संसाधन कम, इसलिए व्यापार ज़रूरी
संसाधन (resource) प्रकृति की वह चीज़ है जिसे लोग काम में लेते हैं, जैसे कोयला, तेल, गैस, पानी, जंगल, मछली और मिट्टी। जापान ज़्यादातर पहाड़ी है और उसकी ज़मीन के नीचे तेल, कोयला और गैस बहुत कम हैं। पर उसकी आबादी बड़ी है और कारख़ानों को बहुत ऊर्जा और कच्चा माल चाहिए।
इसलिए जापान ज़्यादातर ईंधन और धातुएँ आयात करता है (दूसरे देशों से ख़रीदता है)। वह कार, मशीनें और इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे तैयार माल निर्यात करता है (दूसरे देशों को बेचता है)। कमाई के इस तरीके को प्रसंस्करण व्यापार कहते हैं: कच्चा ख़रीदो, ज़्यादा क़ीमत का सामान बनाओ, बेचो।
जापान की ऊर्जा कहाँ से आती है?
ऊर्जा से रोशनी, गर्मी, गति और बिजली मिलती है। मान लीजिए जापान 10 ब्लॉक ऊर्जा इस्तेमाल करता है। लगभग 8 ब्लॉक जीवाश्म ईंधन (तेल, कोयला, प्राकृतिक गैस) से आते हैं, और उनमें से ज़्यादातर दूसरे देशों से जहाज़ पर आते हैं। लगभग 1 ब्लॉक नाभिकीय ऊर्जा है और लगभग 1 ब्लॉक नवीकरणीय: पानी (जल-विद्युत), सूरज, हवा और धरती की गर्मी। ये हिस्से हर साल बदलते हैं, इसलिए इन्हें मोटा अंदाज़ा मानिए।
जीवाश्म ईंधन जलाने से हवा में कार्बन डाइऑक्साइड जाती है, जो पृथ्वी को गर्म करती है। इसलिए कई देश ऊर्जा बचाने और नवीकरणीय स्रोत बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। जापान की कई मशीनें, जैसे ट्रेन, बल्ब और फ्रिज, बहुत कम ऊर्जा लेती हैं। नाभिकीय बिजली चलते समय कार्बन डाइऑक्साइड नहीं बनाती, पर उसमें दुर्घटना का ख़तरा है और कचरे को सुरक्षित रखना पड़ता है, इसलिए उसके स्थान पर बहस चलती रहती है।
खेत, मत्स्य पालन, कारख़ाने और सेवाएँ
काम तीन क्षेत्रों में बाँटा जाता है। प्राथमिक: प्रकृति से चीज़ें लेना, जैसे खेती, मछली पकड़ना और वन। द्वितीयक: कारख़ानों में चीज़ें बनाना। तृतीयक (सेवाएँ): लोगों की मदद करना, जैसे दुकान, स्कूल, अस्पताल, बैंक, परिवहन और पर्यटन।
जापान के 20 कामगारों में से लगभग 1 प्राथमिक क्षेत्र में, लगभग 5 द्वितीयक में और लगभग 14 सेवाओं में काम करते हैं। खेत छोटे हैं और सँकरी समतल ज़मीन पर ज़्यादातर चावल, सब्ज़ियाँ और फल उगते हैं। समुद्र पास होने से मछली पालन महत्त्वपूर्ण है, पर बहुत-सी मछली दूसरे देशों से भी आती है। बड़े कारख़ाना क्षेत्र तट पर हैं, जहाँ जहाज़ आसानी से कच्चा माल लाते और तैयार सामान ले जाते हैं। सेवाएँ सबसे बड़ा क्षेत्र हैं और बढ़ रही हैं।
पर्यावरण की समस्याएँ और उनका हल
जब कारख़ाने तेज़ी से बढ़े, तो कई शहरों में धुएँ और गंदे पानी ने हवा, नदियों और लोगों की सेहत को नुक़सान पहुँचाया। बाद में देश ने सख़्त नियम बनाए, फ़िल्टर और जल-शोधन संयंत्र लगाए और भारी कारख़ानों को साफ़ तरीकों पर चलाया।
आज की समस्याओं में जलने वाले ईंधन से कार्बन डाइऑक्साइड, छोटी ज़मीन पर बहुत सारा कचरा और गाँव ख़ाली होने से खेती की ज़मीन का घटना शामिल हैं। हल हैं: साफ़ तकनीक, कचरे की छँटाई और पुनर्चक्रण (recycling), और ऊर्जा की बचत। 3D में उत्पादन बढ़ाने से धुआँ बढ़ता है, पर साफ़ तकनीक उसे घटा देती है: आप बढ़ भी सकते हैं और साफ़ भी रह सकते हैं।
करके देखिए: अपने घर के ऊर्जा ब्लॉक गिनिए
आज अपने घर को देखिए। ऐसी पाँच चीज़ें लिखिए जिन्हें ऊर्जा चाहिए, जैसे बल्ब, पंखा, फ्रिज, रसोई गैस और फ़ोन चार्जर। इनमें कौन बिजली लेती है और कौन ईंधन? फिर एक चीज़ चुनिए और एक दिन उसे कम इस्तेमाल कीजिए। पूरा देश ऐसे ही ऊर्जा बचाता है: लाखों छोटे फ़ैसलों से।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- आयात = दूसरे देश से ख़रीदना; निर्यात = दूसरे देश को बेचना
- प्राथमिक = प्रकृति (खेती, मछली); द्वितीयक = कारख़ाना; तृतीयक = सेवाएँ
- ऊर्जा मिश्रण: जीवाश्म + नाभिकीय + नवीकरणीय = 100%
- धुआँ = उत्पादन × (1 − साफ़ तकनीक)
- प्रसंस्करण व्यापार = कच्चा माल आयात, तैयार माल निर्यात
हल किए गए उदाहरण
1. ऊर्जा के 10 ब्लॉक में से 9 जहाज़ से आते हैं। कितने प्रतिशत आयातित है?
9 / 10 × 100 = 90%।
2. 20 कामगारों में से 14 सेवाओं में हैं। यह कितने प्रतिशत है?
14 / 20 × 100 = 70%।
3. एक कारख़ाना बिना फ़िल्टर के 8 इकाई धुआँ बनाता है। फ़िल्टर आधा हटा देता है। कितना धुआँ बचा?
बचा धुआँ = 8 × (1 − 0.5) = 4 इकाई।
4. जापान बड़े कारख़ाने तट पर क्यों बनाता है?
कच्चा माल जहाज़ से आता है और तैयार सामान जहाज़ से जाता है। तट पर कारख़ाना होने से भारी बोझ ज़मीन पर ढोने का ख़र्च और समय बचता है।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि जापान में कोयला और तेल बहुत है। वह ज़्यादातर ईंधन आयात करता है।
- क्षेत्र मिला देना: किसान प्राथमिक, कारख़ाने का कामगार द्वितीयक और शिक्षक तृतीयक है।
- यह मानना कि नाभिकीय बिजली में कोई समस्या नहीं। चलते समय धुआँ नहीं बनता, पर दुर्घटना का ख़तरा और कचरा है।
- संख्याओं को पक्का मान लेना। ऊर्जा मिश्रण और रोज़गार के हिस्से हर साल बदलते हैं, ये मोटे अंदाज़े हैं।