स्थानापन्न वस्तुएँ (प्रतियोगी माँग)
स्थानापन्न वस्तुएँ (substitutes) एक-दूसरे की जगह इस्तेमाल होती हैं: चाय और कॉफ़ी, बस और रेल, साबुन के दो ब्रांड। ये एक ही ख़रीदारों के लिए होड़ करती हैं, इसलिए इसे प्रतियोगी माँग कहते हैं।
- चाय की कीमत बढ़ी → चाय की माँगी गई मात्रा घटी (चाय के माँग वक्र पर चलना)।
- ख़रीदार बदले → कॉफ़ी की माँग बढ़ी: कॉफ़ी का पूरा माँग वक्र दाईं ओर खिसका, कॉफ़ी की कीमत और मात्रा बढ़ने लगती हैं।
जितना नज़दीकी स्थानापन्न, उतना बड़ा बदलाव। नियम: A की कीमत और B की माँग एक ही दिशा में।
पूरक वस्तुएँ (संयुक्त माँग)
पूरक वस्तुएँ (complements) साथ-साथ इस्तेमाल होती हैं: कार और पेट्रोल, प्रिंटर और स्याही, फ़ोन और डेटा पैक, चाय और चीनी। इनकी माँग संयुक्त माँग है।
- पेट्रोल महँगा → कार चलाना महँगा → कारों की माँग घटी (वक्र बाईं ओर)।
- गेम कंसोल सस्ता → ज़्यादा कंसोल बिके → गेम की माँग बढ़ी।
नियम: A की कीमत और B की माँग उलटी दिशा में। कंपनियाँ इसका फ़ायदा उठाती हैं: सस्ता प्रिंटर, महँगी स्याही।
व्युत्पन्न माँग
व्युत्पन्न माँग (derived demand) किसी वस्तु या साधन की वह माँग है जो किसी दूसरी चाहत की चीज़ को बनाने के लिए होती है। ईंटें, सीमेंट और राजमिस्त्री इसलिए चाहिए क्योंकि मकान चाहिए। बेकरी को आटा इसलिए चाहिए क्योंकि लोगों को ब्रेड चाहिए। श्रम की माँग हमेशा मज़दूरों द्वारा बनाई चीज़ों और सेवाओं की माँग से निकलती है। अंतिम वस्तु की माँग घटे तो उसके कच्चे माल और मज़दूरों की माँग भी घटती है।
सम्मिश्र माँग और संयुक्त पूर्ति
सम्मिश्र माँग (composite demand): एक वस्तु के कई अलग उपयोग। दूध पीने, पनीर, मक्खन और मिठाई में; ज़मीन खेती या मकानों में; स्टील कारों या इमारतों में। एक उपयोग की माँग बढ़े तो बाकी के लिए कम बचता है, उनकी कीमत बढ़ने लगती है।
संयुक्त पूर्ति (joint supply): एक चीज़ बनाने से अपने-आप दूसरी भी बनती है (उप-उत्पाद)। मांस और चमड़ा; कच्चे तेल से पेट्रोल, डीज़ल और केरोसिन; गेहूँ का दाना और भूसा। ज़्यादा मांस बना तो ज़्यादा चमड़ा भी आया, चमड़े का पूर्ति वक्र दाईं ओर खिसका और कीमत घटने लगी।
एक बाज़ार से दूसरे तक असर
इन कड़ियों के कारण एक झटका लहरों की तरह फैलता है। उदाहरण: पाला कॉफ़ी की फ़सल का बड़ा हिस्सा नष्ट कर दे → कॉफ़ी की पूर्ति घटी → कॉफ़ी महँगी → चाय (स्थानापन्न) की माँग बढ़ी → चाय महँगी → कॉफ़ी के साथ लगने वाली चीज़ों (फ़िल्टर, कुछ दूध-चीनी) की माँग घटी। परीक्षा में उत्तर ऐसे लिखें: (1) कड़ी का नाम (स्थानापन्न, पूरक, व्युत्पन्न, सम्मिश्र, संयुक्त पूर्ति), (2) कौन-सा वक्र किस ओर खिसका, (3) दूसरे बाज़ार में कीमत और मात्रा पर असर।
