संरचना: अलग उम्र के तीन खंड
- प्रायद्वीपीय खंड: बहुत पुरानी कठोर चट्टानें (नीस, ग्रेनाइट)। स्थिर, घिसकर पठार और पुरानी पहाड़ियाँ बनीं।
- हिमालय और अन्य नवीन पर्वत: भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट से टकराने पर बने। अब भी ऊपर उठ रहे हैं; भूकंप आते हैं।
- सिंधु-गंगा-ब्रह्मपुत्र मैदान: दोनों के बीच का गहरा गर्त, जो नदियों की गाद से भर गया।
उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पर्वत
तीन समानांतर श्रेणियाँ
- हिमाद्रि (महान हिमालय): सबसे ऊँची, औसत लगभग 6,000 मी, बर्फ़ से ढकी। माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा।
- हिमाचल (लघु हिमालय): 3,700–4,500 मी। पीर पंजाल, धौलाधार। शिमला जैसे पर्वतीय नगर।
- शिवालिक (बाह्य हिमालय): 900–1,100 मी, नदियों की ढीली बजरी से बनी। शिवालिक और हिमाचल के बीच लंबी समतल घाटियाँ दून हैं (देहरादून)।
प्रादेशिक विभाग (पश्चिम से पूर्व)
कश्मीर (उत्तर-पश्चिमी) हिमालय – काराकोरम, लद्दाख, ज़ास्कर श्रेणियाँ; हिमाचल और उत्तराखंड हिमालय; दार्जिलिंग और सिक्किम हिमालय; अरुणाचल हिमालय।
उत्तर-पूर्वी पहाड़ियाँ (पूर्वांचल)
पर्वत दक्षिण की ओर मुड़ते हैं: पटकाई बूम, नागा पहाड़ियाँ, मणिपुर पहाड़ियाँ, मिज़ो (लुशाई) पहाड़ियाँ। ज़्यादातर बलुआ पत्थर, घने वनों से ढकी।
उत्तरी मैदान
सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र और उनकी सहायक नदियों ने बनाया। बहुत समतल और बहुत उपजाऊ। पहाड़ों से दक्षिण की ओर:
- भाबर: शिवालिक की तलहटी में 8–10 किमी चौड़ी कंकड़-पत्थर की पट्टी; छोटी धाराएँ ज़मीन में समाकर ग़ायब हो जाती हैं।
- तराई: धाराएँ फिर ऊपर आती हैं; गीली, दलदली, पहले घना जंगल।
- बांगर: ऊँची भूमि पर पुराना जलोढ़, बाढ़ से ऊपर; इसमें कंकड़ (चूने की गाँठें) होते हैं।
- खादर: बाढ़ के मैदानों पर नया जलोढ़, हर साल नया; सबसे उपजाऊ।
समुद्र के पास बड़े डेल्टा हैं, जैसे गंगा–ब्रह्मपुत्र डेल्टा (सुंदरबन)।
प्रायद्वीपीय पठार
पुरानी कठोर चट्टानों का त्रिभुज, 600–900 मी ऊँचा, पूर्व की ओर धीरे झुका।
- दक्कन पठार: बड़ा भाग काली लावा चट्टान (दक्कन ट्रैप) से बना।
- पश्चिमी घाट (सह्याद्रि): ऊँचे (900–1,600 मी) और लगातार। अनाईमुडी (2,695 मी) प्रायद्वीप की सबसे ऊँची चोटी।
- पूर्वी घाट: नीचे और पूर्व बहने वाली नदियों से टुकड़ों में कटे।
- दक्कन के उत्तर में: अरावली (सबसे पुराने वलित पर्वतों में), मालवा पठार, बुंदेलखंड, छोटानागपुर पठार (खनिजों से भरपूर)।
- उत्तर-पूर्व में: मेघालय पठार (गारो, खासी, जयंतिया पहाड़ियाँ), प्रायद्वीप का टुकड़ा जो मालदा गैप से अलग हुआ।
भारतीय मरुस्थल
अरावली पहाड़ियों के पश्चिम में, इसे मरुस्थली भी कहते हैं।
- साल में 150 मिमी से कम वर्षा; दिन बहुत गरम, रातें ठंडी।
- अर्धचंद्राकार टीले, जिन्हें बरखान कहते हैं, और लंबे टीले।
