खाद्य योजक क्या है?
खाद्य योजक वह पदार्थ है जो खाने में जानबूझकर, थोड़ी मात्रा में, किसी ख़ास काम के लिए मिलाया जाता है। चीनी और नमक को आम तौर पर सामग्री गिना जाता है, योजक नहीं। जो गलती से पहुँच जाए वह संदूषक है, योजक नहीं।
योजक प्राकृतिक भी हो सकते हैं (पीले रंग के लिए हल्दी, विटामिन C) और कारख़ाने में बने भी (सोडियम बेन्ज़ोएट)। प्राकृतिक हमेशा ज़्यादा सुरक्षित नहीं और कारख़ाने वाला हमेशा हानिकारक नहीं। मायने रखती है मात्रा और सुरक्षा जाँच।
खाद्य योजकों के उद्देश्य और उपयोग
योजक पाँच मुख्य काम करते हैं:
- खाना ख़राब होने से बचाना: परिरक्षक कीटाणु और फफूँद धीमे करते हैं (अचार और पेयों में सोडियम बेन्ज़ोएट); प्रति-ऑक्सीकारक हवा से फल भूरे होने या तेल का स्वाद बिगड़ने से रोकते हैं (विटामिन C, विटामिन E)।
- खाने को अच्छा दिखाना: रंग (हल्दी, कैरामेल, टार्ट्राज़ीन) और विरंजक।
- स्वाद अच्छा करना: मिठास (एस्पार्टेम, स्टीविया), सुगंध और स्वाद बढ़ाने वाले (MSG)।
- बनावट ठीक करना: इमल्सीकारक (लेसिथिन) तेल-पानी मिलाए रखते हैं; गाढ़ा करने वाले और जेल (पेक्टिन, स्टार्च, जिलेटिन) गाढ़ापन देते हैं; फुलाने वाले (बेकिंग सोडा) केक फुलाते हैं।
- पोषण जोड़ना: विटामिन और खनिज, जैसे नमक में आयोडीन या तेल में विटामिन A।
खाद्य योजकों के मानक और लेबल
सुरक्षा जाँच। विशेषज्ञ योजक की जाँच जानवरों पर करके नतीजे पढ़ते हैं। वे वह मात्रा खोजते हैं जिससे नुकसान नहीं होता, फिर बड़े सुरक्षा अंतर के साथ स्वीकार्य दैनिक सेवन (ए.डी.आई.) तय करते हैं, यानी शरीर के हर किलो भार पर मि.ग्रा. (अक्सर बिना-नुकसान मात्रा से 100 गुना कम)।
मानक। कानून में अनुमत योजकों की सूची होती है और हर खाने के लिए अधिकतम सीमा (जैसे पेय के हर लीटर में मि.ग्रा.)। प्रतिबंधित योजक डालना या सीमा से ज़्यादा डालना अपराध है। कोडेक्स एलिमेंटेरियस जैसे वैश्विक मार्गदर्शक और भारत में FSSAI जैसी राष्ट्रीय संस्थाएँ ये सूचियाँ तय करती हैं।
लेबल। पैकेट पर ये दिखना चाहिए: वर्ग (जैसे रंग, परिरक्षक), नाम या संख्या (ई-नंबर, जैसे E211), और वज़न के क्रम में सभी सामग्रियों की सूची। एलर्जी करने वाली चीज़ें और मिलाए गए रंग साफ़ दिखने चाहिए। कुछ उत्पादों पर चेतावनी भी ज़रूरी है।
लेबल कैसे पढ़ें: सामग्री सूची देखिए, वर्ग वाले शब्द ढूँढिए, तारीख और लाइसेंस नंबर जाँचिए। परिवार में किसी को किसी चीज़ से एलर्जी हो तो हर बार पढ़िए।
करके देखिए
3D में चरण 5 पर जाइए। सिर्फ़ परिरक्षक चुनिए: कीटाणु चले जाएँगे। प्रति-ऑक्सीकारक हटाइए: सेब भूरा हो जाएगा। मात्रा 100 मि.ग्रा./ली से ऊपर ले जाइए और चेतावनी देखिए। घर में: जूस या बिस्कुट के पैकेट का लेबल पढ़िए। जितने योजक वर्ग मिलें उनकी सूची बनाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- योजक = जानबूझकर, थोड़ी मात्रा में, काम के लिए मिलाया पदार्थ
- मात्रा ≤ कानूनी सीमा; सीमा ए.डी.आई. (मि.ग्रा./किग्रा भार) से बनती है
- प्रतिदिन कुल अनुमत = ए.डी.आई. × शरीर का भार
- लेबल: वर्ग + नाम या ई-नंबर + सामग्री सूची
हल किए गए उदाहरण
1. किसी योजक का ए.डी.आई. 5 मि.ग्रा. प्रति किग्रा भार है। 40 किग्रा का बच्चा एक दिन में अधिकतम कितना ले सकता है?
5 × 40 = 200 मि.ग्रा. प्रतिदिन।
2. एक पेय में परिरक्षक की अधिकतम सीमा 100 मि.ग्रा. प्रति लीटर है। सीमा पर 250 mL गिलास में कितना होगा?
250 mL = 0.25 L। 100 × 0.25 = 25 मि.ग्रा.
3. वर्ग बताइए: (अ) सूखे सेब में विटामिन C, (ब) मेयोनीज़ में लेसिथिन, (स) चावल में हल्दी, (द) अचार में सोडियम बेन्ज़ोएट।
(अ) प्रति-ऑक्सीकारक, (ब) इमल्सीकारक, (स) रंग, (द) परिरक्षक।
4. पैकेट पर लिखा है "परिरक्षक (E211)"। वर्ग और संख्या क्या बताते हैं?
काम (परिरक्षक) और ठीक-ठीक पदार्थ (E211 यानी सोडियम बेन्ज़ोएट)। ख़रीदार इसे देख सकता है।
5. कारख़ाना 150 मि.ग्रा. प्रति लीटर परिरक्षक डालता है जबकि सीमा 100 मि.ग्रा./ली है। समस्या क्या है?
यह सीमा से 50% ज़्यादा है (150 यानी 100 का 1.5 गुना)। यह कानून तोड़ना है और सेहत के लिए जोखिम है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि प्राकृतिक योजकों की सीमा नहीं होती। कोई भी योजक ज़्यादा मात्रा में नुकसान कर सकता है।
- सब ई-नंबरों को हानिकारक मानना। संख्या बस जाँचे हुए योजक का कोड है।
- परिरक्षक (कीटाणु रोके) और प्रति-ऑक्सीकारक (हवा के नुकसान से बचाए) को मिला देना।
- यह सोचना कि ज़्यादा योजक से खाना और सुरक्षित होता है। सीमा से ऊपर नुकसानदेह और ग़ैरकानूनी है।