जनसंचार से पहले और छापाखाना
ज़्यादातर इतिहास में ख़बरें मौखिक संचार (कहानी, गीत, मुनादी) और हस्तलिखित पांडुलिपियों से चलती थीं। एक किताब हाथ से लिखने में महीनों लगते, इसलिए कम लोग पढ़ या रख पाते थे।
चीन और कोरिया में लकड़ी के ठप्पों से छपाई पहले से होती थी। लगभग 1450 में जर्मनी के योहानेस गुटेनबर्ग ने धातु के अलग-अलग अक्षर (मूवेबल टाइप) और प्रेस को जोड़ा। अब सैकड़ों एक जैसी प्रतियाँ जल्दी और सस्ते में बनने लगीं।
छपाई के असर
- किताबें सस्ती हुईं और ज़्यादा लोग पढ़ना सीखे।
- विज्ञान और धर्म के विचार तेज़ी से फैले।
- भाषा एक-सी होने लगी, क्योंकि हर जगह एक ही वर्तनी छपती थी।
प्रिंट माध्यम का विकास: अख़बार और पत्रिकाएँ
यूरोप में 1600 के दशक की शुरुआत में नियमित छपे समाचार-पत्र शुरू हुए। 1800 के दशक में भाप से चलने वाली प्रेस और लकड़ी की लुगदी से बने सस्ते काग़ज़ ने दैनिक अख़बार मज़दूरों के लिए भी सस्ते बना दिए ("पेनी प्रेस")। फ़ैशन, विज्ञान, खेल जैसे विषयों पर पत्रिकाएँ बढ़ीं।
भारत में हिकीज़ बंगाल गज़ट (1780) पहला अख़बार था। जल्द ही भारतीय भाषाओं में अख़बार निकले, जिन्होंने आगे चलकर स्वतंत्रता आंदोलन के विचार दूर-दूर तक पहुँचाए।
फ़िल्म और रेडियो: बिजली का युग
फ़िल्म
1895 में फ़्रांस के लूमियर भाइयों ने टिकट लेकर आए दर्शकों को चलती तस्वीरें दिखाईं। शुरुआती फ़िल्में मूक थीं; बोलती फ़िल्में 1920 के दशक के अंत में आईं। भारत में दादासाहब फाल्के की राजा हरिश्चंद्र (1913) पहली पूरी लंबाई की फ़ीचर फ़िल्म थी और पहली बोलती फ़िल्म 1931 में आई।
रेडियो
रेडियो, रेडियो तरंगों से आवाज़ हवा में भेजता है। नियमित सार्वजनिक प्रसारण 1920 के दशक में शुरू हुआ। यह सस्ता था, पढ़ना ज़रूरी नहीं था और दूर के गाँवों तक पहुँचता था, इसलिए दशकों तक सबसे ज़्यादा फैला माध्यम रहा। भारत में प्रसारण 1927 में शुरू हुआ और 1936 में राष्ट्रीय सेवा का नाम ऑल इंडिया रेडियो पड़ा। बैटरी वाले ट्रांज़िस्टर (1950 का दशक) ने इसे कहीं भी ले जाने लायक बनाया।
टेलीविज़न और उपग्रह
टेलीविज़न तस्वीर और आवाज़ साथ भेजता है। नियमित टीवी सेवाएँ 1930 के दशक में शुरू हुईं और 1950 के दशक में अमीर देशों के ज़्यादातर घरों में पहुँच गईं। रंगीन टीवी 1960 के दशक में आया। संचार उपग्रहों (1962 से) ने दूसरे महाद्वीपों की घटनाएँ लाइव दिखाना संभव किया।
भारत में टीवी 1959 में दिल्ली में प्रयोग के रूप में शुरू हुआ, 1980 के दशक में दूरदर्शन रंगीन प्रसारण के साथ देश भर में फैला और 1990 के दशक की शुरुआत में निजी सैटेलाइट चैनल आए।
इंटरनेट, नया मीडिया और अभिसरण
