देखभाल के स्तर: स्व-देखभाल से आपातकालीन विभाग तक
- स्व-देखभाल: आराम, पानी, संतुलित भोजन, फ़र्स्ट-एड किट, और बिना पर्ची मिलने वाली (OTC) दवाएँ।
- प्राथमिक देखभाल: फ़ैमिली डॉक्टर (GP), नर्स या स्वास्थ्य केंद्र। ज़्यादातर समस्याओं, जाँच और टीकों का पहला दरवाज़ा। रात और छुट्टी में रात्रि सेवा या ऑन-कॉल क्लिनिक।
- द्वितीयक देखभाल: विशेषज्ञ (त्वचा, हृदय, आँख, हड्डी) और जाँचें, अक्सर प्राथमिक डॉक्टर के रेफ़रल से।
- अस्पताल (तृतीयक) देखभाल: ऑपरेशन, ICU, लंबा भर्ती रहना।
- आपातकालीन विभाग: केवल अचानक गंभीर खतरे में: सीने में दर्द, लकवे के लक्षण, तेज़ खून बहना, बड़ी चोट, साँस की तकलीफ़।
सही स्तर पर जाने से आपका समय बचता है और आपात दल असली खतरे वालों के लिए खाली रहते हैं।
आपात स्थिति: डिस्पैचर से बात
112 मिलाओ (भारत में एम्बुलेंस के लिए 108 भी)। डिस्पैचर तय करता है कि कौन-सी मदद भेजे, इसलिए शांति से बताओ:
- आप कहाँ हो? (पता, पहचान का निशान, फ़ोन का GPS)
- क्या हुआ?
- कितने लोग, होश में हैं और साँस ले रहे हैं?
- अपना नाम और फ़ोन नंबर।
पहले फ़ोन मत काटो। एम्बुलेंस आने तक डिस्पैचर प्राथमिक उपचार, जैसे छाती दबाना, सिखा सकता है।
दवाएँ, सप्लीमेंट और फ़ार्मासिस्ट
दवा रोग का इलाज या रोकथाम करती है और उसे असरदार व सुरक्षित साबित होना पड़ता है। आहार सप्लीमेंट (विटामिन, खनिज, हर्बल गोलियाँ) खाद्य पदार्थ है; उसे इलाज साबित नहीं करना पड़ता।
हमेशा पत्रक (leaflet) पढ़ो: किसके लिए, खुराक, कितनी बार, दिन में अधिकतम, कौन न ले, दूसरी दवाओं से असर, दुष्प्रभाव और एक्सपायरी।
आम OTC दुष्प्रभाव: पैरासिटामोल ज़्यादा लेने से लिवर को नुकसान; आइबुप्रोफ़ेन और एस्पिरिन से पेट में जलन; कुछ एलर्जी की गोलियों से नींद। एक ही सक्रिय घटक वाली दो दवाएँ कभी साथ मत लो।
फ़ार्मास्युटिकल देखभाल यानी फ़ार्मासिस्ट आपकी दवाएँ जाँचता है, इस्तेमाल समझाता है और खतरनाक मेल पकड़ता है। प्रतिपूर्ति (reimbursement) यानी डॉक्टर की पर्ची पर सूची वाली दवाओं का कुछ या पूरा दाम सरकारी व्यवस्था या बीमा देता है।
मरीज़ के अधिकार और प्रमाण-आधारित इलाज
हर मरीज़ के अधिकार हैं, ज़्यादातर देशों में कानून में लिखे:
- जानकारी: बीमारी और इलाज के विकल्प साफ़-साफ़ जानना।
- सहमति: इलाज से पहले हाँ या ना कहना (बच्चों के लिए माता-पिता भी)।
- गोपनीयता: मेडिकल रिकॉर्ड निजी।
- सम्मान, आदर और दर्द से राहत।
- शिकायत: अस्पताल, मरीज़-अधिकार लोकपाल (स्वतंत्र अधिकारी) या अदालत में।
अच्छा इलाज प्रमाण-आधारित होता है: इलाज क्लिनिकल ट्रायल में परखे जाते हैं, जहाँ एक समूह को नया इलाज और दूसरे को सामान्य इलाज या प्लेसिबो, बिना चुनाव के (random) दिया जाता है, ताकि पता चले क्या सच में काम करता है।
