीज़ के साथ संरक्षक (चैपरोन) बनकर रहें।
- बातचीत: आसान भाषा में बोलें, देखें कि मरीज़ समझा, और कोई ख़तरे का संकेत तुरंत बताएँ।
मरीज़ को सुरक्षित ले जाना
हिलाने से पहले: समझाएँ, अनुमति लें, ID पट्टी जाँचें, ड्रिप, कैथेटर या चोट देखें, और पर्याप्त सहायक बुलाएँ।
शरीर यांत्रिकी (अपनी पीठ बचाएँ)
चौड़ा आधार (पैर फैले), घुटने मुड़े, पीठ सीधी, भार पास रखें, पैरों से उठाएँ, पैर घुमाकर मुड़ें, कभी न मरोड़ें। खींचने से बेहतर धकेलना। एक नेता "1-2-3" गिनता है।
साधन
- सहारा देकर चलाना: कमज़ोर तरफ़ खड़े हों, गेट बेल्ट या बाँह और कमर पकड़ें।
- व्हीलचेयर: बिस्तर के पास तिरछा रखें, ब्रेक लगाएँ, पैरदान ऊपर; मरीज़ को पीछे टिककर बैठाएँ; पैर पैरदान पर; ढलान और लिफ़्ट में पीछे की ओर।
- स्ट्रेचर (ट्रॉली): दोनों सतहों के ब्रेक, स्लाइड शीट, 3–4 लोग, साइड रेल ऊपर और पट्टा बँधा, पैर आगे करके ले जाएँ, सिर की ओर एक सहायक मरीज़ को देखता रहे।
करके देखें
कुर्सी पर बैठें। तीन बार खड़े हों: एक बार पीठ झुकाकर, फिर दो बार घुटने मोड़कर और पीठ सीधी रखकर। कौन-सा ज़्यादा सुरक्षित लगा? फिर चरण 6 के बटन आज़माएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- OPD क्रम: पंजीकरण → जीवन संकेत → डॉक्टर → जाँच/फ़ार्मेसी → बिल → विदा
- तापमान 36.5–37.5 °C · नाड़ी 60–100/मिनट · साँस 12–20/मिनट
- रक्तचाप ≈ 120/80 mmHg · SpO₂ 95–100%
- हिलाने से पहले: समझाएँ, अनुमति, ID जाँच, सहायक, ब्रेक
- शरीर यांत्रिकी: पैर फैले, घुटने मुड़े, पीठ सीधी, भार पास, मरोड़ नहीं
हल किए गए उदाहरण
1. एक मरीज़ की नाड़ी 15 सेकंड में 22 बार चली। प्रति मिनट नाड़ी कितनी है? क्या यह सामान्य है?
22 × 4 = 88 प्रति मिनट। यह 60–100 के बीच है, तो सामान्य है।
2. एक OPD 6 घंटे में 240 मरीज़ देखती है। पंजीकरण को औसतन हर घंटे कितने मरीज़ सँभालने होंगे?
240 ÷ 6 = 40 मरीज़ प्रति घंटा, यानी लगभग हर 1.5 मिनट में एक।
3. एक मरीज़ को लकवा (स्ट्रोक) हुआ है और वह बैठ नहीं सकता। कौन-सा साधन और कितने सहायक?
स्लाइड शीट के साथ स्ट्रेचर और 3–4 सहायक, ब्रेक लगे, साइड रेल ऊपर।
आम गलतियाँ
- स्थानांतरण से पहले व्हीलचेयर या स्ट्रेचर के ब्रेक लगाना भूल जाना।
- पीठ झुकाकर और पैर सीधे रखकर उठाना, जिससे सहायक की रीढ़ को चोट लगती है।
- दोबारा आए मरीज़ का नया पंजीकरण नंबर बना देना, जिससे पुराने रिकॉर्ड खो जाते हैं।
- प्रतीक्षा क्षेत्र में मरीज़ की बीमारी के बारे में ज़ोर से बात करना।