इंटरनेट एक शोध नेटवर्क के रूप में शुरू हुआ; वर्ल्ड वाइड वेब (1991) ने इसे इस्तेमाल में आसान बनाया। भारत में आम लोगों के लिए इंटरनेट 1995 में शुरू हुआ। स्मार्टफ़ोन (2007 से) और सस्ते मोबाइल डेटा ने इंटरनेट लगभग हर जेब में पहुँचा दिया।
- दो-तरफ़ा: पाठक जवाब दे सकते हैं, शेयर कर सकते हैं, ख़ुद बना सकते हैं।
- मनचाहे समय पर: प्रसारण के समय का इंतज़ार नहीं।
- अभिसरण: अख़बार, रेडियो, टीवी और फ़िल्म एक ही डिवाइस पर।
- चुनौतियाँ: झूठी ख़बरें, निजता और स्क्रीन की लत।
पुराने माध्यम ग़ायब नहीं हुए। अख़बारों की वेबसाइट हैं, रेडियो पॉडकास्ट बना, टीवी ऑनलाइन स्ट्रीम होता है।
करके देखो: परिवार की मीडिया टाइमलाइन
घर के किसी बड़े से पूछो: 15 साल की उम्र में वे कौन-सा माध्यम इस्तेमाल करते थे? रेडियो, टीवी, अख़बार, फ़ोन? 1950 से आज तक एक रेखा खींचो और लिखो कि घर में हर चीज़ पहली बार कब आई। इसे 3D टाइमलाइन और साल वाले स्लाइडर से मिलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्रम: छापाखाना (~1450) → अख़बार (1600 का दशक) → फ़िल्म (1895) → रेडियो (1920 का दशक) → टीवी (1930–50) → इंटरनेट/वेब (1990 का दशक) → स्मार्टफ़ोन (2007+)
- प्रिंट: पढ़ना ज़रूरी; स्थायी रिकॉर्ड
- रेडियो: सिर्फ़ आवाज़; सस्ता; दूर-दराज़ तक
- टीवी: आवाज़ + तस्वीर; उपग्रह से लाइव
- इंटरनेट: दो-तरफ़ा, मनचाहे समय पर, कोई भी छाप सकता है
- अभिसरण: सारे माध्यम एक डिजिटल डिवाइस पर
हल किए गए उदाहरण
1. क्रम में लगाओ: टीवी, छापाखाना, इंटरनेट, रेडियो।
छापाखाना (~1450) → रेडियो (1920 का दशक) → टीवी (1930–50) → इंटरनेट (1990 का दशक)।
2. गाँवों में बरसों तक रेडियो अख़बार से ज़्यादा लोगों तक क्यों पहुँचा?
रेडियो के लिए पढ़ना ज़रूरी नहीं था, सस्ता था, बिजली के बिना बैटरी पर चलता था और उसी दिन हवा के ज़रिए दूर तक पहुँचता था।
3. अपने रोज़ के जीवन से अभिसरण के दो उदाहरण दो।
फ़ोन पर अख़बार का ऐप पढ़ना; उसी फ़ोन पर रेडियो स्टेशन या पॉडकास्ट सुनना; लैपटॉप पर टीवी चैनल की लाइव स्ट्रीम देखना।
आम गलतियाँ
- सोचना कि नया माध्यम पुराने को ख़त्म कर देता है। प्रिंट, रेडियो, टीवी आज भी हैं; वे ऑनलाइन भी आ गए।
- कहना कि गुटेनबर्ग ने छपाई का आविष्कार किया। एशिया में ठप्पा छपाई पहले से थी; उन्होंने यूरोप में धातु के अक्षरों वाली प्रेस को कारगर बनाया।
- टीवी को रेडियो से पहले रखना। नियमित रेडियो पहले (1920 का दशक), टीवी बाद में (1930 से) आया।
- सोचना कि इंटरनेट मतलब सिर्फ़ सोशल मीडिया। इसमें समाचार साइटें, स्ट्रीमिंग, ईमेल और ऑनलाइन अख़बार भी हैं।