रेखाचित्र, छोटा नमूना (मैकेट) और मॉडल
मूर्तिकार कदम-कदम पर योजना बनाता है। रेखाचित्र (स्केच) कागज़ पर आगे और बगल का चित्र है। मैकेट हाथ में पकड़ने लायक छोटा 3D नमूना है, जो मिट्टी या मोम का होता है। इससे मुद्रा और संतुलन सस्ते में जाँच लेते हैं। मॉडल पूरे आकार की मिट्टी की मूर्ति है। साँचा इसी मॉडल से बनता है।
छोटा नमूना क्यों? छोटे नमूने की गलती सुधारने में मिनट लगते हैं, बड़े मॉडल की गलती में दिन लग सकते हैं।
ढलाई क्या है? साँचे का विचार
ढलाई यानी तरल चीज़ को साँचे में डालकर, जमने पर नकल पाना। साँचा ऋणात्मक (नेगेटिव) होता है: उसकी खाली जगह मॉडल से उल्टी है। नकल धनात्मक (पॉज़िटिव) है।
डाली जा सकने वाली चीज़ें: प्लास्टर, पतली घुली मिट्टी (स्लिप), मोम, रेज़िन और पिघली धातु। ढलाई से कमज़ोर मिट्टी की मूर्ति सालों टिक सकती है, और उसकी कई नकलें भी बन सकती हैं।
प्लास्टर का अपशिष्ट साँचा (वेस्ट मोल्ड)
प्लास्टर ऑफ़ पेरिस सफ़ेद पाउडर है। पानी में मिलाने पर पतला रहता है, फिर थोड़ा गर्म होकर करीब 20 मिनट में सख्त हो जाता है। अपशिष्ट साँचा बनाने के लिए मूर्तिकार मॉडल पर प्लास्टर चढ़ाता है। अक्सर पहले रंगीन पतली परत और ऊपर सफ़ेद परत लगाते हैं। नकल तैयार होने पर साँचे को छेनी से तोड़ते हैं। जब रंगीन परत के टुकड़े दिखने लगें, तो पता चलता है कि नकल पास है।
इसे अपशिष्ट इसलिए कहते हैं कि वह फेंक दिया जाता है। इससे सिर्फ़ एक नकल मिलती है। गहरे, मुड़े हुए आकार (जैसे खुली उँगलियों वाला हाथ) के लिए यह अच्छा है।
- सतह गीली करो या साबुन/तेल (रिलीज़ एजेंट) लगाओ, ताकि प्लास्टर चिपके नहीं।
- पाउडर को धीरे-धीरे पानी में डालो, पानी को पाउडर पर नहीं, वरना गाँठें बनेंगी।
टुकड़ों वाला साँचा और रबर का साँचा
टुकड़ों वाला साँचा (पीस मोल्ड) दो या ज़्यादा प्लास्टर टुकड़ों का होता है, जो जोड़ की रेखा पर खुलते हैं। टुकड़े बिना टूटे अलग होते हैं, इसलिए साँचा बार-बार काम आता है। टुकड़े ऐसे बनाते हैं कि मॉडल का कोई भाग साँचे को अटका न दे (जोड़ पर कोई अंडरकट न हो)।
रबर का साँचा सिलिकॉन या लेटेक्स से बनता है। रबर नरम है, खिंचकर मॉडल से निकल जाता है और वापस अपने आकार में आ जाता है, इसलिए बहुत बारीक नक्काशी (जैसे पत्ते की नसें) भी पकड़ता है। नरम रबर झुक जाता है, इसलिए उस पर सख्त प्लास्टर का कवच (जैकेट) बनाते हैं।
| साँचा | कितनी बार | किसके लिए अच्छा |
|---|---|---|
| अपशिष्ट | एक बार | गहरे, कठिन आकार |
| टुकड़ों वाला | कई बार | सरल आकार, कई नकलें |
| रबर | कई बार | बारीक नक्काशी |
टेराकोटा: खोखला करना और पकाना
