माध्यमों के पीछे के लोगों को क्यों जानें
माध्यम यानी संदेश को बहुत लोगों तक पहुँचाने का तरीका। कोई माध्यम जादू से नहीं आया। किसी व्यक्ति या छोटी टोली ने एक समस्या सुलझाई: शब्द जल्दी कैसे नकल करें, चलती तस्वीर कैसे दिखाएँ, आवाज़ दूर कैसे भेजें। उनका नाम, साल और योगदान जानने से समझ आता है कि आज के माध्यम ऐसे क्यों हैं।
एक बात देखिए: हर नया माध्यम पुराने में जुड़ता गया। फ़िल्मों ने किताबें ख़त्म नहीं कीं और इंटरनेट ने रेडियो ख़त्म नहीं किया।
छपाई: गुटेनबर्ग और भारत के पहले अख़बार
योहानेस गुटेनबर्ग (जर्मनी, 1450 का दशक) ने ऐसा छापाखाना बनाया जिसमें छोटे चल धातु-अक्षर थे। अक्षर बार-बार काम आते हैं, इसलिए एक कार्यशाला सैकड़ों प्रतियाँ छाप सकती थी। (ब्लॉक से छपाई चीन और कोरिया में पहले से थी; गुटेनबर्ग ने यूरोप को तेज़ और दोबारा काम आने वाले अक्षर दिए।)
- जेम्स ऑगस्टस हिकी ने 1780 में कलकत्ता में हिकी का बंगाल गज़ट निकाला, भारत का पहला अख़बार।
- राजा राममोहन राय ने बांग्ला में संवाद कौमुदी (1821) निकाली और छापे से समाज-सुधार की बात रखी।
- बाल गंगाधर तिलक (केसरी, 1881) और महात्मा गांधी (यंग इंडिया, 1919 से) ने स्वतंत्रता आंदोलन में जनमत जगाने के लिए अख़बार इस्तेमाल किए।
फ़िल्म: ल्यूमियर, फाल्के, ईरानी और रे
ल्यूमियर बंधुओं, ऑगस्ते और लुई, ने 1895 में पेरिस में पहला टिकट वाला सार्वजनिक फ़िल्म शो किया। उनकी मशीन कैमरा भी थी और प्रोजेक्टर भी, इसलिए पूरा कमरा साथ देख सकता था। (थॉमस एडिसन की टोली ने पहले किनेटोस्कोप बनाया था, एक डिब्बा जिसमें एक व्यक्ति झाँकता था।)
- दादासाहब फाल्के ने राजा हरिश्चंद्र (1913) बनाई, भारत की पहली पूरी लंबाई की फ़िल्म, इसलिए उन्हें भारतीय सिनेमा का जनक कहते हैं।
- अर्देशिर ईरानी ने आलम आरा (1931) बनाई, पहली भारतीय बोलती फ़िल्म।
- सत्यजित रे ने साधारण साधनों से पाथेर पांचाली (1955) बनाई और दुनिया का सम्मान पाया; 1992 में उन्हें मानद ऑस्कर मिला।
रेडियो: मार्कोनी और ऑल इंडिया रेडियो
गुग्लिएल्मो मार्कोनी (इटली) ने तार रहित टेलीग्राफ़ी बनाई: संकेत रेडियो तरंगों के रूप में चलते हैं, तार नहीं चाहिए। 1901 में एक संकेत अटलांटिक महासागर पार पहुँचा। कुछ साल बाद आवाज़ और संगीत का प्रसारण भी हुआ (रेजिनाल्ड फ़ेसेंडन को लगभग 1906 के शुरुआती आवाज़ प्रसारण का श्रेय अक्सर दिया जाता है)।
भारत में 1920 के दशक में रेडियो क्लब बने, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग कंपनी 1927 में शुरू हुई और ऑल इंडिया रेडियो को 1936 में यह नाम मिला। इसके कार्यक्रमों को आकाशवाणी भी कहते हैं। रेडियो गाँवों और अनपढ़ लोगों तक पहुँचा, इसीलिए यह इतना अहम था।
टेलीविज़न: बेयर्ड और दूरदर्शन
जॉन लॉगी बेयर्ड (स्कॉटलैंड) ने 1926 में चलता टेलीविज़न दिखाया: तस्वीर संकेतों में बदलती है, हवा से जाती है और स्क्रीन पर फिर तस्वीर बन जाती है।
दूरदर्शन 15 सितंबर 1959 को दिल्ली में छोटी परीक्षण सेवा के रूप में शुरू हुआ। 1982 में एशियाई खेलों के साथ रंगीन प्रसारण आया। हम लोग (1984) जैसे धारावाहिकों ने दिखाया कि एक कहानी करोड़ों बैठकों में एक साथ पहुँच सकती है।
