वकील कौन है और कैसे बनते हैं?
वकील वह व्यक्ति है जिसने कानून पढ़ा है, जो सलाह देता है और अदालत में दूसरों की ओर से बोल सकता है। भारत में अदालत में बहस करने वाले वकील को अधिवक्ता (advocate) कहते हैं।
अधिवक्ता अधिनियम, 1961 इस पेशे का मुख्य कानून है। यह तीन बड़े काम करता है:
- यह बार काउंसिल बनाता है: हर राज्य की एक, और सबसे ऊपर बार काउंसिल ऑफ़ इंडिया।
- यह कहता है कि केवल नामांकित अधिवक्ता ही अदालत में वकालत (practice) कर सकता है।
- बार काउंसिल आचरण के नियम बनाती है और कदाचार (misconduct) पर सज़ा दे सकती है, जैसे वकील को निलंबित करना।
अधिवक्ता बनने के कदम
- 12वीं पास करो।
- मान्यता प्राप्त LLB डिग्री लो।
- राज्य बार काउंसिल में आवेदन करो और नाम सूची (roll) में दर्ज कराओ।
- वकालत की अनुमति वाली बार परीक्षा पास करो।
दूसरे देशों में भी ऐसा ही है: डिग्री, फिर पेशेवर परीक्षा या प्रशिक्षण, फिर बार या लॉ सोसाइटी में प्रवेश।
व्यावसायिक नैतिकता: चार कर्तव्य
नैतिकता यानी सही-ग़लत के नियम। लोग वकील पर अपने राज़ और न्याय का भरोसा करते हैं, इसलिए उनके नियम ख़ास हैं।
- मुवक्किल के प्रति: राज़ गुप्त रखो (गोपनीयता), ईमानदारी से काम करो, उसी केस में दूसरे पक्ष का काम मत लो, जीती हुई रक़म में हिस्सा मत माँगो।
- अदालत के प्रति: जज से झूठ नहीं, सबूत छिपाना या गढ़ना नहीं, सम्मान से व्यवहार।
- सामने वाले पक्ष के प्रति: निष्पक्ष रहो; अगर उसका वकील है तो सीधे उससे बात मत करो।
- समाज के प्रति: जो फ़ीस नहीं दे सकते उनकी मदद (विधिक सहायता), और कानून के शासन का साथ।
नियम तोड़ने पर बार काउंसिल अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है।
क्या वकील विज्ञापन कर सकते हैं?
भारत में वकील विज्ञापन नहीं कर सकते, न दलालों (touts), पोस्टरों या पैसे वाले विज्ञापनों से काम माँग सकते हैं। सोच यह है: कानून न्याय की सेवा है, बेचने का धंधा नहीं।
छोटी, सादी चीज़ें चलती हैं: साधारण नाम-पट्ट, और बुनियादी जानकारी वाली वेबसाइट (नाम, पता, योग्यता, काम का क्षेत्र)।
USA और UK जैसे कुछ देशों में वकील विज्ञापन कर सकते हैं, पर विज्ञापन सच्चा और भ्रम न फैलाने वाला होना चाहिए। "हम हमेशा जीतते हैं" जैसा वादा कहीं भी मना है।
कानून का वैश्वीकरण और महिलाएँ
विधिक पेशे का वैश्वीकरण
कंपनियाँ कई देशों में व्यापार करती हैं, इसलिए उन्हें कई देशों के कानून जानने वाले वकील चाहिए। बड़ी अंतरराष्ट्रीय लॉ फ़र्म कई शहरों में काम करती हैं। कुछ देश विदेशी वकीलों को विदेशी कानून और अंतरराष्ट्रीय सौदों पर सलाह देने देते हैं, बार काउंसिल के नियमों के अंदर। भारत ने भी धीरे-धीरे, मुख्यतः अदालत से बाहर की सलाह के लिए, यह रास्ता खोला है।
कानून में महिलाएँ
बहुत समय तक महिलाओं को कानून से दूर रखा गया। भारत में कॉर्नेलिया सोराबजी कानून पढ़ने वाली शुरुआती महिलाओं में थीं और उन्होंने महिलाओं के हक़ के लिए काम किया। 1923 के एक कानून ने महिलाओं को वकालत की अनुमति दी। आज बहुत-सी महिलाएँ वकील और जज हैं, पर सबसे ऊँचे पदों पर अब भी कम हैं। बराबर मौक़े से न्याय सबका प्रतिनिधित्व करता है।
भारत, USA और UK में कानून की पढ़ाई
| देश | रास्ता | फिर |