करके देखें
अपनी रसोई देखिए। एक जोड़ी स्थानापन्न (जैसे चाय और कॉफ़ी) और एक जोड़ी पूरक (जैसे चाय और चीनी) खोजिए। अगर चाय की कीमत दोगुनी हो जाए तो आपका परिवार कितनी कॉफ़ी और चीनी ख़रीदेगा? अनुमान लिखिए, फिर 3D के आख़िरी चरण के स्लाइडर से जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्थानापन्न: A की कीमत ↑ → B की माँग ↑ (एक ही दिशा)
- पूरक: A की कीमत ↑ → B की माँग ↓ (उलटी दिशा)
- व्युत्पन्न माँग: अंतिम वस्तु की माँग ↑ → साधनों (श्रम सहित) की माँग ↑
- सम्मिश्र माँग: उपयोग 1 में ज़्यादा → उपयोग 2 के लिए कम → कीमत ↑
- संयुक्त पूर्ति: A का उत्पादन ↑ → उप-उत्पाद B की पूर्ति ↑ → B की कीमत ↓
हल किए गए उदाहरण
1. दो शहरों के बीच रेल टिकट बहुत महँगा हो गया। उसी रास्ते के बस टिकट बाज़ार में क्या होगा?
रेल और बस स्थानापन्न हैं। कुछ यात्री बस की ओर जाएँगे, बस टिकट की माँग बढ़ेगी (वक्र दाईं ओर), किराया और बस यात्राएँ बढ़ने लगेंगी।
2. स्मार्टफ़ोन बहुत सस्ते हो गए। फ़ोन कवर की माँग का क्या होगा?
फ़ोन और कवर पूरक हैं। फ़ोन सस्ते तो ज़्यादा बिकेंगे, कवर की माँग बढ़ेगी (दाईं ओर) और बिक्री बढ़ेगी।
3. ऊँची ब्याज दर के कारण कम नए मकान बन रहे हैं। राजमिस्त्रियों पर असर समझाइए।
राजमिस्त्रियों की माँग मकानों की माँग से व्युत्पन्न है। कम मकान → कम राजमिस्त्री चाहिए → उनके श्रम की माँग घटी → कम मज़दूरी या कम नौकरियाँ।
4. लोग कम मांस खाने लगे तो मांस की माँग घटी। चमड़े की कीमत पर असर समझाइए।
मांस और चमड़ा संयुक्त पूर्ति में हैं। कम पशु कटेंगे, कम चमड़ा आएगा। चमड़े का पूर्ति वक्र बाईं ओर खिसकेगा और कीमत बढ़ने लगेगी।
5. निर्यात के लिए ज़्यादा दूध से पनीर बन रहा है। मक्खन की कीमत का क्या होगा?
दूध की सम्मिश्र माँग है। ज़्यादा दूध पनीर में गया, मक्खन के लिए कम बचा, मक्खन की पूर्ति घटी और कीमत बढ़ने लगी।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि चाय की कीमत बदलने पर चाय का माँग वक्र खिसकता है। अपनी कीमत बदलने पर वक्र पर चलना होता है; खिसकता है दूसरी वस्तु का वक्र।
- दिशा उलट देना: स्थानापन्न एक ही दिशा में (A की कीमत ↑, B की माँग ↑), पूरक उलटी दिशा में।
- संयुक्त पूर्ति को 'संयुक्त माँग' कहना। संयुक्त माँग = साथ इस्तेमाल (पूरक); संयुक्त पूर्ति = साथ बनना (उप-उत्पाद)।
- भूल जाना कि श्रम की माँग व्युत्पन्न है: किसी उद्योग में मज़दूरी उसके उत्पाद की माँग पर टिकी है।