CBSE कक्षा 11 जनसंचार माध्यम अध्ययन
अध्याय: 5
1. भाग क: रोज़गार कौशल
संचार कौशल · स्व-प्रबंधन कौशल · आईसीटी कौशल · उद्यमशीलता कौशल · हरित कौशल
- संचार कौशल: अपनी बात साफ़ और प्यार से कैसे पहुँचाएँ – संचार यानी लोगों के बीच अर्थ बाँटना। प्रेषक (भेजने वाला) विचार को संदेश में बदलता है, उसे माध्यम से भेजता है, और प्राप्तकर्ता उसे समझकर प्रतिपुष्टि (फ़ीडबैक) देता है। शोर, कठिन शब्द, तेज़ भावनाएँ और सांस्कृतिक अंतर जैसी बाधाएँ संदेश को रोक या मोड़ सकती हैं। हम अर्थ शब्दों से (शाब्दिक), चेहरे, आँखों, हाव-भाव, मुद्रा और आवाज़ के लहजे से (अशाब्दिक), और चित्रों से (दृश्य) भेजते हैं। सक्रिय श्रवण — ध्यान, धैर्य, सवाल और अपने शब्दों में दोहराना — साबित करता है कि संदेश पहुँचा। अच्छा वक्ता संदर्भ के हिसाब से बदलता है: औपचारिक या अनौपचारिक, बोलकर या लिखकर, और विनम्र अनुरोध, सलीके से मना करना, सच्ची माफ़ी और दृढ़ (न दब्बू, न आक्रामक) भाषा अपनाता है।
- आत्म-प्रबंधन: अपनी भावनाओं, लक्ष्यों और समय की कमान अपने हाथ में – आत्म-प्रबंधन (self-management) यानी अपनी भावनाओं, विचारों और कामों को ख़ुद दिशा देना ताकि आप अपने लक्ष्य तक पहुँचें। इसकी शुरुआत आत्म-जागरूकता से होती है: आप क्या महसूस कर रहे हैं और कितना तेज़। फिर प्रतिक्रिया से पहले ठहराव (रुको, सोचो, करो) और धीमी साँस जैसे उपाय। विचार भावनाओं को और भावनाएँ कामों को बनाती हैं, इसलिए 'मैं बेकार हूँ' को 'मैं अभी नहीं कर पाता' में बदलने से काम बदल जाता है। अच्छे आत्म-प्रबंधक SMART लक्ष्य बनाते हैं, ज़रूरी-महत्वपूर्ण देखकर समय बाँटते हैं, अच्छी आदतें बनाते हैं और असफलता के बाद फिर खड़े होते हैं (लचीलापन)।
- आईसीटी कौशल: ऑफ़िस टूल, इंटरनेट, ई-मेल और सुरक्षित रहना – ICT का मतलब है सूचना और संचार तकनीक (Information and Communication Technology)। यानी वे सब औज़ार जिनसे हम जानकारी बनाते, रखते और भेजते हैं: कंप्यूटर, फ़ोन, सॉफ़्टवेयर और इंटरनेट। मुख्य कौशल हैं: वर्ड प्रोसेसर में लिखना, स्प्रेडशीट में गिनती, प्रेज़ेंटेशन से बात समझाना, इंटरनेट पर खोजना, ई-मेल भेजना और ऑनलाइन सुरक्षित रहना।
- उद्यमिता विकास – उद्यमिता का अर्थ है ज़रूरत पहचानकर, संसाधन जोड़कर और जोखिम उठाकर नया व्यवसाय शुरू करना। भारत को रोज़गार, नए विचारों और संतुलित विकास के लिए उद्यमी चाहिए। प्रक्रिया खुद को जानने से शुरू होकर व्यवसाय शुरू करने और बढ़ाने तक जाती है। स्टार्टअप इंडिया (2016) नई फ़र्मों की मदद करता है; पैसा बचत, एंजेल, वेंचर कैपिटल, बैंक और क्राउडफ़ंडिंग से आता है; और बौद्धिक संपदा अधिकार नए विचारों, ब्रांड और रचनाओं की रक्षा करते हैं।
