मातृत्व की अवधारणा
मातृत्व में महिला की गर्भावस्था, प्रसव और प्रसवोत्तर अवधि (जन्म के लगभग 6 हफ़्ते बाद तक) का स्वास्थ्य और उसके शिशु का स्वास्थ्य आता है। माँ और शिशु की देखभाल एक इकाई की तरह होती है, जिसके आसपास परिवार है।
- गर्भावस्था लगभग 40 हफ़्ते की होती है, तीन भागों (तिमाही) में।
- जन्म से पहले: योजना और नियमित जाँच (प्रसवपूर्व देखभाल)।
- जन्म के दौरान: कुशल सहायक, साफ़ जगह और सहारा।
- जन्म के बाद: माँ के शरीर और मन की देखभाल, दूध पिलाना और शिशु की देखभाल, परिवार नियोजन की सलाह।
- अच्छी मातृ देखभाल एक साथ दो जीवन बचाती है।
माँ और शिशु के स्वास्थ्य के रुझान
दो आम माप हैं: मातृ मृत्यु अनुपात (प्रति 1,00,000 जीवित जन्म पर गर्भावस्था या प्रसव के कारण मरने वाली माँएँ) और शिशु मृत्यु दर (प्रति 1,000 जीवित जन्म पर 1 साल से पहले मरने वाले शिशु)।
- दुनिया में मातृ मृत्यु अनुपात साल 2000 के लगभग 330 से घटकर 2020 में लगभग 220 हो गया। भारत में यह लगभग 130 (2014-16) से घटकर लगभग 97 (2018-20) हुआ।
- कारण: कुशल सहायक के साथ ज़्यादा प्रसव, प्रसवपूर्व जाँचें, साफ़ प्रसव, टीके (जैसे टेटनस), आयरन और फ़ोलिक एसिड, और बेहतर सड़कें व रेफ़रल।
- अमीर और गरीब इलाकों में बड़ा फ़र्क अब भी है। माँ की मृत्यु के मुख्य कारण हैं भारी रक्तस्राव, संक्रमण, उच्च रक्तचाप और असुरक्षित गर्भपात।
- लक्ष्य है इन संख्याओं को और घटाना और हर महिला तक देखभाल पहुँचाना।
प्रजनन स्वास्थ्य और अधिकार
प्रजनन स्वास्थ्य का मतलब है प्रजनन से जुड़ी हर बात में शरीर, मन और सामाजिक जीवन में स्वस्थ होना।
- जानकारी: शरीर, गर्भावस्था और परिवार नियोजन का सही, सरल ज्ञान।
- चुनाव: बिना दबाव या हिंसा के खुद तय करने का अधिकार कि बच्चे हों या नहीं, कब और कितने।
- सुरक्षित देखभाल: सुरक्षित गर्भावस्था और प्रसव, परिवार नियोजन सेवाएँ और संक्रमणों का इलाज।
- सम्मान और समानता: उम्र, वैवाहिक स्थिति, जाति, धर्म या विकलांगता के आधार पर भेदभाव नहीं।
- नर्स सिखाकर, सुनकर और रेफ़र करके इन अधिकारों का साथ देती है।
मातृ-नर्सिंग की खासियतें
मातृ-नर्सिंग एक स्वस्थ प्रक्रिया की देखभाल करती है, पर खतरे पर नज़र रखती है।
- प्रसवपूर्व जाँचें: वज़न, रक्तचाप, पेशाब की जाँच, खून की कमी की जाँच, पेट का माप, शिशु की धड़कन, सलाह पर आयरन-फ़ोलिक एसिड गोलियाँ और टेटनस का टीका।
- सिखाना: भोजन, आराम, खतरे के संकेत (रक्तस्राव, तेज़ सिरदर्द, चेहरे की सूजन, शिशु की हलचल न होना, बुखार) और प्रसव की योजना।
- प्रसव पीड़ा और जन्म: आराम, माँ और शिशु पर नज़र, साफ़ वातावरण और ज़रूरत पर जल्दी डॉक्टर को बुलाना।
- जन्म के बाद: रक्तस्राव, दर्द, दूध पिलाना, लगाव, शिशु का वज़न और गर्माहट, टीके और उदासी के संकेत।
- दो मरीज़: हमेशा माँ और शिशु को साथ सोचो और परिवार को शामिल करो।
मातृ-नर्सिंग में नैतिक मुद्दे
नैतिकता का मतलब है देखभाल में वही करना जो सही है।
- सूचित सहमति: महिला को तथ्य बताए जाते हैं और वह जाँच, इलाज और प्रसव की योजना पर मुक्त होकर तय करती है।
- स्वायत्तता और सम्मान: उसके चुनाव का सम्मान; परिवार या स्टाफ़ का दबाव नहीं।
- निजता और गोपनीयता: उसकी जानकारी सिर्फ़ उन्हीं से साझा होती है जिन्हें जानना ज़रूरी है।
- गरिमा: कोमल, सम्मानजनक स्पर्श और बोली; चिल्लाना या शर्मिंदा करना नहीं।
- पहले सुरक्षा: जब माँ या शिशु की जान खतरे में हो तो नर्स निजता और चुनाव को सुरक्षा के साथ संतुलित करती है और मदद बुलाती है।
- निष्पक्षता: हर महिला को एक जैसी गुणवत्ता की देखभाल।
खुद करके देखो
खुद करके देखो: एक घेरा बनाओ जिसके बीच माँ और शिशु हों और चारों ओर तीन "सहायक" लिखो (परिवार, नर्स, डॉक्टर)। फिर हर सहायक का जन्म से पहले, दौरान और बाद में एक-एक काम लिखो। 3D में खुद करके देखो में घेरे के हर व्यक्ति को दबाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मातृत्व = गर्भावस्था + प्रसव + जन्म के बाद माँ और शिशु की देखभाल
- मातृ मृत्यु अनुपात = मातृ मृत्यु / जीवित जन्म x 1,00,000
- शिशु मृत्यु दर = शिशु मृत्यु / जीवित जन्म x 1,000
- अधिकार = जानकारी + मुक्त चुनाव + सुरक्षित देखभाल
- नैतिकता = सहमति + निजता + गरिमा + निष्पक्षता, सुरक्षा के साथ संतुलित
हल किए गए उदाहरण
1. एक इलाके में 40,000 जीवित जन्म हैं और मातृ मृत्यु अनुपात प्रति 1,00,000 पर 150 है। कितनी माँओं की मृत्यु अपेक्षित है?
150 प्रति 1,00,000 = 150 x (40,000 / 1,00,000) = 150 x 0.4 = 60 मातृ मृत्यु।
2. प्रसवपूर्व जाँच में होने वाली तीन जाँचें बताओ।
वज़न, रक्तचाप, पेशाब की जाँच, पेट का माप, शिशु की धड़कन (कोई तीन)।
3. एक महिला कहती है कि उसे कोई जाँच नहीं करानी। नर्स को क्या करना चाहिए?
तथ्य और जोखिम साफ़ और सम्मान से समझाओ, उसके सवालों के जवाब दो और उसके फ़ैसले का सम्मान करो। दबाव डालना या तथ्य छिपाना नैतिक नहीं है।
आम गलतियाँ
- मातृ देखभाल को सिर्फ़ जन्म के दिन तक सीमित समझना। यह पहले शुरू होती है और बाद तक चलती है।
- महिला को जाँच या तरीका मानने पर मजबूर करना। चुनाव मुक्त होना चाहिए।
- महिला की जानकारी पूछने वाले हर किसी को बता देना।
- सिर्फ़ माँ की देखभाल करना और शिशु को भूल जाना, या उलटा।