इंटरनेट और वेब: सर्फ़, कान, बर्नर्स-ली
इंटरनेट कंप्यूटरों का विश्वव्यापी नेटवर्क है। वर्ल्ड वाइड वेब उस पर चलने वाली एक सेवा है: लिंकों से जुड़े पन्ने। दोनों एक चीज़ नहीं हैं।
- विंट सर्फ़ और बॉब कान ने 1970 के दशक में TCP/IP बनाया, वे साझा नियम जिनसे अलग-अलग नेटवर्क आपस में बात करते हैं।
- रे टॉमलिन्सन ने 1971 में शुरुआती नेटवर्क ई-मेल भेजा और @ चिह्न चुना।
- टिम बर्नर्स-ली ने CERN में वेब बनाया (प्रस्ताव 1989, पहली वेबसाइट 1991): पते (URL), पन्ने (HTML) और लिंक।
भारत में आम इंटरनेट सेवा 15 अगस्त 1995 को वीएसएनएल से शुरू हुई।
किसी प्रमुख व्यक्ति पर कैसे लिखें (परीक्षा के लिए)
तीन छोटी पंक्तियाँ लिखिए: कौन (नाम, देश), क्या (एक मुख्य योगदान) और कब + क्यों ज़रूरी (साल और आया बदलाव)। उदाहरण: "दादासाहब फाल्के, भारत। उन्होंने राजा हरिश्चंद्र बनाई। 1913 में भारत को पहली लंबी फ़िल्म मिली और फ़िल्म उद्योग शुरू हुआ।"
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- माध्यम: संदेश को बहुत लोगों तक ले जाने का तरीका (छपाई, फ़िल्म, रेडियो, टीवी, इंटरनेट)।
- चल अक्षर (movable type): अलग-अलग धातु-अक्षर जो सजाए, छापे और दोबारा इस्तेमाल किए जाते हैं (गुटेनबर्ग)।
- प्रसारण (broadcast): एक संकेत एक साथ बहुत रिसीवरों तक भेजना (रेडियो, टीवी)।
- इंटरनेट = नेटवर्क। वर्ल्ड वाइड वेब = उस नेटवर्क पर पन्ने और लिंक।
- याद रखें: छपाई 1450 का दशक, फ़िल्म 1895, रेडियो 1895–1901, टीवी 1926, इंटरनेट 1970–1991।
हल किए गए उदाहरण
1. मिलाइए: गुटेनबर्ग, ल्यूमियर, मार्कोनी, बेयर्ड, बर्नर्स-ली को छपाई, फ़िल्म, रेडियो, टीवी, वेब से।
गुटेनबर्ग – छपाई; ल्यूमियर – फ़िल्म; मार्कोनी – रेडियो; बेयर्ड – टीवी; बर्नर्स-ली – वेब।
2. दादासाहब फाल्के पर तीन पंक्तियाँ लिखिए।
कौन: दादासाहब फाल्के, भारत। क्या: राजा हरिश्चंद्र बनाई। कब और क्यों: 1913 में भारत को पहली लंबी फ़िल्म मिली, जिससे भारतीय फ़िल्म उद्योग शुरू हुआ।
3. पहली भारतीय फ़ीचर फ़िल्म के कितने साल बाद पहली बोलती फ़िल्म आई?
राजा हरिश्चंद्र 1913 की और आलम आरा 1931 की। 1931 − 1913 = 18 साल।
4. जो लोग पढ़ नहीं सकते थे उनके लिए रेडियो क्यों ज़रूरी था?
रेडियो आवाज़ और संगीत ले जाता है, सुनने वाले को पढ़ना नहीं पड़ता। वह गाँवों और घरों तक पहुँचा जहाँ अख़बार नहीं पहुँचते थे।
5. दो भारतीयों के नाम बताइए जिन्होंने अख़बार से बदलाव लाने का काम किया, और कैसे।
राजा राममोहन राय ने संवाद कौमुदी से सुधार की बात रखी और महात्मा गांधी ने यंग इंडिया से स्वतंत्रता आंदोलन के विचार फैलाए।
आम गलतियाँ
- "गुटेनबर्ग ने छपाई का आविष्कार किया" कहना। ब्लॉक छपाई पुरानी है; उन्होंने यूरोप में तेज़ चल-अक्षर छपाई बनाई।
- "इंटरनेट" और "वेब" को एक शब्द मानना। वेब इंटरनेट पर चलता है; ई-मेल भी चलता है पर वह वेब नहीं है।
- पूरे माध्यम का श्रेय एक ही व्यक्ति को देना। फ़िल्म को एडिसन, ल्यूमियर और कई लोगों ने गढ़ा; रेडियो को मार्कोनी और दूसरों ने।
- साल गड़बड़ाना: हर नाम के साथ साल याद कीजिए (फाल्के 1913, आलम आरा 1931, AIR 1936, दूरदर्शन 1959, वीएसएनएल 1995)।