|---|---|---|
| भारत | 12वीं के बाद 5 साल का एकीकृत LLB (जैसे राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय), या डिग्री के बाद 3 साल का LLB | राज्य बार काउंसिल में नामांकन और बार परीक्षा |
| USA | पहले कोई डिग्री, फिर लॉ स्कूल में 3 साल का JD (Juris Doctor) | राज्य की बार परीक्षा |
| UK (इंग्लैंड-वेल्स) | 3 साल का LLB, या कोई डिग्री + कन्वर्ज़न कोर्स | व्यावहारिक प्रशिक्षण और परीक्षा: सॉलिसिटर या बैरिस्टर |
UK में दो शाखाएँ हैं: सॉलिसिटर (मुख्यतः सलाह देते हैं) और बैरिस्टर (मुख्यतः ऊँची अदालतों में बहस करते हैं)।
कानून में करियर
- मुक़दमेबाज़ी (litigation): अदालत में बहस।
- न्यायपालिका: परीक्षा या पदोन्नति से जज बनना।
- कॉर्पोरेट कानून: अनुबंध, विलय, कंपनी के नियम।
- विधिक सहायता और NGO: जो फ़ीस नहीं दे सकते उनकी मदद।
- पढ़ाना और शोध।
- सरकार और नीति: कानून का मसौदा बनाना, सरकारी वकील, विधिक सलाहकार।
खुद करो
छठे कदम में करियर चुनने वाला बटन इस्तेमाल करो। फिर किसी जान-पहचान के वकील से बात करो (या अदालत की वेबसाइट देखो) और लिखो कि वे एक सामान्य हफ़्ते में कौन-से तीन काम करते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- अधिवक्ता = बार काउंसिल में नामांकित वकील, जो अदालत में बहस कर सकता है
- बार काउंसिल = वकीलों का नामांकन और अनुशासन करने वाली संस्था
- सूची (roll) = नामांकित अधिवक्ताओं की आधिकारिक सूची
- व्यावसायिक कदाचार = पेशे के नैतिक नियम तोड़ना
- गोपनीयता (confidentiality) = मुवक्किल के राज़ सुरक्षित रखना
- सॉलिसिटर / बैरिस्टर = UK में वकीलों की दो शाखाएँ
हल किए गए उदाहरण
1. रवि के पास LLB है पर वह किसी बार काउंसिल में नामांकित नहीं है। क्या वह दोस्त के लिए ज़िला अदालत में बहस कर सकता है?
नहीं। अधिवक्ता अधिनियम के अनुसार केवल नामांकित अधिवक्ता ही अदालत में वकालत कर सकते हैं। पहले उसे राज्य बार काउंसिल की सूची में नाम दर्ज कराना होगा।
2. एक वकील पोस्टर छापता है: "30 दिन में तलाक, पक्का!" कौन-सा नियम टूटा?
विज्ञापन और काम माँगने पर रोक का नियम। यह भ्रामक भी है, क्योंकि कोई वकील अदालत के फ़ैसले की गारंटी नहीं दे सकता।
3. मुवक्किल अपने व्यापार का राज़ वकील को बताती है। सामने वाला पक्ष वकील को राज़ बताने के लिए पैसे देता है। वकील क्या करे?
मना करे। मुवक्किल की गोपनीयता पहला कर्तव्य है, और दूसरे पक्ष से पैसा लेना गंभीर कदाचार है।
4. मीरा USA में वकील बनना चाहती है। उसके पास इतिहास की डिग्री है। उसका रास्ता क्या है?
लॉ स्कूल में 3 साल का JD करे, फिर जिस राज्य में काम करना है उसकी बार परीक्षा पास करे।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि सिर्फ़ डिग्री से अदालत में बहस कर सकते हैं। बार काउंसिल में नामांकन भी ज़रूरी है।
- यह सोचना कि वकील हर जगह दुकान की तरह विज्ञापन कर सकते हैं। भारत में नहीं; दूसरी जगह भी विज्ञापन सच्चा होना चाहिए।
- यह सोचना कि वकील का एक ही कर्तव्य है: मुवक्किल को जिताना। अदालत और समाज के प्रति कर्तव्य भी हैं।
- सॉलिसिटर और बैरिस्टर को एक मानना: सॉलिसिटर मुख्यतः सलाह देते हैं, बैरिस्टर ऊँची अदालतों में बहस करते हैं।