देखभाल क्यों, और देखभाल लेबल कैसे पढ़ें
पसीना, धूल और खाने से कपड़े गंदे होते हैं। देखभाल से वे साफ़, स्वास्थ्यकर, सुंदर और टिकाऊ रहते हैं और पैसे बचते हैं।
देखभाल लेबल (care label) कपड़े के अंदर सिला छोटा टैग है। इसके चिह्न कई देशों में एक जैसे हैं:
- टब: पानी में धो सकते हैं। अंक (30, 40, 60) अधिकतम तापमान °C में। टब में हाथ = केवल हाथ से धोना।
- त्रिकोण: ब्लीच। कटा हुआ = ब्लीच नहीं।
- इस्त्री: एक बिंदु = कम गरम (सिंथेटिक, रेशम), दो = मध्यम (ऊन, पॉलिएस्टर), तीन = तेज़ गरम (सूती, लिनन)।
- गोला: ड्राई क्लीन। अंदर का अक्षर बताता है कौन-सा विलायक।
- चौकोर: सुखाना। अंदर गोला = ड्रायर में सुखा सकते हैं।
किसी भी चिह्न पर क्रॉस (X) का मतलब है "मत करो"।
मरम्मत: धोने से पहले
मरम्मत (mending) यानी छोटी टूट-फूट को बढ़ने से पहले ठीक करना। धुलाई से छोटा छेद बड़ा हो जाता है।
- ढीला बटन या हुक: मज़बूती से सिल दो।
- खुली सिलाई: पुरानी रेखा पर बखिया (back stitch)।
- छोटा छेद (मोज़े, स्वेटर): रफ़ू (darning), छेद पर धागे से छोटा-सा कपड़ा बुन देना।
- बड़ा फटा भाग: पैबंद (patching), मिलता-जुलता कपड़ा पीछे या ऊपर सिलना।
- तुरपाई खुली: फिर से तुरपाई करो।
दाग हटाना
दाग वह निशान है जो साधारण धुलाई से नहीं जाता। सुनहरे नियम:
- जल्दी करो: ताज़ा दाग आसानी से निकलता है।
- पहले दाग और कपड़े को पहचानो।
- रिमूवर को किसी छिपे हिस्से पर आज़माओ।
- दाग के नीचे गद्दी रखो और किनारे से बीच की ओर दबाओ।
- प्रोटीन वाले दाग (खून, अंडा, दूध) पर ठंडा पानी: गरम पानी प्रोटीन को रेशे में पका देता है।
- हर रिमूवर के बाद अच्छी तरह खंगालो।
दागों के प्रकार और उपाय
- प्राणिज (प्रोटीन): खून, अंडा, दूध: ठंडे नमक-पानी में भिगोकर डिटर्जेंट से धोओ।
- वनस्पतिज: चाय, कॉफ़ी, फल, हल्दी: सफ़ेद सूती पर ऊँचाई से गरम पानी, नींबू या हल्का ब्लीच; धूप हल्दी को फीका करती है।
- चिकनाई: घी, तेल, लिपस्टिक: टैल्कम/चॉक से सोखो, फिर डिटर्जेंट या विलायक।
- खनिज: जंग, स्याही: जंग पर नींबू-नमक या ऑक्सैलिक अम्ल (सावधानी से)।
- रंग का फैलना: केवल सफ़ेद कपड़ों को हल्के ब्लीच में।
रिमूवर तीन तरह काम करते हैं: अवशोषक (टैल्क, चॉक, स्याहीसोख), विलायक (पानी, स्पिरिट, एसीटोन) और विरंजक/ब्लीच (ऑक्सीकारक: हाइड्रोजन परॉक्साइड, सोडियम हाइपोक्लोराइट; अपचायक: सोडियम हाइड्रोसल्फ़ाइट)। ऊन और रेशम पर क्लोरीन ब्लीच कभी नहीं।
साबुन और डिटर्जेंट