- हरित कौशल: सतत विकास, हरित अर्थव्यवस्था और हरित नौकरियाँ – हरित कौशल वह ज्ञान, आदतें और काम के हुनर हैं जिनसे हम धरती को नुकसान पहुँचाए बिना जी और काम कर सकें। इनकी नींव है सतत विकास: आज की ज़रूरतें पूरी करना और आने वाली पीढ़ी के लिए भी छोड़ना। हरित अर्थव्यवस्था प्रदूषण और कचरा घटाते हुए बढ़ती है, अक्सर घेरे में चलकर: बनाओ, इस्तेमाल करो, मरम्मत करो, रीसायकल करो। इससे सोलर तकनीशियन जैसी हरित नौकरियाँ बनती हैं। हर कोई 5R से हरित कौशल अपना सकता है।
2. जनसंचार का परिचय
जनसंचार
- जनसंचार माध्यम (मास मीडिया) – जनसंचार माध्यम वे साधन हैं जो एक भेजने वाले से एक ही संदेश बहुत बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाते हैं: प्रिंट (अख़बार, पत्रिका), प्रसारण (रेडियो, टीवी, फ़िल्म) और डिजिटल (वेबसाइट, सोशल मीडिया, म्यूज़िक वीडियो, वीडियो गेम)। ये सूचना, शिक्षा, मनोरंजन देते हैं और मनाते हैं। मालिक, संपादक और एल्गोरिद्म गेटकीपर बनकर चुनते हैं कि हम कौन-सी ख़बर देखें। नया मीडिया डिजिटल और दो-तरफ़ा है, लोग जवाब दे सकते और ख़ुद बना सकते हैं। समाजशास्त्री बहस करते हैं कि मीडिया का असर कितना गहरा है।
3. माध्यमों का विकास
माध्यमों का इतिहास
- जनसंचार माध्यमों का इतिहास: छापाखाने से इंटरनेट तक – जनसंचार माध्यम लहरों में बढ़े। छपाई (1450 के आसपास) ने किताबें और अख़बार सस्ते कर दिए। फ़िल्म (1890 का दशक), रेडियो (1920 का दशक) और टेलीविज़न (1930–1950) ने बिजली से एक साथ लाखों लोगों तक पहुँच बनाई। इंटरनेट (1990 का दशक) ने माध्यमों को दो-तरफ़ा बना दिया, अब कोई भी छाप सकता है। हर नया माध्यम पुराने को ख़त्म नहीं करता, उसमें जुड़ जाता है। आज सब एक ही स्क्रीन पर मिलते हैं: इसे अभिसरण (कन्वर्जेंस) कहते हैं।
4. माध्यमों को समझना
माध्यम साक्षरता और विश्लेषण
- मीडिया साक्षरता (Media Literacy) – मीडिया साक्षरता मीडिया को पढ़ने, उस पर सवाल करने और खुद बनाने का हुनर है: समाचार, विज्ञापन, वीडियो, पोस्ट, फ़िल्म और गेम। हर मीडिया पाठ किसी ने, किसी उद्देश्य से, किसी दर्शक के लिए बनाया है, और उसमें ऐसे रूप, परिपाटियाँ और तकनीकें हैं जो हमारी भावना बदलती हैं। मीडिया-साक्षर व्यक्ति मानने या शेयर करने से पहले स्रोत, सबूत, दूसरे स्रोत और मूल जाँचता है, पूर्वाग्रह और फ़िल्टर बबल पहचानता है, और ज़िम्मेदारी से अपना मीडिया बनाता है।
5. पूर्व-निर्माण कौशल
पूर्व-निर्माण
- पूर्व-निर्माण (प्री-प्रोडक्शन): शूट से पहले फ़िल्म या वीडियो की योजना – हर फ़िल्म, विज्ञापन, ख़बर या यूट्यूब वीडियो तीन चरणों से बनता है: पूर्व-निर्माण (योजना), निर्माण (शूटिंग) और उत्तर-निर्माण (एडिटिंग)। पूर्व-निर्माण एक विचार को साफ़ योजना में बदलता है: एक-पंक्ति का विचार और शोध, स्क्रिप्ट, हर शॉट का चित्र यानी स्टोरीबोर्ड, और शूट की योजना: शॉट लिस्ट, समय-सारणी, लोकेशन, टीम, उपकरण, बजट और अनुमतियाँ। अच्छी योजना शूट के दिन समय और पैसा बचाती है।