CBSE कक्षा 11 गृह विज्ञान
अध्याय: 5
1. गृह विज्ञान का परिचय
गृह विज्ञान क्या है
- गृह विज्ञान क्या है? – गृह विज्ञान (home science) रोज़ के जीवन का अध्ययन है। यह विज्ञान और कला दोनों की मदद से घर, परिवार और समाज का जीवन स्वस्थ और खुशहाल बनाता है। इसके पाँच क्षेत्र हैं: भोजन और पोषण, मानव विकास (और पारिवारिक अध्ययन), वस्त्र और परिधान, संसाधन प्रबंधन, तथा संचार और प्रसार। यह सबके लिए है, लड़के और लड़कियाँ दोनों, क्योंकि हर कोई खाता है, कपड़े पहनता है, पैसे खर्च करता है और दूसरों के साथ रहता है। इससे आहार विशेषज्ञ से लेकर फ़ैशन डिज़ाइनर तक कई करियर मिलते हैं।
2. स्वयं को समझना: किशोरावस्था
स्वयं को समझना · भोजन, पोषण, स्वास्थ्य और फ़िटनेस · संसाधनों का प्रबंधन · हमारे आसपास के वस्त्र · मीडिया और संचार प्रौद्योगिकी
- मानव विकास की अवस्थाएँ: जन्म से पहले से वृद्धावस्था तक – गर्भकाल गर्भधारण से जन्म तक तीन कालों में चलता है: बीजावस्था (पहले दो हफ़्ते), भ्रूणावस्था (2–8 हफ़्ते) और गर्भस्थ शिशु अवस्था (9 हफ़्ते से जन्म); टेराटोजन कहलाने वाले हानिकारक तत्त्व (शराब, धूम्रपान, दवाएँ, रूबेला जैसे संक्रमण) और माँ का पोषण व तनाव शिशु पर असर डालते हैं। शैशवावस्था (0–2 वर्ष) प्रतिवर्तों से शुरू होकर गामक उपलब्धियों, आसक्ति और वस्तु स्थायित्व (पियाजे की संवेदी-गामक अवस्था) तक जाती है। प्रारंभिक बाल्यावस्था (2–6) में बच्चे प्रतीक और नाटकीय खेल अपनाते हैं पर आत्मकेंद्रित सोचते हैं और संरक्षण नहीं समझते; मध्य बाल्यावस्था (6–11) में ठोस चीज़ों पर तार्किक सोचते हैं। किशोरावस्था में यौवनारंभ, अमूर्त चिंतन, पहचान की खोज और साथियों का दबाव, अपचार, नशा व खाने के विकार जैसी चुनौतियाँ आती हैं। प्रौढ़ावस्था में करियर, विवाह और पालन-पोषण; वृद्धावस्था में सेवानिवृत्ति, हानि और समझ।
- पोषण (Nutrition) – पोषण वह तरीक़ा है जिससे हम भोजन के पदार्थ पाते और इस्तेमाल करते हैं। शरीर को छह तरह के पोषक तत्व चाहिए: कार्बोहाइड्रेट और वसा (मुख्य रूप से ऊर्जा), प्रोटीन (वृद्धि और मरम्मत), विटामिन और खनिज (थोड़ी मात्रा, शरीर को सही चलाने के लिए), और पानी; साथ में पाचन के लिए रेशा। कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन लगभग 17 kJ प्रति ग्राम, वसा लगभग 37 kJ प्रति ग्राम देते हैं। संतुलित आहार सब पोषक तत्व सही मात्रा में देता है, और अंदर आई ऊर्जा लगभग ख़र्च ऊर्जा के बराबर होनी चाहिए।
- संसाधन प्रबंधन: जो है उसका सबसे अच्छा उपयोग – संसाधन वह है जिससे लक्ष्य पूरा हो। मानवीय संसाधन व्यक्ति में होते हैं (समय, ऊर्जा, ज्ञान, कौशल, दृष्टिकोण); अमानवीय संसाधन चीज़ें हैं (धन, सामग्री, जगह, औज़ार)। संसाधन व्यक्तिगत या साझा, प्राकृतिक या सामुदायिक हो सकते हैं। ये सीमित, उपयोगी और एक-दूसरे के बदले काम आने वाले हैं, इसलिए इनका प्रबंधन ज़रूरी है। प्रबंधन प्रक्रिया: योजना, संगठन, क्रियान्वयन, नियंत्रण, मूल्यांकन। परिवार सबसे ज़्यादा समय, धन और ऊर्जा का प्रबंधन समय योजना, बजट और कार्य सरलीकरण से करते हैं।
