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मछली: उपास्थिल और अस्थिल

मछलियाँ शीत-रक्त वाली कशेरुकी हैं जो पानी में रहती हैं, गिल से साँस लेती हैं, पंखों से तैरती हैं और उनका शरीर धारा-रेखित होता है। उपास्थिल मछलियों (शार्क, रे) का कंकाल नरम उपास्थि का होता है। अस्थिल मछलियों (रोहू, कतला, टूना) का कंकाल हड्डी का, गिल पर ढक्कन और वायु-कोष होता है। मनुष्य जाल से और मत्स्य पालन से मछली पाते हैं।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. मछली का शरीर दोनों सिरों पर नुकीला, नाव जैसा होता है। यह पानी में आसानी से फिसलता है।
  2. पंखों के अलग काम हैं। पूँछ धकेलती है, बगल के पंख मोड़ते हैं, ऊपर का पंख सीधा रखता है।
  3. गिल (लाल) पानी से ऑक्सीजन लेते हैं। पानी मुँह से अंदर जाता है और गिल से बाहर निकलता है।
  4. वायु-कोष एक गैस की थैली है। ज़्यादा गैस से मछली ऊपर उठती है, कम गैस से नीचे जाती है।
  5. दो समूह हैं। शार्क का कंकाल नरम उपास्थि का और अस्थिल मछली का कठोर हड्डी का होता है।
  6. मछली का जाल: बड़े छेदों से छोटी मछलियाँ निकल जाती हैं। जाली खिसकाकर देखिए क्या पकड़ा जाता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

गिल लाल क्यों होते हैं?

उनमें छोटी रक्त वाहिकाएँ भरी होती हैं। रक्त वहाँ पानी से ऑक्सीजन लेता है।

मछली दोनों सिरों पर नुकीली क्यों होती है?

धारा-रेखित आकार से पानी फिसलकर निकल जाता है, इसलिए मछली को कम ऊर्जा लगती है।

मछली हवा में साँस क्यों नहीं ले सकती?

गिल की पतली परतों को अलग रखने के लिए पानी चाहिए। हवा में वे चिपक जाती हैं।

वायु-कोष क्या करता है?

यह गैस की थैली है जिससे मछली ऊपर उठती या डूबती है। गैस की पट्टी खिसकाकर देखिए।

शार्क अस्थिल मछली क्यों नहीं है?

उसका कंकाल हड्डी का नहीं, नरम उपास्थि का है। दोनों मछलियाँ साथ-साथ देखिए।

शरीर का आकार और पंख

मछली का शरीर धारा-रेखित होता है: दोनों सिरों पर पतला और बीच में चौड़ा। पानी उस पर से कम रुकावट के साथ बह जाता है। शल्कों वाली चिकनी त्वचा भी मदद करती है।

शरीर के दोनों ओर संवेदी कोशिकाओं की एक रेखा, पार्श्व रेखा, पानी की हलचल महसूस करती है।

मछली साँस कैसे लेती है

पानी में थोड़ी ऑक्सीजन घुली होती है। मछली मुँह से पानी अंदर लेकर गिल पर से बहाती है। गिल में छोटी-छोटी रक्त वाहिकाएँ भरी होती हैं, इसलिए वे लाल दिखते हैं। ऑक्सीजन पानी से रक्त में जाती है और कार्बन डाइऑक्साइड उलटी दिशा में। पानी गिल छिद्रों से बाहर निकलता है। अस्थिल मछलियों में गिल का ढक्कन (ऑपरकुलम) गिल की रक्षा करता और पानी पंप करने में मदद करता है।

पानी से बाहर मछली साँस नहीं ले पाती क्योंकि गिल की पतली परतें आपस में चिपक जाती हैं।

वायु-कोष और तैरना

अस्थिल मछलियों में गैस से भरी थैली होती है, जिसे वायु-कोष कहते हैं। मछली उसमें गैस बढ़ा दे तो कुल मिलाकर हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है। गैस निकाल दे तो भारी होकर नीचे डूबती है। इससे वह बिना ज़्यादा मेहनत के किसी भी गहराई पर रह सकती है। शार्क में वायु-कोष नहीं होता, इसलिए उसे तैरते रहना पड़ता है, पर उसके तैलीय यकृत से उसे तैरने में मदद मिलती है।

