आनुवंशिकता और वातावरण साथ-साथ
माता-पिता से हमें जीन मिलते हैं। जीन हमारी कोशिकाओं के अंदर के निर्देश हैं। यह आनुवंशिकता (nature) है। हम घर, स्कूल और संस्कृति में बड़े होते हैं। यह वातावरण (nurture) है।
मनोवैज्ञानिक यह नहीं पूछते कि "जीन या वातावरण?" वे पूछते हैं कि दोनों मिलकर कैसे काम करते हैं। उनके तरीके:
- जुड़वाँ अध्ययन: एकयुग्मज (identical) जुड़वाँ के सारे जीन एक जैसे होते हैं, द्वियुग्मज (fraternal) के लगभग आधे। अगर एकयुग्मज ज़्यादा मिलते-जुलते हैं, तो जीन की भूमिका है।
- गोद लेने के अध्ययन: बच्चे की तुलना जन्म देने वाले माता-पिता (जीन) और पालने वाले माता-पिता (घर) से।
- पारिवारिक अध्ययन: कोई गुण परिवार में कैसे चलता है।
वंशागतित्व (heritability) बताता है कि किसी समूह में लोगों के अंतर का कितना हिस्सा जीन से जुड़ा है; यह एक व्यक्ति के बारे में नहीं बताता। एपिजेनेटिक्स दिखाता है कि जीवन के अनुभव जीन को चालू या बंद कर सकते हैं। विकासवादी दृष्टि पूछती है कि किसी व्यवहार ने हमारे पूर्वजों को जीने में कैसे मदद की।
तंत्रिका तंत्र: एक झलक
केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (CNS) = मस्तिष्क + मेरुरज्जु। परिधीय तंत्रिका तंत्र (PNS) = बाकी सारी नसें।
PNS के दो भाग:
- कायिक (somatic): अपनी मर्ज़ी से हिलने वाली मांसपेशियाँ चलाता है और स्पर्श, दृश्य, ध्वनि की जानकारी लाता है।
- स्वायत्त (autonomic): अपने-आप चलने वाले काम, जैसे धड़कन और पाचन। इसकी अनुकंपी (sympathetic) शाखा शरीर को कार्रवाई के लिए तैयार करती है ("लड़ो या भागो"): तेज़ धड़कन, फैली पुतलियाँ। परानुकंपी (parasympathetic) शाखा शांत करती है ("आराम और पाचन")।
प्रतिवर्त (reflex) एक तेज़, अपने-आप होने वाला उत्तर है: संवेदी न्यूरॉन संकेत मेरुरज्जु तक ले जाता है, अंतर्न्यूरॉन आगे देता है, प्रेरक न्यूरॉन मांसपेशी हिलाता है। मस्तिष्क को थोड़ी देर बाद पता चलता है।
न्यूरॉन और तंत्रिका आवेग
न्यूरॉन तंत्रिका कोशिका है। भाग: डेंड्राइट (संदेश लेते हैं), कोशिका-काय (संकेत जोड़ता है), एक्सॉन (भेजता है), एक्सॉन सिरे (आगे सौंपते हैं)। चर्बी जैसी माइलिन परत संदेश तेज़ करती है। ग्लियल कोशिकाएँ न्यूरॉन को सहारा, भोजन और सुरक्षा देती हैं।
आराम में न्यूरॉन के अंदर लगभग −70 mV होता है (विराम विभव)। संकेत देहली (threshold) पार करे तो द्वार खुलते हैं, धन आयन अंदर आते हैं और क्रिया विभव (action potential) एक्सॉन पर दौड़ता है (अंदर लगभग +40 mV)। यह पूरा या कुछ नहीं (all-or-none) है। तेज़ उत्तेजना स्पंद को बड़ा नहीं, बार-बार करती है। फ़ायर के बाद थोड़ी देर दुर्दम्य काल (refractory period) होता है जिसमें दोबारा फ़ायर नहीं होता।
कुछ संकेत उत्तेजक होते हैं (फ़ायर की ओर धकेलते हैं), कुछ निरोधी (रोकते हैं)।
न्यूरोट्रांसमीटर, दवाएँ और हार्मोन
न्यूरॉन एक-दूसरे को छूते नहीं। बीच में छोटी खाई है: सिनैप्स। एक्सॉन सिरा न्यूरोट्रांसमीटर छोड़ता है, जो खाई पार करके ग्राही (receptors) में फिट होते हैं। बचे अणु वापस खींच लिए जाते हैं (पुनः अवशोषण, reuptake)।
| न्यूरोट्रांसमीटर | मुख्य काम |
|---|---|
| एसिटाइलकोलीन | मांसपेशी की गति, स्मृति |
| डोपामिन | इनाम का एहसास, गति |
| सेरोटोनिन | मनोदशा, नींद, भूख |
| नॉरएपिनेफ्रिन | सतर्कता |
| ग्लूटामेट | मुख्य "चलो" संकेत; सीखना |
| GABA | मुख्य "रुको" संकेत; शांत करना |
| एंडोर्फिन | प्राकृतिक दर्द-निवारक |
