संक्रामक रोग (infectious diseases)
उम्र के साथ रक्षा तंत्र कमज़ोर होता है। आम संक्रमण हैं: छाती का संक्रमण (निमोनिया), पेशाब का संक्रमण, फ्लू और त्वचा का संक्रमण।
- संकेत धीमे हो सकते हैं: थकान, उलझन, खाना छोड़ना, गिरना। तेज़ बुखार न भी हो।
- नर्सिंग: तापमान, नब्ज़, साँस और होश जाँचो; तरल जारी रखो; जल्दी बताओ; आदेश के अनुसार एंटीबायोटिक समय पर दो।
- रोकथाम: टीके (फ्लू, निमोनिया), हाथ धोना, मुँह की सफ़ाई और चलना-फिरना।
फ्रैक्चर (हड्डी टूटना)
बुज़ुर्गों की हड्डियाँ कमज़ोर हो जाती हैं (अस्थि-सुषिरता, osteoporosis), इसलिए मामूली गिरने से भी हड्डी टूट सकती है। कूल्हा, कलाई और रीढ़ आम जगहें हैं।
- संकेत: गिरने के बाद दर्द, खड़े या चल न पाना, सूजन, बेढंगा आकार या छोटा दिखता पैर।
- पहली मदद: उस हिस्से को हिलाओ मत। मदद बुलाओ। व्यक्ति को गर्म और शांत रखो।
- इलाज के बाद: जल्दी चलने में मदद करो, दर्द से राहत दो, त्वचा देखो, सुरक्षित चलना और व्यायाम सिखाओ।
- रोकथाम: सूखा फर्श, अच्छी रोशनी, ढीली चटाइयाँ नहीं, छड़ी या वॉकर, ठीक चप्पल-जूते, और कैल्शियम व विटामिन D वाला भोजन व धूप।
पार्किंसन जैसी स्थिति (parkinsonism)
पार्किंसन में दिमाग़ में डोपामीन नाम का रसायन कम बनता है। हरकत करना मुश्किल हो जाता है।
- संकेत: आराम में काँपना (कंपन), अकड़ी मांसपेशियाँ, धीमी हरकत, छोटे घिसटते कदम, भावहीन चेहरा, धीमी आवाज़।
- नर्सिंग: दवाएँ ठीक समय पर दो; कपड़े पहनने, खाने और चलने में ज़्यादा समय दो; साफ़ रास्ता, पकड़ने के हैंडल और वॉकर रखो; बड़े कदम लेने की याद दिलाओ; गिरने से बचाओ; निगलना और वज़न देखो।
- धैर्य रखो और जितना हो सके व्यक्ति को खुद करने दो। मन आमतौर पर साफ़ रहता है।
डिमेंशिया (भूलने का रोग)
डिमेंशिया में याददाश्त, सोचने और रोज़ के कामों की क्षमता महीनों-सालों में धीरे घटती है। यह सामान्य बुढ़ापा नहीं है।
- संकेत: ताज़ी बातें भूलना, रास्ता भटकना, शब्द न मिलना, मिज़ाज बदलना।
- नर्सिंग: तय दिनचर्या रखो, शांत और सरल बोलो, सामने से बात करो, बहस या सवाल-जवाब मत करो, घर सुरक्षित रखो (दरवाज़े बंद, खतरे हटाओ), घड़ी और तस्वीरें इस्तेमाल करो, खाना-पानी देते रहो और परिवार को सहारा दो।
अवसाद (depression)
अवसाद सिर्फ़ उदासी से ज़्यादा है। व्यक्ति हफ़्तों उदास रहता है, रुचि खो देता है, नींद खराब होती है, कम खाता है और खुद को बेकार समझ सकता है।
- बुज़ुर्गों में अक्सर छूट जाता है, क्योंकि यह थकान या दर्द जैसा दिखता है।
- नर्सिंग: बिना जल्दबाज़ी के सुनो, साथ और हल्की गतिविधि को बढ़ावा दो, दिनचर्या रखो, डॉक्टर को बताओ और आदेश के अनुसार दवा दो।
- सुरक्षा: अगर व्यक्ति मौत या खुद को नुकसान की बात करे तो कभी अनदेखा मत करो। उसके साथ रहो और तुरंत डॉक्टर को बताओ।
डेलीरियम (अचानक उलझन)
डेलीरियम घंटों या दिनों में अचानक आने वाली उलझन है जो ऊपर-नीचे होती रहती है। व्यक्ति सुस्त या बेचैन हो सकता है और ऐसी चीज़ें देख सकता है जो हैं नहीं।
- कारण: संक्रमण, प्यास, दर्द, नई दवाएँ, कम शुगर, कब्ज़, अनजानी जगह।
- नर्सिंग: तुरंत बताओ; कारण खोजो और इलाज कराओ; शांत, रोशनी वाला कमरा; घड़ी और कैलेंडर; चश्मा और सुनने की मशीन; जाने-पहचाने चेहरे; दिन-रात की दिनचर्या; सुरक्षित रखो।
- डेलीरियम आपात स्थिति है, पर अक्सर ठीक हो सकता है।
डिमेंशिया या डेलीरियम? डिमेंशिया = धीमा, सालों में। डेलीरियम = अचानक, घंटों-दिनों में, और ऊपर-नीचे होता है।
खुद करके देखो
खुद करके देखो: 3D में चरण 5 पर जाओ और दोनों ग्राफ़ देखो। बोलकर बताओ कि कौन सा धीमी ढलान है और कौन सा अचानक गिरकर वापस आने वाली डुबकी। फिर पूछो: "किसे आज ही डॉक्टर चाहिए?"
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बुज़ुर्ग में संक्रमण = धीमे संकेत (उलझन, खाना छोड़ना)
- फ्रैक्चर = गिरना + कमज़ोर हड्डी: गिरना रोको, जल्दी चलाओ
- पार्किंसन = कंपन + अकड़न + धीमे छोटे कदम
- डिमेंशिया = धीमा (महीने-साल); डेलीरियम = अचानक और ऊपर-नीचे
- अवसाद = हफ़्तों उदासी: सुनो, डॉक्टर को बताओ
हल किए गए उदाहरण
1. 80 साल के एक आदमी सुबह शांत थे पर शाम तक अचानक उलझन शुरू हो गई और उन्हें पेशाब का संक्रमण है। डिमेंशिया या डेलीरियम?
डेलीरियम। यह अचानक आई और संक्रमण से जुड़ी है। बताओ, कारण का इलाज कराओ, उन्हें सुरक्षित और शांत रखो।
2. घर में गिरना रोकने के तीन तरीके बताओ।
फर्श सूखा रखो, रात में रास्ते पर रोशनी करो, ढीली चटाइयाँ हटाओ, छड़ी या वॉकर लो, फिसलन-रहित चप्पल पहनो।
3. पार्किंसन वाली महिला की गोली देर से दी गई और वे बहुत अकड़ गईं। नर्स इससे क्या सीखती है?
दवा ठीक समय पर देनी चाहिए, क्योंकि देर से अकड़न और कंपन लौट आते हैं।
आम गलतियाँ
- हर बदलाव को "बुढ़ापा" कहना। अचानक बदलाव का हमेशा कारण होता है।
- डिमेंशिया और डेलीरियम को मिलाना। एक धीमा है, दूसरा अचानक।
- डिमेंशिया वाले से बहस करना। इससे डर बढ़ता है। शांत और सरल शब्द इस्तेमाल करो।
- अवसाद वाले की मौत की बात अनदेखा करना। हमेशा बताओ।