मिट्टी सिर्फ धूल नहीं है (दोकुचाएव)
मिट्टी चट्टान के छोटे कणों, हवा, पानी, मृत पौधों-जानवरों के अवशेष (ह्यूमस) और केंचुए, बैक्टीरिया, कवक जैसे जीवों से बनी है। ह्यूमस वाली गहरी ऊपरी परत में ज़्यादातर जड़ें फैलती हैं।
रूस के वैज्ञानिक वासिली दोकुचाएव (लगभग 1880) ने खेतों में मिट्टी का अध्ययन करके दिखाया कि मिट्टी अपने आप में एक प्राकृतिक पिंड है, सिर्फ कुचली हुई चट्टान नहीं। यह धीरे-धीरे पाँच कारकों से बनती है: मूल चट्टान, जलवायु, जीव, भूमि की बनावट और समय। उन्होंने यह भी दिखाया कि मिट्टी में परतें (संस्तर) होती हैं और अलग क्षेत्रों में अलग प्रकार की मिट्टी होती है। मैदानों की काली, ह्यूमस से भरपूर मिट्टी (चेर्नोज़ेम) इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
अच्छी मिट्टी स्पंज की तरह पानी रोकती है, हवा आने देती है और जड़ों के लिए खनिज जमा रखती है।
जड़ के क्षेत्र
जवान जड़ के पाँच क्षेत्र होते हैं। नोक से ऊपर की ओर:
- जड़-टोपी: कोशिकाओं की छोटी टोपी जो मिट्टी में धँसते समय नोक की रक्षा करती है।
- विभाजन क्षेत्र: यहाँ कोशिकाएँ लगातार बँटकर नई कोशिकाएँ बनाती हैं।
- दीर्घन क्षेत्र: नई कोशिकाएँ खिंचकर जड़ को लंबा करती हैं।
- मूल-रोम क्षेत्र (अवशोषण क्षेत्र): हज़ारों पतले रोम पानी और खनिज सोखते हैं।
- संवहन क्षेत्र: यहाँ की नलियाँ पानी को तने तक पहुँचाती हैं। पार्श्व जड़ें यहीं से निकलती हैं।
रोम कुछ ही दिन जीते हैं। जड़ बढ़ती है तो नोक के पास नए रोम बनते रहते हैं।
जड़ें पानी कैसे सोखती हैं: मूल-रोम और मूल दाब
हर मूल-रोम एक लंबी कोशिका है। इसकी सतह बहुत बड़ी होती है और यह मिट्टी के कणों के बीच घुस जाती है। मिट्टी के पानी में खनिज कम होते हैं। रोम की कोशिका का रस गाढ़ा होता है। इसलिए पानी अपने आप रोम में चला जाता है, जैसे पानी चीनी के घोल की ओर जाता है। खनिज पौधे की ऊर्जा लगाकर अंदर खींचे जाते हैं।
रोम से पानी और खनिज जड़ के आर-पार जाकर नलियों (जाइलम) में पहुँचते हैं और ऊपर चढ़ते हैं। जड़ पानी को थोड़ा धकेलती भी है। यह धक्का मूल दाब है। इसे देखा जा सकता है: जवान पौधे को मिट्टी के ठीक ऊपर काटो तो ठूँठ से रस टपकता है। रात में जब पत्तियाँ पानी नहीं खींचतीं, तब पत्तियों की नोक पर बूँदें निकल सकती हैं (बिन्दुस्राव)। ऊँचे पेड़ों में ऊपर खींचने का मुख्य बल पत्तियों से पानी उड़ने से आता है, फिर भी मूल दाब मदद करता है।
खनिज पोषण: वृहत् तत्व और सूक्ष्म तत्व
पौधे हवा और पानी से शर्करा बनाते हैं, पर खनिज उन्हें मिट्टी से लेने पड़ते हैं। तत्व दो समूहों में बँटे हैं।
- वृहत् तत्व, ज़्यादा मात्रा में चाहिए: नाइट्रोजन (N), फॉस्फोरस (P), पोटैशियम (K), साथ ही कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर।
- सूक्ष्म तत्व, बहुत कम मात्रा में चाहिए: लोहा (Fe), जिंक (Zn), मैंगनीज़ (Mn), ताँबा, बोरॉन आदि।
| तत्व | किसमें मदद | कमी हो तो |
|---|---|---|
| नाइट्रोजन | हरी पत्तियाँ, वृद्धि | पत्तियाँ पीली, पौधा छोटा |
| फॉस्फोरस | जड़ें, फूल, बीज | कमज़ोर जड़ें, बैंगनी पत्तियाँ |