टेराकोटा का मतलब है पकी हुई मिट्टी: मिट्टी को 900 से 1000 °C के आसपास पकाने पर वह लाल-भूरी हो जाती है। मिट्टी में पानी होता है। सूखने पर वह सिकुड़ती है। मोटा ठोस टुकड़ा धीरे और असमान सूखता है, इसलिए फट सकता है। अंदर फँसा पानी भट्ठी में भाप बनकर टुकड़े को फोड़ भी सकता है।
इसलिए टेराकोटा की मूर्तियाँ खोखली बनाते हैं: दीवार लगभग 1 से 2 सेमी और बराबर मोटी रखते हैं। एक छोटा हवा का छेद छोड़ते हैं ताकि भाप निकल सके। क्रम: मिट्टी को साँचे में दबाओ या स्लिप भरो, थोड़ा जमने दो, निकालो, अंदर से खोखला करो, कई दिन धीरे-धीरे सुखाओ, फिर भट्ठी में पकाओ।
पकी मिट्टी की देखभाल भी आसान है: सूखी जगह रखो, दोनों हाथों से उठाओ, नरम ब्रश से साफ़ करो। किसी कलाकृति को अच्छी हालत में रखना संरक्षण (कंज़र्वेशन) कहलाता है।
खुद करके देखो: प्लास्टर का पदचिह्न बनाओ
- किसी खिलौने या सिक्के को गीली रेत की ट्रे में दबाओ और निकाल लो। यह गड्ढा तुम्हारा साँचा (नेगेटिव) है।
- प्लास्टर ऑफ़ पेरिस को पानी में क्रीम जितना गाढ़ा घोलकर गड्ढे में डालो। बड़े की मदद लो। 30 मिनट रुको।
- नकल निकालकर खिलौने से मिलाओ। क्या आकार वही है? किस तरफ़ बारीकी सबसे अच्छी आई?
- सोचो: रेत सूखी और ढीली होती तो क्या होता?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मॉडल → साँचा (उल्टा) → नकल (सीधी)
- अपशिष्ट साँचा = एक बार; टुकड़ों वाला / रबर का साँचा = कई बार
- खोखला टेराकोटा: दीवार लगभग 1–2 सेमी, एक हवा का छेद
- टेराकोटा पकाने का तापमान: लगभग 900–1000 °C
- मुख्य शब्द: मैकेट, नेगेटिव, पॉज़िटिव, अंडरकट, रिलीज़ एजेंट, स्लिप, जैकेट
हल किए गए उदाहरण
1. एक मूर्तिकार को 20 एक जैसी छोटी मूर्तियाँ बनानी हैं। कौन-सा साँचा चुने और क्यों?
टुकड़ों वाला या रबर का साँचा, क्योंकि दोनों बार-बार काम आते हैं। अपशिष्ट साँचा एक नकल के बाद टूट जाता है, तो 20 साँचे बनाने पड़ते।
2. प्लास्टर के साँचे में सफ़ेद परत के नीचे रंगीन परत क्यों रखते हैं?
साँचा तोड़ते समय जब रंगीन परत के टुकड़े दिखने लगते हैं, तो मूर्तिकार समझ जाता है कि नकल पास है और छेनी धीरे चलाता है। इससे नकल बची रहती है।
3. मोटी मिट्टी की मूर्ति को पकाने से पहले खोखला क्यों करते हैं?
मोटी मिट्टी धीरे और असमान सूखती है, और फँसा पानी भट्ठी में भाप बन जाता है। दोनों से मूर्ति फट सकती है। पतली, बराबर दीवार बराबर सूखती है और भाप हवा के छेद से निकल जाती है।
आम गलतियाँ
- साँचे को ही नकल समझना। साँचा उल्टा आकार है; डालकर जमाई गई चीज़ नकल है।
- रिलीज़ एजेंट भूलना, जिससे प्लास्टर प्लास्टर से या मॉडल से चिपक जाता है।
- टेराकोटा को मोटा-ठोस रखना या हवा का छेद न छोड़ना, फिर भट्ठी में फटना।
- टुकड़ों वाले साँचे में ऐसा आकार रखना जो जोड़ पर टुकड़ों को अटका दे (अंडरकट)।