सामान्य प्रसवकालीन क्रम और नर्सिंग
प्रसवकाल-समीप अवधि गर्भ के लगभग 22 सप्ताह से जन्म के 7 दिन बाद तक है। यह माँ और शिशु के लिए सबसे जोखिम भरा समय है, इसलिए सावधान देखभाल ज़रूरी है।
गर्भावस्था की जाँच (प्रसवपूर्व देखभाल)। नर्स वज़न, रक्तचाप, पेशाब, हीमोग्लोबिन, गर्भाशय का आकार और शिशु की धड़कन (लगभग 110 से 160 प्रति मिनट) जाँचती है। वह आयरन-फ़ोलिक एसिड देती है, भोजन, आराम और टीकों की सलाह देती है और ख़तरे के संकेत सिखाती है।
प्रसव के तीन चरण हैं: (1) गर्भाशय-ग्रीवा खुलती है, (2) शिशु का जन्म, (3) अपरा (प्लेसेंटा) बाहर आती है। नर्स संकुचन, शिशु की धड़कन और माँ का रक्तचाप देखती है, माँ को आराम और जानकारी देती है और कमरा साफ़ व निजी रखती है।
जन्म के बाद। शिशु को सुखाकर गर्म रखा जाता है, माँ की छाती पर त्वचा से त्वचा लगाया जाता है, और पहले घंटे में स्तनपान शुरू होता है। नर्स शिशु की हालत का स्कोर (अपगार स्कोर, 1 और 5 मिनट पर) देती है, नाल की देखभाल करती है और माँ का ख़ून बहना, गर्भाशय और दर्द जाँचती है। पहले दिनों में माँ और शिशु पर नज़दीकी निगरानी रहती है।
प्रसवकालीन असामान्यताएँ और नर्सिंग
कुछ समस्याओं में तुरंत कदम चाहिए:
- ज़्यादा ख़ून बहना (रक्तस्राव) जन्म से पहले या बाद में: महिला को लेटाएँ, गर्म रखें, मदद बुलाएँ, प्रशिक्षित हों तो जन्म के बाद गर्भाशय को मलें, और तुरंत इलाज का इंतज़ाम करें।
- प्री-एक्लेम्पसिया: ऊँचा रक्तचाप, साथ में सिरदर्द, सूजन या धुँधला दिखना। बाईं करवट आराम कराएँ और तुरंत डॉक्टर को बताएँ; इलाज न हो तो दौरे पड़ सकते हैं।
- गर्भावधि मधुमेह: गर्भ में शक्कर ऊँची। भोजन की सलाह, जाँच और फ़ॉलो-अप।
- समय से पहले प्रसव: 37 सप्ताह से पहले दर्द। अस्पताल जाएँ; शिशु को अतिरिक्त गर्मी और साँस में सहारा लग सकता है।
- शिशु की हलचल कम: हलचल गिनें और बताएँ।
- नवजात की समस्याएँ: कम वज़न (2.5 किलो से कम), पीलिया, साँस की तकलीफ़, संक्रमण।
- माँ का मन: प्रसव के बाद उदासी (प्रसवोत्तर अवसाद)। सुनें और आगे भेजें।
नर्स का काम है जल्दी पहचानना, तुरंत कदम उठाना, रिकॉर्ड रखना और परिवार को सहारा देना।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रसवकाल-समीप अवधि = गर्भ के लगभग 22 सप्ताह से जन्म के 7 दिन बाद तक
- प्रसव के चरण: 1 ग्रीवा खुलती है, 2 शिशु का जन्म, 3 अपरा बाहर
- नवजात: सुखाओ, गर्म रखो, त्वचा से त्वचा, पहले घंटे में दूध
- चेतावनी: ज़्यादा ख़ून, सिरदर्द के साथ ऊँचा BP, जल्दी प्रसव, हलचल कम
हल किए गए उदाहरण
1. 34 सप्ताह की महिला को तेज़ सिरदर्द, चेहरे पर सूजन और रक्तचाप पहले से काफ़ी ऊँचा है। क्या हो सकता है और नर्स क्या करे?
संभवतः प्री-एक्लेम्पसिया। उसे बाईं करवट आराम कराएँ, तुरंत डॉक्टर को बताएँ, BP लिखें और तुरंत इलाज की तैयारी करें। रुकना नहीं है।
2. सामान्य प्रसव के तुरंत बाद शिशु ठीक साँस ले रहा है और रो रहा है। चार नर्सिंग काम बताइए।
शिशु को सुखाकर लपेटें, माँ की छाती पर त्वचा से त्वचा लगाकर गर्म रखें, पहले घंटे में स्तनपान शुरू कराएँ, और अपगार स्कोर देकर नाल की देखभाल करें।
3. 30 सप्ताह की महिला कहती है कि शिशु रोज़ से बहुत कम हिल रहा है। नर्स क्या करे?
उसे करवट लेकर तय समय तक हलचल गिनने को कहें, शिशु की धड़कन सुनें, और हलचल अब भी कम हो तो तुरंत डॉक्टर को बताएँ।
आम गलतियाँ
- प्रसवकाल-समीप अवधि को सिर्फ़ जन्म का दिन समझना। यह लगभग 22 सप्ताह से जन्म के 7 दिन बाद तक है।
- गर्भ में सिरदर्द या सूजन को अनदेखा करना। यह प्री-एक्लेम्पसिया हो सकता है।
- नवजात को ठंड लगने देना। सुखाएँ, लपेटें और त्वचा से त्वचा रखें।
- ज़्यादा ख़ून बहने पर घर पर इंतज़ार करना। इसमें तुरंत अस्पताल चाहिए।