| पोटैशियम | मज़बूत तना, फल | कमज़ोर तना, पत्तियों के किनारे भूरे |
| लोहा | क्लोरोफिल बनाना | नई पत्तियाँ पीली |
उर्वरक: मिट्टी को खिलाना
फसल काटने पर खनिज उसके साथ खेत से चले जाते हैं। उर्वरक उन्हें वापस डालते हैं।
- जैविक उर्वरक (कम्पोस्ट, गोबर की खाद, हरी खाद) जीवों से बनते हैं। ये खनिज धीरे-धीरे छोड़ते हैं और ह्यूमस बढ़ाते हैं।
- खनिज (रासायनिक) उर्वरक, जैसे यूरिया या NPK मिश्रण, तेज़ और ताकतवर होते हैं।
सही मात्रा और सही समय का ध्यान रखो। बहुत ज़्यादा उर्वरक से मिट्टी का पानी जड़ के रस से ज़्यादा गाढ़ा हो जाता है, इसलिए पानी जड़ों से बाहर निकलने लगता है। पौधा जल जाता है। फालतू उर्वरक बहकर नदियों में पहुँचकर जलजीवों को भी नुकसान करता है।
करके देखो: सेम का बीज और खाद की परीक्षा
1. सेम का बीज गीली रुई पर गिलास में रखो। जड़ 3 सेमी की हो जाए तो उस पर 5 मिमी की दूरी पर स्याही के बिंदु लगाओ। दो दिन बाद देखो कि किन बिंदुओं के बीच दूरी बढ़ी: वही दीर्घन क्षेत्र है। आवर्धक लेंस से रोएँदार मूल-रोम क्षेत्र भी देखो।
2. 3D में आखिरी चरण पर जाओ। 10, 50 और 90 पर पत्तियों का रंग पहले अंदाज़े से बताओ, फिर जाँचो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- जड़ के क्षेत्र (नोक से ऊपर): टोपी, विभाजन, दीर्घन, मूल-रोम, संवहन
- वृहत् तत्व (ज़्यादा मात्रा): N, P, K, Ca, Mg, S
- सूक्ष्म तत्व (बहुत कम मात्रा): Fe, Zn, Mn, Cu, B आदि
- रोम में पानी: कमज़ोर मिट्टी का पानी → गाढ़ा कोशिका रस
- मिट्टी के कारक (दोकुचाएव): चट्टान, जलवायु, जीव, भूमि की बनावट, समय
हल किए गए उदाहरण
1. सेम की जड़ पर नोक के पास 20 मिमी में 5 मिमी की दूरी पर बिंदु लगाए। दो दिन बाद नोक के सबसे पास के बिंदुओं के बीच 12 मिमी दूरी है, ऊपर वाले अब भी 5 मिमी पर हैं। कौन सा क्षेत्र बढ़ रहा है?
जहाँ बिंदु दूर हुए वह दीर्घन क्षेत्र है, जो नोक के पास विभाजन क्षेत्र के ठीक पीछे होता है।
2. किसान के गेहूँ की पत्तियाँ हल्की पीली और छोटी हैं। कौन सा वृहत् तत्व कम होने की संभावना है और वह क्या डाले?
सबसे संभावित कमी नाइट्रोजन की है। वह कम्पोस्ट, गोबर की खाद या यूरिया जैसा नाइट्रोजन उर्वरक डाल सकता है।
3. मिट्टी गीली है, फिर भी भारी खाद डालने के बाद पौधा क्यों मुरझा गया?
मिट्टी का पानी मूल-रोम के रस से ज़्यादा गाढ़ा हो गया, इसलिए पानी जड़ों से बाहर जाने लगा। पौधे को पानी नहीं मिला और वह मुरझा गया।
4. गमले की मिट्टी में N और K पर्याप्त हैं, पर नई पत्तियाँ पीली हैं और नसें हरी। किस समूह का तत्व कम हो सकता है?
लोहे जैसा कोई सूक्ष्म तत्व। थोड़ी मात्रा भी ज़रूरी है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि जड़ें सिर्फ पौधे को थामती हैं। वे पानी और खनिज भी सोखती हैं।
- क्षेत्रों का क्रम उलझाना। नोक से: टोपी, विभाजन, दीर्घन, मूल-रोम, संवहन।
- सोचना कि ज़्यादा खाद का मतलब हमेशा ज़्यादा वृद्धि है। बहुत ज़्यादा खाद जड़ें जला देती है।
- यह मानना कि सूक्ष्म तत्व मात्रा कम होने से ज़रूरी नहीं। इनके बिना पौधे बीमार पड़ते हैं।