- नदियाँ थोड़े समय बहती हैं; मुख्य नदी लूनी। कुछ धाराएँ खारी झीलों में ख़त्म होती हैं (जैसे सांभर)।
- चट्टानें बताती हैं कि यह क्षेत्र कभी समुद्र के नीचे था।
तटीय मैदान
| पश्चिमी तटीय मैदान | पूर्वी तटीय मैदान |
|---|---|
| सँकरा, पश्चिमी घाट और अरब सागर के बीच | चौड़ा, पूर्वी घाट और बंगाल की खाड़ी के बीच |
| धँसा हुआ (निमज्जित) तट: अच्छे प्राकृतिक बंदरगाह (मुंबई, कोच्चि) | उभरा हुआ (निर्गत) तट: कम प्राकृतिक बंदरगाह |
| नदियाँ ज्वारनदमुख बनाती हैं, डेल्टा नहीं | बड़े डेल्टा: महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी |
| भाग: कच्छ–काठियावाड़, कोंकण, गोवा (कन्नड़), मालाबार (लैगून, कयाल) | भाग: उत्कल, आंध्र, कोरोमंडल; झीलें चिल्का, पुलिकट |
द्वीप समूह
- अंडमान और निकोबार (बंगाल की खाड़ी): लगभग 570 द्वीप; कई समुद्र के नीचे की पर्वत श्रेणी की चोटियाँ। बैरन द्वीप भारत का अकेला सक्रिय ज्वालामुखी। दस डिग्री चैनल अंडमान को निकोबार से अलग करता है।
- लक्षद्वीप (अरब सागर): 36 छोटे द्वीप, प्रवाल से बने; नीचे और समतल। मिनिकॉय के उत्तर में नौ डिग्री चैनल है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हिमालय उ→द: हिमाद्रि (~6,000 मी) → हिमाचल (3,700–4,500 मी) → शिवालिक (900–1,100 मी)
- मैदान पहाड़ से: भाबर → तराई → बांगर (पुराना) → खादर (नया)
- पश्चिमी घाट: ऊँचे, लगातार; पूर्वी घाट: नीचे, टूटे
- पश्चिमी तट: सँकरा, ज्वारनदमुख; पूर्वी तट: चौड़ा, डेल्टा
- अंडमान-निकोबार: पर्वत चोटियाँ + ज्वालामुखी; लक्षद्वीप: प्रवाल
हल किए गए उदाहरण
1. खादर बांगर से ज़्यादा उपजाऊ क्यों है?
खादर में हर साल बाढ़ से ताज़ा गाद आती है, इसलिए पोषक तत्व नए होते रहते हैं। बांगर पुरानी मिट्टी है, बाढ़ से ऊपर, और उसमें कंकड़ हैं।
2. पश्चिमी तट की नदियाँ डेल्टा की जगह ज्वारनदमुख क्यों बनाती हैं?
वे छोटी और तेज़ हैं, खड़े पश्चिमी घाट से उतरती हैं, और तट धँसा हुआ है। वे कम गाद लाती हैं और वह बह जाती है।
3. पश्चिमी और पूर्वी घाट में दो अंतर बताइए।
पश्चिमी घाट ऊँचे और लगातार हैं; पूर्वी घाट नीचे और नदियों से टूटे हैं। पश्चिमी घाट बड़ी प्रायद्वीपीय नदियों के उद्गम हैं।
4. मेघालय पठार को प्रायद्वीपीय पठार का भाग क्यों कहते हैं?
यह उन्हीं पुरानी चट्टानों से बना है; मालदा गैप (एक भ्रंश क्षेत्र जो बाद में नदी की गाद से भरा) ने इसे छोटानागपुर पठार से अलग कर दिया।
आम गलतियाँ
- शिवालिक को सबसे ऊँची श्रेणी मानना। यह सबसे नीची और बाहरी है; हिमाद्रि सबसे ऊँची है।
- भाबर और तराई को मिला देना। भाबर ऊपर से सूखा और कंकड़ीला; तराई गीली और दलदली।
- लक्षद्वीप को ज्वालामुखी द्वीप कहना। ये प्रवाल द्वीप हैं; बैरन द्वीप (अंडमान) ज्वालामुखी है।
- पूर्वी तट को सँकरा कहना। पूर्वी तट चौड़ा है; पश्चिमी तट सँकरा है।