प्रसव के आसपास की देखभाल के अपने मानक हैं: गर्भावस्था में नियमित जाँच, सुरक्षित प्रसव, माँ को जानकारी और सहारा, और नवजात की शुरुआती जाँच।
ई-हेल्थ और खर्च कौन देता है
ई-हेल्थ डिजिटल साधन है: ऑनलाइन मरीज़ खाता जिसमें रिकॉर्ड, जाँच रिपोर्ट और टीके; कोड के रूप में ई-पर्ची; ई-रेफ़रल; और टेलीमेडिसिन, यानी फ़ोन या वीडियो पर परामर्श। लॉगिन बैंक पासवर्ड जैसा सुरक्षित रखो।
डॉक्टर के पास जाने की तैयारी: लक्षण लिखो (कब शुरू हुए, किससे आराम), दवाओं और एलर्जी की सूची, पूछने वाले सवाल; खून की जाँच से पहले पूछो कि खाली पेट जाना है या नहीं।
खर्च: पैसा आता है (1) करों से, (2) राष्ट्रीय स्वास्थ्य कोष में अनिवार्य बीमा किश्तों से, (3) निजी बीमा से और (4) जेब से भुगतान से। कोष में जुड़ने से स्वस्थ लोगों का पैसा बीमारों की मदद करता है, ताकि कोई अकेला पूरा खर्च न उठाए।
करके देखो: परिवार का स्वास्थ्य कार्ड बनाओ: आपात नंबर, सबसे पास का क्लिनिक, फ़ार्मेसी और अस्पताल, हर सदस्य की एलर्जी और रोज़ की दवाएँ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- देखभाल के स्तर: स्व-देखभाल → प्राथमिक → द्वितीयक (विशेषज्ञ) → तृतीयक (अस्पताल); आपात में 112
- रेफ़रल: प्राथमिक डॉक्टर विशेषज्ञ या जाँच के लिए भेजता है
- मरीज़ के अधिकार: जानकारी, सहमति, गोपनीयता, सम्मान, शिकायत
- 112 पर: कहाँ? क्या? कितने? फ़ोन मत काटो
- खर्च के स्रोत: कर, सामाजिक बीमा, निजी बीमा, जेब से भुगतान
- दवा ≠ सप्लीमेंट: केवल दवा को इलाज साबित करना पड़ता है
हल किए गए उदाहरण
1. रिया को एक दिन से नाक बह रही है और गला हल्का खराब है। पहले कहाँ जाए?
स्व-देखभाल: आराम, गुनगुना पानी, ज़रूरत हो तो फ़ार्मासिस्ट से पूछकर और पत्रक पढ़कर OTC दवा। ठीक न हो या बढ़े तो प्राथमिक डॉक्टर।
2. दादाजी अचानक एक हाथ नहीं उठा पा रहे और बोली लड़खड़ा रही है। परिवार क्या करे?
ये लकवे (स्ट्रोक) के लक्षण हैं। तुरंत 112 मिलाओ, कहाँ, क्या हुआ और वे होश में हैं, बताओ, और डिस्पैचर की बात मानो। फ़ैमिली डॉक्टर के पास गाड़ी लेकर मत जाओ।
3. एक छात्र के घुटने में दो महीने से दर्द है। सामान्य रास्ता क्या है?
प्राथमिक डॉक्टर → जाँच → ज़रूरत हो तो हड्डी-विशेषज्ञ और एक्स-रे के लिए रेफ़रल → इलाज या फ़िज़ियोथेरेपी।
4. ज़ुकाम की सिरप और दर्द की गोली, दोनों में पैरासिटामोल है। दोनों लेना खतरनाक क्यों?
एक ही सक्रिय घटक की खुराक दोगुनी हो जाती है और दिन की सुरक्षित सीमा पार हो सकती है, जिससे लिवर खराब हो सकता है।
आम गलतियाँ
- हल्के ज़ुकाम के लिए आपातकालीन विभाग जाना। इससे खतरे वाले मरीज़ों का इलाज देर से होता है।
- सप्लीमेंट को दवा मानना। उसे रोग ठीक करना साबित नहीं करना पड़ता।
- पत्रक न पढ़ना, या एक ही सक्रिय घटक वाली दवाएँ मिलाना।
- 112 के डिस्पैचर के सवाल पूरे होने से पहले फ़ोन काट देना।