सिर्फ़ पानी तेल वाली गंदगी नहीं हटाता, क्योंकि तेल और पानी नहीं मिलते। सफ़ाई करने वाले अणु के दो सिरे होते हैं: पानी-प्रेमी सिर और तेल-प्रेमी पूँछ। पूँछें तेल में घुसती हैं, सिर पानी की ओर रहते हैं, और तेल एक छोटी गेंद (मिसेल) में लिपटकर बह जाता है।
- साबुन: तेल/वसा और क्षार से बनता है। कोमल और जैव-अपघटनीय, पर कठोर जल में चिपचिपा झाग-मैल (scum) बनाता है।
- संश्लेषित डिटर्जेंट: पेट्रोलियम रसायनों से। कठोर और ठंडे पानी में भी अच्छा काम करता है; कुछ धीरे टूटते हैं और नदियों को नुकसान पहुँचा सकते हैं।
रूप: बट्टी, फ़्लेक्स, पाउडर, तरल। ऊन-रेशम के लिए हल्के (उदासीन), सूती-लिनन के लिए तेज़ (क्षारीय) डिटर्जेंट।
धुलाई की विधियाँ
हर धुलाई में: छाँटो (सफ़ेद, रंगीन, नाज़ुक), ज़्यादा गंदे को भिगोओ, धोओ, साबुन पूरी तरह निकलने तक खंगालो, फिर सुखाओ।
- घर्षण (friction): हाथ या ब्रश से रगड़ना। केवल मज़बूत सूती व लिनन के लिए।
- गूँधना और निचोड़ना (kneading and squeezing): साबुन वाले पानी में हल्का दबाना। ऊन, रेशम, नाज़ुक कपड़े; मरोड़ना नहीं।
- चूषण (suction): सक्शन वॉशर ऊपर-नीचे करने से पानी कपड़े के आर-पार खिंचता है। तौलिये जैसे भारी कपड़ों के लिए।
- मशीन: ड्रम पानी में कपड़े घुमाता है; प्रोग्राम गति और तापमान बदलते हैं।
सुखाना: सफ़ेद धूप में, रंगीन उलटे करके छाँव में, ऊनी तौलिये पर फैलाकर।
परिसज्जा: नील और कलफ़
नील (blue): पुराना सफ़ेद सूती कपड़ा हल्का पीला हो जाता है। थोड़ा-सा नीला रंग पीलेपन को ढक देता है, कपड़ा सफ़ेद दिखता है। आख़िरी खंगाल में कुछ बूँदें अच्छी तरह मिलाकर; ज़्यादा नील से धब्बे पड़ते हैं। आज के डिटर्जेंट में ऑप्टिकल ब्राइटनर होते हैं।
कलफ़ (starch): स्टार्च सूती रेशों के बीच की जगह भरकर सूखने पर कड़कपन देता है। कपड़ा ताज़ा दिखता है, अगली बार गंदगी आसानी से निकलती है, प्रेस आसान होती है। चावल का माँड़, अरारोट, मक्के का स्टार्च, रेशम के लिए गोंद। ऊन और सिंथेटिक पर कलफ़ नहीं।
इस्त्री और प्रेसिंग
गर्मी + नमी + दबाव रेशों को ढीला करके सिलवटें मिटाते हैं।
- इस्त्री करना: इस्त्री को कपड़े पर सरकाना (सूती, लिनन)।
- प्रेस करना: बिना सरकाए उठाकर दबाना, अक्सर गीले कपड़े के ऊपर से (ऊन, ताकि चमक न आए)।
ताप रेशे के अनुसार: सूती-लिनन तेज़, ऊन-रेशम मध्यम, नायलॉन-पॉलिएस्टर-एक्रिलिक कम (पिघल सकते हैं)। गहरे रंग उलटे करके, मोटे भाग (कॉलर, कफ़) पहले।
ड्राई क्लीनिंग
ड्राई क्लीनिंग में पानी की जगह विलायक (solvent) से सफ़ाई होती है, इसलिए कपड़ा सिकुड़ता या आकार नहीं खोता। ऊनी सूट, रेशमी साड़ी, भारी कढ़ाई के लिए। विलायक चिकनाई घोलता है, फिर कपड़े घुमाकर सुखाए और प्रेस किए जाते हैं। घर पर छोटे चिकने दाग पर अवशोषक पाउडर या हल्का स्पिरिट; विलायक ज्वलनशील हैं, खुली हवा में और आग से दूर।