- वस्त्र रेशे: प्राकृतिक, संश्लेषित, गुण और धागे – वस्त्र रेशा (फ़ाइबर) एक बारीक, लचीला धागा है जो चौड़ाई से बहुत ज़्यादा लंबा होता है। रेशों को कातकर धागा (सूत) बनता है, और धागों को बुनकर या गूँथकर (knitting) कपड़ा। प्राकृतिक रेशे पौधों से (सूती, लिनन – सेल्युलोज़ के बने) या जंतुओं से (ऊन, रेशम – प्रोटीन के बने) आते हैं। मानव-निर्मित रेशे या तो पुनर्जनित हैं (विस्कोस रेयॉन, लायोसेल, लकड़ी के सेल्युलोज़ से) या संश्लेषित (नायलॉन, पॉलिएस्टर, ऐक्रिलिक, पेट्रो-रसायनों से)। हर रेशे का रूप और रसायन उसके गुण तय करते हैं: सूती पानी सोखता है और ठंडा रहता है; ऊन गर्म और लचीली है; रेशम चिकना और चमकीला; पॉलिएस्टर और नायलॉन मज़बूत, सिलवट-रोधी और जल्दी सूखने वाले पर कम सोखते हैं। कताई रेशों को बटकर धागा बनाती है; पॉलीकॉट जैसे मिश्रण दो रेशों के अच्छे गुण जोड़ते हैं। जलाने, सूक्ष्मदर्शी और पानी की बूँद जैसे आसान परीक्षण रेशा पहचानने में मदद करते हैं।
- जनसंचार माध्यम (मास मीडिया) – जनसंचार माध्यम वे साधन हैं जो एक भेजने वाले से एक ही संदेश बहुत बड़े दर्शक वर्ग तक पहुँचाते हैं: प्रिंट (अख़बार, पत्रिका), प्रसारण (रेडियो, टीवी, फ़िल्म) और डिजिटल (वेबसाइट, सोशल मीडिया, म्यूज़िक वीडियो, वीडियो गेम)। ये सूचना, शिक्षा, मनोरंजन देते हैं और मनाते हैं। मालिक, संपादक और एल्गोरिद्म गेटकीपर बनकर चुनते हैं कि हम कौन-सी ख़बर देखें। नया मीडिया डिजिटल और दो-तरफ़ा है, लोग जवाब दे सकते और ख़ुद बना सकते हैं। समाजशास्त्री बहस करते हैं कि मीडिया का असर कितना गहरा है।
3. परिवार, समुदाय और समाज को समझना
पोषण, स्वास्थ्य और स्वच्छता · संसाधन उपलब्धता और प्रबंधन
- स्वच्छता और सफ़ाई (Hygiene and Sanitation) – स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ़ बीमारी न होना नहीं, बल्कि शरीर, मन और सामाजिक जीवन तीनों में ठीक रहना है। स्वास्थ्य के संकेत (indicators) हैं: उम्र के हिसाब से वज़न, ऊर्जा, अच्छी नींद और कम बीमार पड़ना। ग़लत खान-पान से कुपोषण होता है: अल्पपोषण (कम खाना या पोषक तत्व) या अतिपोषण (बहुत ज़्यादा, जिससे मोटापा)। स्वच्छता (hygiene) यानी साफ़ आदतें जो कीटाणु रोकें: व्यक्तिगत, भोजन और पर्यावरण स्वच्छता। सफ़ाई व्यवस्था (sanitation) यानी कचरे और गंदे पानी को सुरक्षित हटाना। पीने का पानी उबालकर, छानकर, क्लोरीन या दूसरे तरीकों से सुरक्षित बनाना चाहिए।
- समय प्रबंधन और स्थान योजना – संसाधन (resource) वह है जिसका उपयोग हम लक्ष्य पाने के लिए करते हैं। समय, ऊर्जा और जगह संसाधन हैं। समय सबके पास बराबर है (दिन में 24 घंटे), पर इसे बचाकर नहीं रख सकते और न वापस ला सकते। समय प्रबंधन यानी समय की योजना बनाना और सही उपयोग: काम लिखो, प्राथमिकता तय करो, समय योजना बनाओ, उस पर चलो और जाँचो। व्यस्ततम भार अवधि (peak load period) वह समय है जब कई काम एक साथ आ जाते हैं, जैसे सुबह की भागदौड़; इसे पहले से काम करके, काम बाँटकर और उपकरणों से हल्का करते हैं। कार्य वक्र (work curve) दिखाता है कि बिना आराम लगातार काम से ऊर्जा और काम घटते हैं, और आराम के बाद फिर बढ़ते हैं। कार्य सरलीकरण यानी कम समय और ऊर्जा में काम। स्थान योजना घर को आसान, सुरक्षित और सुखद बनाती है।
