आपदा के प्रकार और चिकित्सा देखभाल
प्राकृतिक आपदाएँ: भूकंप, सुनामी, बाढ़, चक्रवात, भूस्खलन, लू। मानव-निर्मित आपदाएँ: बड़ी आग, इमारत गिरना, परिवहन दुर्घटना, रासायनिक या विकिरण रिसाव, संघर्ष। हर आपदा अलग चोटें देती है: भूकंप में दबने की चोट, बाढ़ में डूबना और संक्रमण, आग में जलना और धुएँ का नुक़सान।
आपदा चिकित्सा देखभाल संगठित होती है: घटनास्थल पर बचाव, प्राथमिक उपचार चौकी, अस्पतालों तक ले जाना और अस्पतालों का बिस्तर बढ़ाना। टीम में डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिक और स्वयंसेवक एक कमान व्यवस्था में काम करते हैं।
आपदा नर्सिंग की विशेषताएँ
सामान्य नर्सिंग में हर मरीज़ को सबसे अच्छी देखभाल देने का लक्ष्य होता है। आपदा में साधन कम होते हैं, इसलिए लक्ष्य बनता है अधिकतम लोगों का अधिकतम भला। विशेषताएँ: तुरंत निर्णय, ट्राइएज, कम उपकरणों में काम, कई एजेंसियों के साथ टीमवर्क, और तनाव में बचे लोगों व मददगारों की देखभाल।
ट्राइएज के रंग: लाल (तुरंत, जान को ख़तरा पर इलाज संभव), पीला (जल्दी, थोड़ा रुक सकता है), हरा (हल्की चोट, चल सकता है), काला (मृत या मौजूदा साधनों से बचाना संभव नहीं)। मरीज़ों को दोबारा जाँचा जाता है क्योंकि हालत बदल सकती है। नर्स रिकॉर्ड भी रखती हैं ताकि परिवार मिल सकें और देखभाल जारी रहे।
आपदा के हर चरण में नर्सिंग
तैयारी (शांत काल): ख़तरे जानना, अभ्यास करना, सामान जमा करना, समुदाय को सिखाना, अतिरिक्त मदद वाले लोगों (बुज़ुर्ग, शिशु, दिव्यांग) की योजना बनाना।
तीव्र चरण (घंटों से लगभग 3 दिन): बचाव, ट्राइएज, जान के ख़तरे का इलाज, ख़ून रोकना, गर्म रखना, लोगों को खोजना।
उप-तीव्र चरण (दिनों से हफ़्तों): आश्रय का स्वास्थ्य, साफ़ पानी और शौचालय, संक्रमण रोकना, लंबी बीमारी की दवा, देर तक बैठे रहने से ख़ून के थक्के रोकना, तनाव पर नज़र।
पुनर्वास (दीर्घकालिक) चरण (हफ़्तों से सालों): जीवन दोबारा बनाने में मदद, लंबी मानसिक देखभाल, अकेलापन रोकना, नियमित स्वास्थ्य सेवाएँ शुरू करना। हर चरण अगली आपदा की तैयारी में काम आता है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- लक्ष्य: अधिकतम लोगों का अधिकतम भला
- ट्राइएज: लाल = तुरंत, पीला = जल्दी, हरा = हल्का, काला = मृत या बचाना मुश्किल
- चरण: तैयारी, तीव्र, उप-तीव्र, पुनर्वास
- दोबारा ट्राइएज: हालत बदले तो फिर जाँचें
हल किए गए उदाहरण
1. इमारत गिरी है। एक आदमी दबा है, बहुत ख़ून बह रहा है पर होश में है; एक महिला को छोटा कट है और वह चल रही है; एक बच्चे की साँस और धड़कन लंबे समय से बंद हैं। ट्राइएज रंग दीजिए।
ख़ून बहता आदमी: लाल (जान का ख़तरा पर इलाज संभव)। छोटा कट: हरा। साँस-धड़कन बंद बच्चा: बड़ी आपदा में कम साधन हों तो काला, पर टीम दोबारा जाँचती है और स्थानीय नियम मानती है।
2. कौन-सा चरण: आश्रय में 200 लोग हैं, कई को दस्त हैं और बुज़ुर्गों की बीपी की गोलियाँ ख़त्म हो गई हैं।
उप-तीव्र चरण। नर्सें साफ़ पानी, शौचालय, संक्रमण नियंत्रण और लंबी बीमारी की दवा पर ध्यान देती हैं।
3. तैयारी चरण में स्कूल को तीन काम बताइए।
अभ्यास (ड्रिल), सुरक्षित निकास और जमा होने की जगह चिह्नित करना, प्राथमिक उपचार किट और संपर्क सूची रखना, और विद्यार्थियों को सिखाना।
आम गलतियाँ
- सबसे ज़ोर से चिल्लाने वाले का इलाज पहले करना। ट्राइएज ज़रूरत से होता है, शोर से नहीं।
- सोचना कि आपदा की देखभाल पहले हफ़्ते में ख़त्म हो जाती है।
- तनाव की देखभाल और लंबी बीमारी वाले बुज़ुर्गों को भूल जाना।
- हालत बदलने पर ट्राइएज रंग दोबारा न जाँचना।