भंडारण
कपड़े साफ़ और पूरी तरह सूखे रखो: गंदगी-पसीना कीड़ों को बुलाते हैं, नमी से फफूँदी (mildew) लगती है।
- भारी बुने कपड़े तह करो; कमीज़, पैंट हैंगर पर।
- ऊन-रेशम के साथ सूखी नीम पत्तियाँ या कपड़े में बँधी नेफ़थलीन की गोलियाँ।
- सूखी, हवादार, अँधेरी जगह; बीच-बीच में धूप-हवा।
- महँगे रेशम को सूती कपड़े में लपेटो, प्लास्टिक में नहीं; तह की लाइन बदलते रहो।
घर पर करके देखो
दो पुराने सफ़ेद सूती टुकड़ों पर चाय की एक-एक बूँद डालो। एक को तुरंत ठंडे पानी और थोड़े डिटर्जेंट से साफ़ करो, दूसरे को दो दिन बाद। तुलना करो। फिर अपनी स्कूल कमीज़ का लेबल ढूँढो और हर चिह्न का मतलब लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्रम: लेबल → मरम्मत → दाग → धुलाई → नील/कलफ़ → प्रेस → भंडारण
- इस्त्री बिंदु: 1 = कम (~110 °C), 2 = मध्यम (~150 °C), 3 = तेज़ (~200 °C)
- प्रोटीन दाग: पहले ठंडा पानी
- चिकनाई: अवशोषक → विलायक → डिटर्जेंट
- ऊन-रेशम: हल्का डिटर्जेंट, गूँधना-निचोड़ना, छाँव में फैलाकर सुखाना
- साबुन + कठोर जल → मैल; डिटर्जेंट कठोर जल में भी काम करता है
हल किए गए उदाहरण
1. लेबल पर 30 वाला टब, कटा त्रिकोण और एक बिंदु वाली इस्त्री है। देखभाल कैसे करें?
30 °C से ज़्यादा गरम पानी नहीं, ब्लीच नहीं, सबसे कम ताप पर इस्त्री। यह शायद सिंथेटिक या नाज़ुक कपड़ा है।
2. सफ़ेद सूती रूमाल पर ताज़ा खून लग गया। क्या करें?
तुरंत ठंडे पानी में खंगालो (गरम पानी प्रोटीन पक्का कर देगा)। ठंडे नमक-पानी में भिगोकर डिटर्जेंट से धोओ। निशान बचे तो थोड़ा हाइड्रोजन परॉक्साइड लगाकर खंगालो।
3. ऊनी स्वेटर धोना है। विधि चुनो।
गुनगुना पानी और हल्का डिटर्जेंट, गूँधकर-निचोड़कर धोना (रगड़ना-मरोड़ना नहीं), उसी ताप के पानी में खंगालना, तौलिये में लपेटकर पानी निकालना, छाँव में फैलाकर सुखाना।
4. पुराना सफ़ेद कुर्ता नील के बाद ज़्यादा सफ़ेद क्यों दिखता है?
पुराना सूती हल्का पीला हो जाता है। नीला पीले का उलटा रंग है, थोड़ा नीला पीलापन ढक देता है और आँख को सफ़ेद दिखता है।
आम गलतियाँ
- खून, अंडे, दूध के दाग पर गरम पानी: दाग पक्का हो जाता है।
- दाग को बीच से ज़ोर से रगड़ना: दाग फैलता है और रेशे खराब होते हैं। किनारे से अंदर की ओर दबाओ।
- ऊन या रेशम पर क्लोरीन ब्लीच: ये प्रोटीन रेशे नष्ट हो जाते हैं।
- हल्के गीले या बिना धुले कपड़े रख देना: फफूँदी और कीड़े लगते हैं।