डिमेंशिया की बुनियादी समझ
डिमेंशिया एक बीमारी नहीं, बल्कि बीमारियों का समूह है जिसमें मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएँ क्षतिग्रस्त होती हैं, इसलिए याददाश्त, सोच, भाषा और निर्णय धीरे-धीरे बिगड़ते हैं, और अंत में रोज़ का जीवन प्रभावित होता है।
- यह सामान्य बुढ़ापा नहीं है। सामान्य बुढ़ापे में थोड़ी धीमी गति होती है; डिमेंशिया रोज़ के काम रोक देता है।
- यह आलस्य से नहीं होता, और न श्राप या पागलपन है।
- निदान सिर्फ़ डॉक्टर कर सकता है। डिमेंशिया जैसी कुछ समस्याएँ (थायरॉइड, विटामिन B12 की कमी, अवसाद, संक्रमण) ठीक हो सकती हैं, इसलिए हमेशा डॉक्टर को दिखाइए।
मुख्य प्रकार
- अल्ज़ाइमर रोग: सबसे आम; पहले हाल की बातें भूलना।
- रक्तवाहिका डिमेंशिया: मस्तिष्क में रक्त की कमी से, अक्सर स्ट्रोक के बाद; अचानक सीढ़ी की तरह गिरावट।
- लुई बॉडी डिमेंशिया: ऐसी चीज़ें दिखना जो नहीं हैं, काँपते हाथ-पैर, बदलती सतर्कता।
- फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया: व्यवहार और बोली में बदलाव, अक्सर कम उम्र में।
डिमेंशिया के साथ बदलाव और रोज़ का जीवन
डिमेंशिया मन और शरीर को धीरे-धीरे बदलता है:
- याददाश्त: नई बातें भूलना, वही सवाल बार-बार पूछना। पुरानी यादें ज़्यादा देर टिकती हैं।
- समय और जगह: जानी-पहचानी गली में खो जाना, दिन-रात उलझ जाना।
- भाषा: शब्द न मिलना, बात का सिरा खो देना।
- निर्णय: बिल दो बार भरना, मौसम के उलट कपड़े पहनना।
- शरीर: बाद की अवस्थाओं में चलने, निगलने और पेशाब रोकने में कठिनाई।
व्यवहार एक संदेश है
व्यक्ति चिल्ला सकता है, भटक सकता है या मदद से मना कर सकता है। इसे अपने ऊपर मत लीजिए। पूछिए: दर्द है, भूख है, पेशाब की ज़रूरत है, डर है, शोर है, या माहौल उलझाने वाला है?
कैसे मदद करें
- धीरे बोलिए, एक बार में एक बात, आमने-सामने।
- बहस मत कीजिए, न याददाश्त परखिए। उनकी भावना स्वीकार कीजिए।
- दिनचर्या, लेबल, घड़ी और फ़ोटो रखिए।
- घर सुरक्षित रखिए: चूल्हा खुला न रहे, अच्छी रोशनी, दवाइयाँ बंद, पहचान का कंगन।
- जो वे ख़ुद कर सकते हैं, उन्हें करने दीजिए।
- देखभालकर्ता का भी ध्यान रखिए: आराम, काम बाँटना, मदद माँगना।
डिमेंशिया के आसपास की स्थिति
जैसे-जैसे लोग ज़्यादा जीते हैं, डिमेंशिया वाले लोग बढ़ते हैं। बहुतों की देखभाल घर में परिवार करता है। देखभालकर्ता थके और अकेले महसूस कर सकते हैं।
- कलंक: कुछ लोग शर्म से डिमेंशिया छिपाते हैं। तथ्य जानने से डर घटता है।
- जल्दी मदद: जल्दी निदान से योजना, दूसरे कारणों का इलाज और सहारा मिलता है।
- सेवाएँ: डॉक्टर, डे-केयर केंद्र, घर पर आने वाली सेवा, हेल्पलाइन और सामुदायिक समूह।
- डिमेंशिया-अनुकूल समुदाय: दुकानदार, पड़ोसी और बस चालक जो धैर्य रखना और रास्ता बताना जानते हैं।
- अधिकार और गरिमा: जहाँ तक संभव हो, फ़ैसलों में व्यक्ति को शामिल कीजिए।
करके देखिए
करके देखिए: किसी दोस्त से दस शब्द पढ़वाइए और एक मिनट दूसरी बातें करने के बाद गिनिए कि कितने याद हैं। कुछ भूलना सामान्य है। डिमेंशिया में व्यक्ति भूल जाता है कि उसे कुछ बताया गया था। फिर बहस की जगह एक छोटा, शांत वाक्य कहने का अभ्यास कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- डिमेंशिया = मस्तिष्क कोशिकाओं की क्षति; सामान्य बुढ़ापा नहीं
- चार प्रकार: अल्ज़ाइमर, रक्तवाहिका, लुई बॉडी, फ्रंटोटेम्पोरल
- संकेत: याददाश्त, समय-जगह, शब्द, निर्णय
- व्यवहार = ज़रूरत का संदेश
- देखभाल = शांत, सरल, स्नेहपूर्ण
हल किए गए उदाहरण
1. एक बुज़ुर्ग महिला कहती हैं कि उन्हें अपनी माँ के पास घर जाना है, जबकि वे अपने घर में हैं। आप क्या करेंगे?
बहस मत कीजिए और यह मत कहिए कि माँ नहीं हैं। उन्हें असुरक्षित लग रहा है। प्यार से कहिए: "आपको माँ की याद आ रही है। उनके बारे में बताइए।" चाय और कोई जाना-पहचाना गीत दीजिए। तथ्य उलझे हों तब भी भावना सच्ची है।
2. एक पुरुष घंटे में पाँच बार पूछते हैं "आज कौन-सा दिन है?" क्यों, और क्या मदद करेगा?
वे जवाब को नई याद में रख नहीं पाते। यह जानबूझकर नहीं है। हर बार शांति से जवाब दीजिए, और बड़ा साफ़ कैलेंडर व घड़ी नज़र के सामने रखिए।
3. सामान्य भूलने और डिमेंशिया की तुलना कीजिए।
सामान्य: नाम भूलते हैं पर बाद में याद आ जाता है; रोज़ के काम चल जाते हैं। डिमेंशिया: हाल की घटनाएँ पूरी तरह भूलना, जानी-पहचानी जगह में खोना, काम न सँभाल पाना और इसका एहसास न होना। संकेत दिखें तो डॉक्टर को दिखाइए।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि डिमेंशिया बस बुढ़ापा है और डॉक्टर को न दिखाना।
- बहस करना, सुधारना या व्यक्ति को परखना।
- चिल्लाने को बुरा व्यवहार मानना, दर्द या डर न खोजना।
- व्यक्ति के सारे काम ख़ुद कर देना और उसके बचे हुए कौशल छीन लेना।