| सब्सटेंस P | दर्द के संकेत |
जो दवा न्यूरोट्रांसमीटर की नकल करे या उसे बढ़ाए वह एगोनिस्ट; जो रोके वह एंटागोनिस्ट। कुछ दवाएँ reuptake रोकती हैं, तो संदेशवाहक ज़्यादा देर टिकता है।
अंतःस्रावी तंत्र (endocrine) हार्मोन खून में भेजता है। ये धीमे पर देर तक असर करते हैं: एड्रेनालिन (तनाव), मेलाटोनिन (नींद), लेप्टिन और घ्रेलिन (पेट भरना और भूख), ऑक्सीटोसिन (लगाव)। हाइपोथैलेमस पिट्यूटरी ("मुख्य ग्रंथि") को नियंत्रित करता है।
मस्तिष्क: भाग, प्लास्टिसिटी और जाँच के तरीके
- मस्तिष्क स्तंभ (मेडुला, पोंस): साँस, धड़कन। जालिका सक्रियण तंत्र (reticular activating system) जगाए और सतर्क रखता है।
- अनुमस्तिष्क: संतुलन, सधी गति, कौशल सीखना।
- थैलेमस: इंद्रियों का रिले स्टेशन (गंध छोड़कर)। हाइपोथैलेमस: भूख, प्यास, तापमान, हार्मोन। एमिग्डला: डर और भावना। हिप्पोकैंपस: नई यादें बनाना।
- प्रमस्तिष्क वल्कुट (cerebral cortex): झुर्रीदार बाहरी परत। अग्र पालि: योजना, निर्णय, व्यक्तित्व; इसमें प्रेरक वल्कुट और ब्रोका क्षेत्र (बोलना)। पार्श्व पालि: स्पर्श, कायसंवेदी वल्कुट। शंख पालि: सुनना और वर्निके क्षेत्र (शब्द समझना)। पश्च पालि: देखना।
दोनों गोलार्ध कॉर्पस कैलोसम से जुड़े हैं। विभाजित-मस्तिष्क (split-brain) अध्ययन बताते हैं कि हर आधे की कुछ ख़ास ताक़तें हैं, फिर भी आम तौर पर दोनों टीम की तरह काम करते हैं।
न्यूरोप्लास्टिसिटी: मस्तिष्क खुद को नए सिरे से जोड़ सकता है, ख़ासकर बचपन में और चोट या अभ्यास के बाद।
अंदर कैसे देखें: EEG (विद्युत तरंगें), fMRI (सक्रिय हिस्सों में खून का बहाव), PET (ट्रेसर से सक्रियता), CT और MRI (बनावट), और मस्तिष्क-चोट के केस अध्ययन।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- संदेश का रास्ता: डेंड्राइट → कोशिका-काय → एक्सॉन → सिरे → सिनैप्स → अगला न्यूरॉन
- विराम विभव ≈ −70 mV; क्रिया विभव शिखर ≈ +40 mV
- पूरा या कुछ नहीं: तेज़ उत्तेजना = ज़्यादा बार फ़ायर, बड़ा स्पंद नहीं
- अनुकंपी = उत्तेजित (लड़ो या भागो); परानुकंपी = शांत (आराम और पाचन)
- एगोनिस्ट नकल/बढ़ावा; एंटागोनिस्ट रोक; reuptake वापस खींचना
हल किए गए उदाहरण
1. स्ट्रोक के बाद एक मरीज़ बात समझ लेता है पर शब्द बोल नहीं पाता। कौन-सा क्षेत्र प्रभावित होगा?
बाएँ अग्र पालि का ब्रोका क्षेत्र, जो बोलने में मदद करता है। समझने वाला वर्निके क्षेत्र ठीक है।
2. लंबी दौड़ के अंत में धावक को कम दर्द महसूस होता है। कौन-सा रसायन मदद करता है?
एंडोर्फिन, शरीर का प्राकृतिक दर्द-निवारक, जो तनाव और कड़ी कसरत में निकलता है।
3. अलग-अलग पले एकयुग्मज जुड़वाँ फिर भी लंबाई में बहुत और कुछ स्वभाव में काफ़ी मिलते-जुलते हैं। इसका क्या मतलब है?
इन गुणों में जीन की बड़ी भूमिका है, क्योंकि जीन साझा हैं पर घर नहीं। इसका मतलब यह नहीं कि वातावरण का असर नहीं।
4. उत्तेजना 3 पर न्यूरॉन फ़ायर नहीं करता, 5 पर करता है। 9 पर क्या होगा?
स्पंद का आकार वही रहेगा (पूरा या कुछ नहीं), पर न्यूरॉन ज़्यादा बार फ़ायर करेगा, जिससे तेज़ उत्तेजना का पता चलता है।
आम गलतियाँ
- सोचना कि तेज़ उत्तेजना बड़ा क्रिया विभव बनाती है। आकार तय है; सिर्फ़ फ़ायर की दर बदलती है।
- अनुकंपी (उत्तेजित करने वाला) और परानुकंपी (शांत करने वाला) को उलट देना।
- कहना कि वंशागतित्व एक व्यक्ति के गुण का जीन-हिस्सा बताता है। यह समूह के अंतर के बारे में है।
- सोचना कि न्यूरॉन एक-दूसरे को छूते हैं। बीच में खाई (सिनैप्स) होती है।