इलाज के दौरान नर्सिंग
बच्चा छोटा वयस्क नहीं होता। बच्चे बढ़ रहे होते हैं, जल्दी डर जाते हैं और हमेशा बता नहीं पाते कि कहाँ दर्द है। इसलिए नर्स देखभाल का तरीका बदलती है।
- समझाना: छोटे, सच्चे और आसान शब्दों में बताओ कि क्या होगा और कैसा लगेगा।
- खेल: खिलौने, चित्र और कहानी डर घटाते हैं। खेल से बच्चे को ड्रिप या मास्क भी दिखाया जा सकता है।
- सुरक्षा: दवा की मात्रा बच्चे के वज़न से निकाली जाती है। दो नर्सें जाँचती हैं। बिस्तर की रेलिंग ऊपर रहती है। छूने से पहले हाथ धोए जाते हैं।
- निगरानी: तापमान, नब्ज़, साँस और रंग देखो। शिशु जल्दी बिगड़ सकते हैं।
- परिवार पास रखो: माता-पिता सबसे बड़ा सहारा हैं। इसे परिवार-केंद्रित देखभाल (family-centred care) कहते हैं।
- सहमति: माता-पिता या अभिभावक अनुमति देते हैं। बच्चे को भी उसकी उम्र के हिसाब से बताया और सुना जाता है।
तीव्र (acute) चरण
तीव्र बीमारी अचानक शुरू होती है और अक्सर तेज़ होती है: तेज़ बुखार, तेज़ साँस, या उल्टी-दस्त जिनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है। यह कुछ दिन या हफ़्ते चलकर ठीक हो जाती है या दीर्घकालिक बन जाती है।
नर्सिंग का ध्यान: नज़दीकी निगरानी और जल्दी कदम। तापमान, नब्ज़ और साँस बार-बार देखो। ड्रिप सही गति से चलाओ। दवा समय पर दो। बच्चा क्या पीता और निकालता है, लिखो। साँस में तकलीफ़, दौरे या बहुत ज़्यादा नींद जैसे ख़तरे के संकेत तुरंत डॉक्टर को बताओ।
माता-पिता को भी शांत रखो। वे भी डरे होते हैं।
दीर्घकालिक (chronic) चरण
दीर्घकालिक बीमारी लंबे समय तक रहती है, महीनों या सालों। उदाहरण: दमा, बच्चों में मधुमेह, या जन्म से हृदय की समस्या।
नर्सिंग का ध्यान: सिखाना और सहारा देना। बच्चे और परिवार को दवा, खाने के नियम और चेतावनी के संकेत सीखने होते हैं। बच्चे को स्कूल जाने, खेलने और दोस्त बनाने में मदद करो। पूरे परिवार की थकान पर नज़र रखो। देखो कि बच्चा ठीक से बढ़ और सीख रहा है। बच्चे को छोटे काम दो, जैसे दवा का चार्ट भरना, ताकि वह नियंत्रण महसूस करे।
अंतिम (terminal) चरण
अंतिम चरण में डॉक्टर जानते हैं कि बीमारी ठीक नहीं हो सकती। लक्ष्य इलाज से बदलकर आराम और गरिमा हो जाता है।
नर्सिंग का ध्यान: दर्द और बेचैनी कम करो, बच्चे को साफ़ और गर्म रखो, और जैसा वह चाहे खेलने या आराम करने दो। माता-पिता और भाई-बहनों को पास रखो। सच और कोमलता से बात करो। उनका डर और दुख सुनो। उनकी संस्कृति और विश्वास का सम्मान करो। बच्चे के जाने के बाद परिवार और टीम की नर्सों को सहारा दो। इस देखभाल को अक्सर उपशामक देखभाल (palliative care) कहते हैं।
करके देखो
करके देखो: एक टेडी लो और नर्स बनकर खेलो। टेडी को तीन छोटे वाक्यों में बताओ कि थर्मामीटर क्या करता है। फिर किसी छोटे बच्चे से पूछो कि तुम आगे क्या करोगे। 3D में तीनों चरण के बटन दबाओ और बोलकर बताओ कि नर्स हर चरण में क्या देखती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- बच्चे की देखभाल = समझाना + खेल + सुरक्षा
- तीव्र = अचानक और तेज़: निगरानी और जल्दी कदम
- दीर्घकालिक = लंबी बीमारी: सिखाना और सहारा
- अंतिम = इलाज नहीं: आराम, गरिमा और परिवार
- बच्चे की खुराक = प्रति किलो खुराक x वज़न (किलो) (फिर खुराकों की संख्या से भाग)
हल किए गए उदाहरण
1. 5 साल का बच्चा इंजेक्शन से डरता है। नर्स क्या करे?
आसान शब्दों में समझाए, बच्चे को खिलौना इंजेक्शन पकड़ाए, माता-पिता को पास रखे, बताए कि थोड़ी देर चुभेगा, और बाद में शाबाशी दे।
2. बच्चे का वज़न 12 किलो है। खुराक 15 मि.ग्रा. प्रति किलो प्रतिदिन है, 3 बराबर खुराकों में। एक खुराक निकालो।
प्रतिदिन कुल = 15 x 12 = 180 मि.ग्रा.। एक खुराक = 180 / 3 = 60 मि.ग्रा.।
3. यह कौन सा चरण है: दमे वाला बच्चा जो तीन साल से इन्हेलर ले रहा है?
दीर्घकालिक चरण। नर्स इन्हेलर का उपयोग, कारण और स्कूल की देखभाल सिखाती है।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ माता-पिता से बात करना और बच्चे को अनदेखा करना।
- वयस्क की खुराक देना। बच्चे की खुराक वज़न पर निर्भर है।
- बच्चे से कहना "दर्द नहीं होगा" जबकि होगा। सच और कोमलता से बोलो।
- सोचना कि अंतिम चरण में कुछ नहीं करना। इसमें सक्रिय आराम देखभाल होती है।