भारत की क्षेत्रीय पाक कला
लोग क्या पकाते हैं, यह आस-पास उगने वाली फ़सल, मौसम और परंपरा पर निर्भर है।
- उत्तर (जैसे पंजाब, कश्मीर, उत्तर प्रदेश): गेहूँ की रोटी, नान, पराठा, दूध, घी, पनीर, मिट्टी का तंदूर, गाढ़ी ग्रेवी, दम पर पकाना।
- दक्षिण (जैसे तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, आंध्र): चावल, ख़मीर वाला घोल (इडली, डोसा), सांभर, रसम, नारियल, इमली, करी पत्ता, राई का तड़का।
- पूर्व (जैसे बंगाल, ओडिशा, असम): चावल, नदी की मछली, सरसों का तेल और पेस्ट, पाँच फोड़न, छेना की मिठाई जैसे रसगुल्ला।
- पश्चिम (जैसे गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र, गोवा): बाजरा, ज्वार, बेसन, मूँगफली, खट्टा-मीठा स्वाद, रेगिस्तान में देर तक टिकने वाला खाना, तट पर नारियल और समुद्री भोजन।
- पूर्वोत्तर: चावल, बाँस की कोंपल, ख़मीर वाले खाद्य, कम तेल, भाप।
पूरे भारत की ख़ास विधियाँ: तड़का, भूनना (मसाला तेल छोड़ने तक), दम, तंदूर, भाप और धीमा गाढ़ा करना।
भारतीय नाश्ते
नाश्ते चाय के साथ या स्ट्रीट फ़ूड के रूप में खाए जाते हैं। विधि से समूह:
- गहरे तले: समोसा, पकौड़ा, कचौरी, वड़ा, भज्जी। तेल लगभग 170–180 °C। ठंडा तेल = तेलिया, बहुत गरम = बाहर जला।
- भाप वाले: ढोकला, इडली, मोमो, पात्रा। कम वसा।
- कम तेल/तवे पर: टिक्की, कटलेट, चीला, पाव भाजी।
- चाट: कुरकुरा (पापड़ी, सेव), नरम (आलू, छोले), मीठा (इमली-खजूर चटनी), तीखा (हरी चटनी) और ठंडा (दही)।
साफ़-सफ़ाई ज़रूरी: ताज़ा तेल, चटनी के लिए साफ़ पानी, ढका खाना।
भारतीय मूल ग्रेवी
ग्रेवी करी की तरी है। रसोई में कुछ बेस ग्रेवी बनाकर उनसे कई डिश बनती हैं।
- प्याज़-टमाटर (लाल/भूरी): सुनहरे प्याज़, अदरक-लहसुन, टमाटर, मसाले। छोले, कड़ाही आदि में।
- सफ़ेद (कोरमा): उबला प्याज़, काजू या मगज़ का पेस्ट, दही या क्रीम। कोरमा, मलाई कोफ़्ता में।
- पीली: प्याज़, हल्दी, दही या दाल; हल्की। दाल, कढ़ी, घर की सब्ज़ी में।
- हरी: पालक या धनिया-पुदीना पेस्ट। पालक पनीर, हरियाली में।
- साथ ही मखनी (टमाटर-मक्खन-क्रीम) ग्रेवी।
गाढ़ापन प्याज़, मेवे के पेस्ट, दही, दाल या धीमे पकाने से आता है, आटे से नहीं।
भारतीय मिठाइयाँ
ज़्यादातर मिठाइयाँ दूध, अनाज या दाल, चीनी और घी से बनती हैं।
- खोया (मावा): दूध को तब तक उबालें जब तक ज़्यादातर पानी उड़ जाए। 1 लीटर दूध से लगभग 200 ग्राम खोया। पेड़ा, बर्फ़ी, गुलाब जामुन में।
- छेना: नींबू रस या पुराने पानी से दूध फाड़कर छाना हुआ। रसगुल्ला, संदेश, रसमलाई में।
- चाशनी अलग-अलग तार (एक तार, दो तार) तक पकाई जाती है।
- अनाज/दाल की मिठाई: हलवा (सूजी, गाजर, मूँग दाल), लड्डू (बेसन, सूजी), खीर/पायसम, जलेबी (ख़मीर वाला घोल तलकर चाशनी में)।
दूध की मिठाई जल्दी ख़राब होती है, इसे ठंडे में रखें और कुछ दिनों में खा लें।
भारतीय भोजन परोसना
थाली गोल प्लेट है जिसमें छोटी कटोरियाँ होती हैं। संतुलित भोजन: अनाज (चावल या रोटी), दाल, एक-दो सब्ज़ी, दही या रायता, सलाद, अचार या चटनी, पापड़ और मिठाई। इसमें छह स्वाद होने चाहिए: मीठा, खट्टा, नमकीन, तीखा, कड़वा और कसैला।
दक्षिण में अक्सर केले के पत्ते पर तय क्रम में परोसते हैं। अच्छा परोसना: गरम चीज़ गरम, ठंडी ठंडी, रंगों में अंतर, सजावट (धनिया, क्रीम, तले प्याज़), साफ़ किनारे और सही मात्रा।
करके देखिए
घर के किसी एक भोजन में कौन-से खाद्य समूह और स्वाद हैं, लिखिए। फिर 3D खुले खेल में पूरी थाली बनाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
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हल किए गए उदाहरण
1. कैंटीन को 3 किलो खोया चाहिए। लगभग कितना दूध उबालें?
1 लीटर से 0.2 किलो। 3 ÷ 0.2 = 15 लीटर दूध।
2. पालक पनीर और कोरमा के लिए कौन-सा बेस?
पालक पनीर: हरा (पालक) बेस। कोरमा: सफ़ेद (मेवा-दही) बेस।
3. पकौड़े तेलिया और फीके बने। क्या ग़लत हुआ?
तेल ठंडा था (170 °C से कम), घोल ने तेल सोख लिया। तेल इतना गरम करें कि घोल की बूँद तुरंत ऊपर आए, और थोड़े-थोड़े तलें।
4. केले के पत्ते पर संतुलित दक्षिण भारतीय भोजन बनाइए।
चावल (अनाज), सांभर (दाल + सब्ज़ी), रसम (खट्टा, हल्का), सूखी पोरियल, दही, अचार, पापड़ और पायसम (मीठा)।
आम गलतियाँ
- बहुत गरम तेल में पिसे मसाले डालकर जला देना; आँच धीमी करें या थोड़ा पानी डालें।
- प्याज़-टमाटर मसाला तेल छोड़ने तक न भूनना, जिससे ग्रेवी कच्ची लगती है।
- यह सोचना कि भारतीय खाना हर जगह एक जैसा और तीखा है; क्षेत्रों में बहुत अंतर है।
- दूध की मिठाई देर तक कमरे के तापमान पर रखना; यह जल्दी ख़राब होती है।