शरीर का आवरण क्या है?
हर जंतु के शरीर पर बाहर एक ढक्कन होता है। जंतु को देखते ही सबसे पहले यही दिखता है। ज़्यादातर जंतुओं में यह ढक्कन त्वचा है। कुछ जंतुओं में यह कठोर कवच या शरीर से बनी कठोर बाहरी परत है।
इसके चार बड़े काम हैं। यह अंदर के शरीर की रक्षा करता है। पानी की कमी रोकता है। शरीर का ताप काबू में रखने में मदद करता है। और छूना, गर्मी और दर्द महसूस कराता है।
त्वचा की परतें
स्तनधारी की त्वचा में तीन भाग होते हैं। हर भाग का अलग काम है।
- ऊपरी परत (एपिडर्मिस): पतली और मज़बूत। यह मृत चपटी कोशिकाओं से बनी है, जो घिसकर झड़ती रहती हैं। नीचे से नई कोशिकाएँ आती रहती हैं। त्वचा का रंग यहीं होता है।
- बीच की परत (डर्मिस): मोटी। इसमें रक्त वाहिकाएँ, तंत्रिकाएँ, स्वेद ग्रंथियाँ और बालों की जड़ें होती हैं। यहाँ की तंत्रिकाएँ छूना और दर्द महसूस करती हैं।
- वसा की परत: भोजन की ऊर्जा जमा रखती है और मुलायम गद्दी जैसी बनकर गर्मी को अंदर रखती है।
मछली, मेंढक और साँप की भी त्वचा होती है, पर भाग थोड़े अलग होते हैं। मेंढक की त्वचा पतली और गीली होती है, जो साँस लेने में भी मदद करती है।
रक्षा करने वाली त्वचा
ऊपरी परत दीवार जैसी है। बिना कटी त्वचा से कीटाणु आसानी से अंदर नहीं जा पाते। त्वचा तेल और पसीना भी बनाती है, जो कुछ कीटाणुओं को मार देते हैं। अगर दीवार टूट जाए (कट लग जाए), तो रक्त जमकर खाली जगह बंद कर देता है।
त्वचा और तरह से भी रक्षा करती है। मोटी चमड़ी गैंडे को बचाती है। रंग मिलाकर छिप जाना (छद्मावरण) गिरगिट को बचाता है। साही के काँटे बदले हुए बाल हैं, जो दुश्मन को दूर रखते हैं।
ताप नियंत्रण: बाल या पंखों की परत हवा को रोक लेती है। रुकी हुई हवा गर्मी को कम गुज़रने देती है, इसलिए गर्मी अंदर रहती है। गर्मी में पसीना शरीर को ठंडा करता है।
त्वचा के व्युत्पन्न: शल्क, पंख, बाल, नाखून
व्युत्पन्न वह अंग है जो त्वचा से उगता है। अलग-अलग जंतु समूहों में अलग व्युत्पन्न होते हैं।
- शल्क: छोटी चपटी पट्टियाँ। मछली के शल्क पतले और अस्थिल होते हैं। साँप और छिपकली के शल्क सूखे और कड़े होते हैं, जो पानी की कमी रोकते हैं।
- पंख: केवल पक्षियों के होते हैं। रोएँदार पंख गर्म रखते हैं और बड़े उड़ान पंख उड़ने में मदद करते हैं।
- बाल या रोम: केवल स्तनधारियों के होते हैं। ये शरीर को गरम रखते हैं और स्पर्श भी महसूस करते हैं (मूँछ)।
- नाखून, पंजे और खुर: बालों जैसे पदार्थ से बने कठोर अंग। ये खोदने, चढ़ने, पकड़ने और दौड़ने में काम आते हैं।
- सींग: हड्डी पर चढ़ा कठोर आवरण, जैसे गाय और बकरी में।
दूसरे जंतुओं के आवरण
कीटों की कठोर बाहरी परत होती है जिसे क्यूटिकल कहते हैं। यह बढ़ती नहीं, इसलिए कीट बड़ा होने पर इसे उतार देता है (निर्मोचन)। घोंघे और सीप का कवच शरीर ही बनाता है। तारा मछली की त्वचा काँटेदार होती है। जेलीफ़िश की त्वचा बहुत पतली और नरम होती है।
करके देखिए
3D में: बाल, शल्क, पंख और पंजे के बटन दबाइए। बताइए हर एक किस जंतु समूह का है। फिर कीटाणु गिराइए।
घर पर: एक हाथ ऊनी दस्ताने में और दूसरा खुला रखकर दो मिनट ठंडी हवा में रखिए। कौन-सा हाथ ज़्यादा गरम लगा? दस्ताना हवा रोकता है, ठीक बालों की तरह। पहले अंदाज़ा लगाइए, फिर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- त्वचा की परतें: ऊपरी परत (एपिडर्मिस) + बीच की परत (डर्मिस) + वसा परत
- त्वचा के काम: रक्षा, पानी की कमी रोकना, ताप नियंत्रण, स्पर्श महसूस करना
- मछली: शल्क। पक्षी: पंख। स्तनधारी: बाल। सरीसृप: सूखे शल्क। कीट: क्यूटिकल। घोंघा: कवच।
- बाल या पंख में रुकी हवा = गर्मी
हल किए गए उदाहरण
1. ठंडे दिन में पक्षी अपने पंख फुला लेता है। इससे क्या फ़ायदा होता है?
फूले पंखों के बीच ज़्यादा हवा रुकती है। हवा गर्मी को कम गुज़रने देती है, इसलिए शरीर की गर्मी कम निकलती है और पक्षी गरम रहता है।
2. इनके आवरण के नाम बताइए: (क) रोहू मछली, (ख) कौआ, (ग) बकरी, (घ) तिलचट्टा।
(क) शल्क, (ख) पंख, (ग) बाल (साथ में सींग और खुर), (घ) कठोर क्यूटिकल।
3. बाँह पर कट लगा और कुछ मिनट में खून रुक गया। त्वचा का कौन-सा काम टूटा और फिर ठीक हुआ?
रक्षा का काम। कट से त्वचा की दीवार टूटती है। रक्त जमकर दरार बंद करता है और नई त्वचा कोशिकाएँ उसे ठीक कर देती हैं।
आम गलतियाँ
- शल्क, पंख और बाल को त्वचा ही मान लेना। ये व्युत्पन्न हैं जो त्वचा से उगते हैं।
- यह कहना कि केवल स्तनधारियों में त्वचा होती है। सभी रीढ़धारी जंतुओं में त्वचा होती है; कीटों में क्यूटिकल होता है।
- यह कहना कि रोएँ गर्मी बनाते हैं। वे हवा रोककर गरम रखते हैं, गर्मी बनाते नहीं।
- परतें उलट देना: वसा की परत सबसे नीचे और पतली मज़बूत परत सबसे ऊपर होती है।