4. बाल्यावस्था
पोषण, स्वास्थ्य और कल्याण · हमारे परिधान
- शिशुओं और बच्चों का पोषण – बच्चे बहुत तेज़ बढ़ते हैं, इसलिए शरीर के आकार के हिसाब से उन्हें बड़ों से ज़्यादा पोषण चाहिए। शिशु (0–1 वर्ष) को पहले 6 महीने केवल माँ का दूध; 6 महीने पर नरम, मसला ऊपरी आहार (complementary food) शुरू होता है और स्तनपान चलता रहता है। टीकाकरण गंभीर बीमारियों से बचाता है। पूर्व-विद्यालय बच्चों (1–6 वर्ष) का पेट छोटा होता है, इसलिए 3 भोजन और 2 नाश्ते चाहिए, जैसे भुना चना, फल या अंकुरित अनाज। स्कूली बच्चों (6–12 वर्ष) को संतुलित आहार, अच्छा नाश्ता, पौष्टिक टिफ़िन और पानी चाहिए; आम समस्याएँ हैं नाश्ता छोड़ना, जंक फ़ूड, एनीमिया, पेट के कीड़े, दाँतों की सड़न और मोटापा। विशेष ज़रूरत वाले बच्चों (बीमारी, विकलांगता) का भोजन उनकी स्थिति के अनुसार बनता है।
- वस्त्रों का चयन – कपड़े कई काम करते हैं: शरीर की सुरक्षा (धूप, ठंड, बारिश, चोट और गंदगी से), शालीनता, पहचान (यूनिफ़ॉर्म, संस्कृति, हैसियत) और सजावट। कपड़े चुनते समय कई कारक देखते हैं: मौसम, अवसर, उम्र, पेशा, संस्कृति और रिवाज़, फ़ैशन, व्यक्तित्व, शरीर की बनावट और बजट। बच्चों के कपड़े अवस्था के साथ बदलते हैं: शिशु को नरम, ढीले, आगे से खुलने वाले सूती कपड़े चाहिए जिनमें छोटे बटन या डोरियाँ न हों; छोटे बच्चे को हिलने-डुलने लायक और ख़ुद पहनने लायक कपड़े; स्कूली बच्चे को मज़बूत, धुलने लायक और बढ़ने की जगह वाले कपड़े। विशेष ज़रूरत वाले लोगों (व्हीलचेयर उपयोगकर्ता, बुज़ुर्ग, कमज़ोर हाथ वाले) के लिए अनुकूलित कपड़े होते हैं: वेल्क्रो, इलास्टिक कमर, आगे की खुलावट और नरम सिलाई।
5. वयस्कावस्था
वित्तीय प्रबंधन और नियोजन · वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव
- पारिवारिक बजट: घर की आय, ख़र्च और बचत – परिवार (गृहस्थी, household) वे लोग हैं जो साथ रहते हैं और आय-ख़र्च बाँटते हैं। उसकी ज़रूरतें (खाना, घर, कपड़े, सेहत, पढ़ाई) और इच्छाएँ (जो अच्छी हैं पर ज़रूरी नहीं) होती हैं। आय आती है काम से (मज़दूरी, वेतन), काम-धंधे से, संपत्ति से (किराया, ब्याज, लाभांश) और हस्तांतरण से (पेंशन, छात्रवृत्ति, उपहार)। पारिवारिक बजट एक योजना है जिसमें किसी अवधि, आमतौर पर एक महीने, की अनुमानित आय और ख़र्च लिखे जाते हैं। ख़र्च स्थिर (किराया, फ़ीस, किस्त) या परिवर्ती (खाना, बिजली, सफ़र) होते हैं। आय ज़्यादा हो तो बचत (surplus), बराबर हो तो संतुलित, कम हो तो घाटा (deficit)। पैसा सीमित है, इसलिए हर चुनाव की एक अवसर लागत है: छोड़ा गया अगला सबसे अच्छा विकल्प।
- वस्त्रों की देखभाल और रखरखाव – देखभाल से कपड़े साफ़, सुंदर और लंबे समय तक चलते हैं। पहले देखभाल लेबल पढ़ो। छोटी टूट-फूट पहले ही ठीक करो (मरम्मत)। दाग ताज़ा हो तभी सही रिमूवर से हटाओ। रेशे के अनुसार सही विधि से साबुन या डिटर्जेंट से धोओ। सफ़ेद कपड़ों में नील और कड़कपन के लिए कलफ़ लगाओ। सही ताप पर प्रेस करो, जो पानी से खराब हो उसे ड्राई क्लीन कराओ, और कपड़े साफ़-सूखे रखकर कीड़ों से बचाओ।