सुपोषण (यूट्रोफिकेशन) क्या है?
सुपोषण (eutrophication) का मतलब है "ज़रूरत से ज़्यादा खिलाया हुआ"। किसी झील, तालाब, नदी या समुद्र में उसकी क्षमता से ज़्यादा पोषक तत्त्व पहुँच जाते हैं। मुख्य दो पोषक तत्त्व हैं नाइट्रोजन (नाइट्रेट) और फ़ॉस्फ़ोरस (फ़ॉस्फ़ेट)।
शैवाल और जलीय पौधों को बढ़ने के लिए ये चाहिए। स्वस्थ तालाब में ये कम होते हैं, इसलिए बढ़त संतुलित रहती है। ज़्यादा हो जाएँ तो शैवाल बेकाबू बढ़ते हैं। मोटी हरी परत को शैवाल प्रस्फुटन (algal bloom) कहते हैं।
हज़ारों सालों में यह धीरे-धीरे अपने आप भी हो सकता है (प्राकृतिक)। पर आज की ज़्यादातर समस्या तेज़ है और इंसानों की वजह से है (मानव-जनित सुपोषण)।
अतिरिक्त पोषक तत्त्व कहाँ से आते हैं?
- खेतों की रासायनिक खाद, जो बारिश में बहकर आती है (अपवाह, runoff)।
- घरों और शहरों का सीवेज, जिसका ठीक से उपचार नहीं होता।
- फ़ॉस्फ़ेट वाले डिटर्जेंट।
- डेयरी और पोल्ट्री फ़ार्म का पशु-अपशिष्ट।
- कारख़ाने और खाद्य-प्रसंस्करण इकाइयों का गंदा पानी।
कुछ स्रोत एक पाइप से आते हैं (बिंदु स्रोत, जैसे सीवर का नाला)। कुछ बहुत बड़े क्षेत्र से आते हैं (अबिंदु स्रोत, जैसे कई खेतों से बहता बारिश का पानी)। अबिंदु स्रोत को रोकना कठिन है।
घटनाओं की कड़ी
- पानी में पोषक तत्त्व आते हैं।
- शैवाल तेज़ी से बढ़कर सतह पर प्रस्फुटन बनाते हैं।
- परत धूप रोकती है। नीचे के पौधे प्रकाश-संश्लेषण नहीं कर पाते और मर जाते हैं।
- मरे शैवाल और पौधे नीचे बैठते हैं। बैक्टीरिया उन्हें सड़ाते हैं और बहुत सारी घुली ऑक्सीजन इस्तेमाल करते हैं।
- ऑक्सीजन बहुत कम (हाइपोक्सिया) हो जाती है। मछलियाँ, केकड़े और दूसरे जीव मर जाते हैं। पानी से बदबू आती है।
कचरा सड़ाने के लिए सूक्ष्मजीवों को जितनी ऑक्सीजन चाहिए, उसे BOD (जैव रासायनिक ऑक्सीजन माँग) कहते हैं। BOD ज़्यादा हो तो पानी बहुत प्रदूषित है।
यह हानिकारक क्यों है?
- मछलियों की मौत और जलीय जीवन (जैव-विविधता) का नुक़सान।
- कुछ प्रस्फुटन (नीले-हरे शैवाल, यानी सायनोबैक्टीरिया) विष बनाते हैं, जो जानवरों और इंसानों को नुक़सान पहुँचा सकते हैं।
- पीने का पानी साफ़ करना महँगा हो जाता है और उसमें स्वाद व गंध बिगड़ सकती है।
- मछली पकड़ना, पर्यटन और नौका-विहार पर असर पड़ता है।
- जहाँ नदियाँ समुद्र से मिलती हैं, वहाँ बड़े मृत क्षेत्र बन सकते हैं।
जल की गुणवत्ता कैसे नापते हैं?
कुछ आसान जाँचें बताती हैं कि तालाब मुसीबत में है या नहीं:
- घुली ऑक्सीजन (DO): स्वस्थ पानी में आम तौर पर 5 mg प्रति लीटर से ज़्यादा होती है। 2 mg प्रति लीटर से कम हो तो उसे हाइपोक्सिक (बहुत कम) कहते हैं।
- नाइट्रेट और फ़ॉस्फ़ेट की मात्रा (टेस्ट किट से)।
- क्लोरोफ़िल: शैवाल का हरा रंग। ज़्यादा क्लोरोफ़िल यानी ज़्यादा शैवाल।
- गंदलापन या सेकी डिस्क की गहराई: आप कितनी गहराई तक देख पाते हैं। प्रस्फुटन में बहुत कम दिखता है।
- BOD और pH।
इसे कैसे रोकें और ठीक करें?
