बोली-नाटक क्या है?
बोली-नाटक में अभिनेता ज़्यादातर बोलते हैं, जैसे रोज़ की ज़िंदगी में लोग बोलते हैं। चीनी नाम है हुआजू (huaju)। पुराना चीनी रंगमंच शीक़ू (xiqu) यानी ऑपेरा गीत, नृत्य और संवाद मिलाकर चलता है। हुआजू ने सिर्फ़ बोलचाल और सीधी चाल रखी। इसमें साधारण कपड़े, कमरे जैसा सेट और असली लोगों की कहानी होती है।
नए शब्द: पटकथा (script) = लिखा हुआ नाटक। नाटककार (playwright) = नाटक लिखने वाला। मंडली (troupe) = कलाकारों का समूह।
जागृति: 1907 से 1920 के दशक तक
1907 में टोक्यो में पढ़ रहे चीनी छात्रों ने "स्प्रिंग विलो सोसाइटी" बनाई। उन्होंने बोलचाल वाले नाटक खेले। इसे हुआजू का पहला क़दम माना जाता है।
फिर एक हल्का, जल्दी बिकने वाला ढंग आया जिसे अक्सर "सभ्य नाटक" कहा गया, पर कई शो जल्दबाज़ी में बने और दिशा खो बैठे। लगभग 1918 के बाद पत्रिकाओं में नए विचारों पर बहस हुई, और यूरोप के नाटक जैसे इब्सन का ए डॉल्स हाउस पढ़े और खेले गए। उसमें नायिका घर से निकल जाती है। हॉन्ग शेन और तियेन हान जैसे लेखकों ने फिर चीनी भाषा में अपने समाज पर लिखा। 1920 के दशक के अंत तक "हुआजू" नाम चल पड़ा।
विकास: 1930 और 1940 के दशक
काओ यू ने थंडरस्टॉर्म (1934) और बाद में सनराइज़ लिखा। थंडरस्टॉर्म में दो परिवार एक घर में एक भारी, गर्म दिन मिलते हैं। कहानी बाहर के तूफ़ान और भीतर के तूफ़ान तक पहुँचती है। इसने दिखाया कि बोली-नाटक गहरी भावनाएँ और कसी हुई कहानी थिएटर में सँभाल सकता है।
1930 के दशक के आख़िर से कई मंडलियाँ नाटक को थिएटर से बाहर ले गईं। Lay Down Your Whip जैसे छोटे नाटक चौक और सड़कों पर खेले गए, भीड़ घेरा बनाकर खड़ी होती थी। मंच ज़रूरी नहीं था, सिर्फ़ साफ़ संदेश और दमदार अभिनय। नाटक अब सबके लिए था।
समय की आवाज़: 1950 के दशक से आज तक
बीजिंग पीपल्स आर्ट थिएटर (स्थापना 1952) ने अभिनय की मशहूर शैली बनाई। लाओ शे का टीहाउस (1958 में मंचित) एक चायख़ाने और उसके ग्राहकों को लगभग पचास साल और तीन दौर में दिखाता है। जगह वही रहती है और लोग बदलते हैं, इसलिए दर्शक को समय चलता हुआ महसूस होता है।
1980 के दशक से लेखकों और निर्देशकों ने नए रूप आज़माए, जैसे गाओ शिंगजियान का बस स्टॉप (1983)। बाद में छोटे थिएटरों और उत्सवों ने युवा कलाकारों को नई शैलियाँ आज़माने की जगह दी। यानी हुआजू की कहानी बदलाव की कहानी है: हर दौर ने अपने सवाल पूछे और नाटकों ने उस दौर की आवाज़ में जवाब दिया।
नाटक को "समय की आवाज़" की तरह कैसे पढ़ें
- यह कब लिखा गया?
- लोग किस समस्या से जूझ रहे थे?
- पात्र कौन हैं और वे क्या चाहते हैं?
- कहानी कहाँ घटती है और जगह कैसे मदद करती है?
- यह आज भी हमसे क्या कहता है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- हुआजू = बोली-नाटक = पहले बोलचाल, गाना नहीं
- 1907 स्प्रिंग विलो सोसाइटी (टोक्यो): पहला क़दम
- लगभग 1918 के बाद: नए विचार, ए डॉल्स हाउस पढ़ा और खेला गया
- 1934 काओ यू: थंडरस्टॉर्म
- 1930 के दशक का अंत: सड़क नाटक, जैसे Lay Down Your Whip
- 1958 लाओ शे: टीहाउस (बीजिंग पीपल्स आर्ट थिएटर)
- नियम: हर नाटक अपने समय की आवाज़ है
हल किए गए उदाहरण
1. सड़क नाटक को कई गाँवों में ले जाना आसान क्यों है?
उसे मंच, पर्दे या कपड़ों के बड़े ख़र्च की ज़रूरत नहीं। लोगों का घेरा और दमदार अभिनय काफ़ी है, इसलिए मंडली कहीं भी जाकर खेल सकती है।
2. टीहाउस में जगह नहीं बदलती पर साल बदलते हैं। यह चतुराई क्यों है?
एक ही कमरा तुलना करवाता है। ग्राहक, दाम और चिंताएँ बदलें और कमरा वही रहे तो दर्शक महसूस करता है कि समय और समाज कैसे बदले।
3. समस्या से पड़ाव मिलाओ: "नाटक को असली ज़िंदगी पर सवाल उठाने चाहिए।"
1918 के आसपास का नए विचारों वाला दौर। ए डॉल्स हाउस जैसे नाटक, जिनमें स्त्री घर छोड़ती है, ने दिखाया कि मंच पुरानी आदतों पर सवाल उठा सकता है।
आम गलतियाँ
- हुआजू और शीक़ू (ऑपेरा) को एक समझ लेना। हुआजू ज़्यादातर बोलचाल है, शीक़ू में गीत-नृत्य भी होता है।
- सालों में गड़बड़ी: 1907 शुरुआत है, 1934 थंडरस्टॉर्म, 1958 टीहाउस।
- यह मान लेना कि 1907 का नाटक बहुत बड़ा व्यावसायिक हिट था। वह छात्रों की प्रस्तुति थी, लंबे सफ़र की शुरुआत।
- नाटककार को अभिनेता कह देना। नाटककार पटकथा लिखता है, अभिनेता उसे खेलता है।