उपास्थिल और अस्थिल मछलियाँ

उपास्थिल मछलीअस्थिल मछली
कंकालनरम उपास्थिकठोर हड्डी
उदाहरणशार्क, रेरोहू, कतला, टूना, समुद्री घोड़ा
गिल का ढक्कननहीं, खुले छिद्रहोता है
वायु-कोषनहींहोता है
शल्कदाँत जैसे, खुरदरेपतले, चपटे, एक-दूसरे पर चढ़े
निषेचनशरीर के अंदरज़्यादातर बाहर

दोनों शीत-रक्त वाली हैं (शरीर का ताप पानी जैसा रहता है) और हृदय दो कक्षों वाला होता है।

मछली पकड़ना और मत्स्य पालन

लोग जाल, काँटे और फंदों से मछली पकड़ते हैं। छेद का आकार (जाली) बहुत मायने रखता है। बड़ी जाली से छोटी, कम उम्र की मछलियाँ निकल जाती हैं, जो बाद में बड़ी होकर अंडे देती हैं। बहुत ज़्यादा या बहुत छोटी मछलियाँ पकड़ना अति-मत्स्यन है, जिससे मछलियों की संख्या घटती है।

मत्स्य पालन में रोहू और कतला जैसी मछलियाँ साफ़ पानी और चारे के साथ तालाबों में पाली जाती हैं, जिससे जंगली मछलियों पर दबाव कम पड़ता है। मछली से प्रोटीन, विटामिन और ओमेगा-3 तेल मिलता है।

करके देखिए

3D में: वायु-कोष वाले चरण में गैस को ऊपर और नीचे खिसकाइए। मछली कहाँ जाती है? जाल वाले चरण में जाली तब तक खिसकाइए जब तक छोटी मछलियाँ निकल न जाएँ।

घर पर: बाज़ार में साबुत मछली या उसकी तस्वीर देखिए। पूँछ, पीठ का पंख, गिल का ढक्कन और शल्क ढूँढ़िए। हर एक का काम बताइए।

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. एक मछली पूँछ हिलाए बिना तालाब की तली से ऊपर आ जाती है। कैसे?

वह वायु-कोष में गैस भर लेती है। इससे वह कुल मिलाकर हल्की हो जाती है और ऊपर उठती है।

2. शार्क और रोहू में एक अंतर और एक समानता बताइए।

अंतर: शार्क का कंकाल उपास्थि का और रोहू का हड्डी का है (रोहू में गिल ढक्कन और वायु-कोष भी है)। समानता: दोनों गिल से साँस लेती हैं और शीत-रक्त वाली कशेरुकी हैं।

3. एक किसान ने तालाब में रोहू के 2,000 बच्चे डाले। 10% मर गए। कितने बचे?

2000 का 10% = 200 मरे। 2000 - 200 = 1800 बचे।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. मछली किससे साँस लेती है?
2. किस मछली का कंकाल उपास्थि का होता है?
3. वायु-कोष मछली की किसमें मदद करता है?
4. कौन-सा पंख मछली को आगे धकेलता है?
5. जाल की बड़ी जाली क्यों अच्छी है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मछली पानी के अंदर साँस कैसे लेती है?

वह मुँह से पानी लेकर गिल पर बहाती है। पानी में घुली ऑक्सीजन गिल पर रक्त में चली जाती है।

उपास्थिल और अस्थिल मछली में क्या अंतर है?

शार्क जैसी उपास्थिल मछलियों का कंकाल नरम उपास्थि का और गिल छिद्र खुले होते हैं। रोहू जैसी अस्थिल मछलियों का कंकाल हड्डी का, गिल ढक्कन और वायु-कोष होता है।

अति-मत्स्यन समस्या क्यों है?

बहुत ज़्यादा, खासकर छोटी, मछलियाँ पकड़ने से अंडे देने वाली मछलियाँ कम बचती हैं और मछलियों की संख्या घटती है।

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