- खाद सही मात्रा में और सही समय पर डालें। तेज़ बारिश से पहले न डालें।
- खेत और पानी के बीच घास, झाड़ियों और पेड़ों की पट्टी (बफ़र स्ट्रिप) रखें। यह पोषक तत्त्व रोक लेती है।
- सीवेज का उपचार करें ताकि नदी में जाने से पहले नाइट्रोजन और फ़ॉस्फ़ोरस निकल जाएँ।
- फ़ॉस्फ़ेट-रहित डिटर्जेंट इस्तेमाल करें।
- आर्द्रभूमि (wetland) बनाएँ। उनके पौधे पोषक तत्त्व सोख लेते हैं।
- झील सुधारने के लिए शैवाल और खरपतवार हटाएँ, पानी में हवा (वातन) डालें और नए पोषक तत्त्व आना बंद करें। स्रोत रोकना हमेशा पहला काम है।
करके देखिए: घर पर शैवाल प्रस्फुटन उगाइए (सुरक्षित तरीक़ा)
दो साफ़ जार लीजिए। दोनों में तालाब या बारिश का पानी भरिए (पीने के लिए नहीं)। सिर्फ़ जार B में पौधों की खाद की एक चुटकी डालिए। दोनों को धूप वाली खिड़की पर रखिए। 10 से 14 दिन रोज़ देखिए। जार B पहले हरा होगा। यह छोटे पैमाने का प्रस्फुटन है। बाद में हाथ धो लीजिए और पानी नाली में नहीं, मिट्टी में डालिए। फिर ऊपर के 3D में पोषक तत्त्व का स्लाइडर चलाकर तुलना कीजिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पोषक तत्त्व (N, P) ↑ → शैवाल ↑ → प्रकाश ↓ → मृत पदार्थ ↑ → ऑक्सीजन ↓
- सीमाकारी पोषक तत्त्व: ज़्यादातर मीठे पानी में फ़ॉस्फ़ोरस, ज़्यादातर समुद्री पानी में नाइट्रोजन
- स्वस्थ घुली ऑक्सीजन: 5 mg/L से ज़्यादा; हाइपोक्सिक: 2 mg/L से कम
- BOD = कचरा सड़ाने में सूक्ष्मजीवों को चाहिए ऑक्सीजन (BOD ज़्यादा = ज़्यादा प्रदूषण)
- अपवाह की मात्रा = डाली गई मात्रा × बहकर जाने वाला अंश
हल किए गए उदाहरण
1. साफ़ तालाब के मृत क्षेत्र बनने के चरण क्रम से लिखिए।
पोषक तत्त्व आए → शैवाल प्रस्फुटन → धूप रुकी → पौधे और शैवाल मरकर नीचे बैठे → बैक्टीरिया ने सड़ाया और ऑक्सीजन ख़त्म की → मछलियाँ मरीं।
2. किसान तालाब के पास वाले खेत में 120 kg खाद डालता है। उसका 25% बहकर तालाब में चला जाता है। तालाब में कितनी खाद पहुँची?
120 का 25% = 0.25 × 120 = 30 kg तालाब में पहुँची।
3. तालाब में घुली ऑक्सीजन 8 mg/L है। प्रस्फुटन के मरने के बाद यह 75% घट जाती है। नया मान क्या होगा? क्या मछलियों के लिए सुरक्षित है?
8 का 75% = 6, इसलिए 8 − 6 = 2 mg/L। यह हाइपोक्सिक (बहुत कम) है। ज़्यादातर मछलियाँ इसमें जी नहीं पातीं।
4. प्रस्फुटन में नीचे के पौधे पानी में होते हुए भी क्यों मर जाते हैं?
ऊपर की हरी परत धूप रोक देती है। पौधों को प्रकाश-संश्लेषण के लिए रोशनी चाहिए। रोशनी नहीं मिली तो भोजन नहीं बनता और वे मर जाते हैं।
5. खेत और नाले के बीच घास की पट्टी क्यों उपयोगी है?
खेत का पानी पहले घास से गुज़रता है। जड़ें और पौधे नाइट्रोजन व फ़ॉस्फ़ोरस सोख लेते हैं और मिट्टी के कण बैठ जाते हैं। इसलिए नाले तक कम पोषक तत्त्व पहुँचते हैं।
6. झील में फ़ॉस्फ़ोरस 0.05 mg/L है। कुछ वर्षों में यह तीन बार दोगुना होता है। अंतिम मान क्या होगा?
तीन बार दोगुना यानी × 2 × 2 × 2 = × 8। 0.05 × 8 = 0.4 mg/L।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि शैवाल सीधे मछलियों को मारते हैं। ज़्यादातर मौत शैवाल के मरने और सड़ने के बाद ऑक्सीजन घटने से होती है।
- यह सोचना कि शैवाल प्रकाश-संश्लेषण करते हैं तो प्रस्फुटन से ऑक्सीजन बढ़ेगी। दिन में थोड़ी बढ़ती है, पर रात और सड़ने में उससे कहीं ज़्यादा ख़र्च होती है।
- सिर्फ़ खेतों को दोष देना। सीवेज, डिटर्जेंट और कारख़ाने भी पोषक तत्त्व जोड़ते हैं।
- यह मानना कि पानी गंदा दिखेगा। प्रस्फुटन चमकीला हरा और "सुंदर" भी दिख सकता है, पर पानी मुसीबत में होता है।