पाचन: बड़े अणु से छोटे अणु
पाचन असल में जल-अपघटन (hydrolysis) है: पानी लेकर मोनोमरों के बीच के बंध तोड़े जाते हैं। हर भोजन-समूह के अपने एंज़ाइम हैं।
कार्बोहाइड्रेट
- एमाइलेज़ (लार ग्रंथियाँ और अग्न्याशय) स्टार्च के ग्लाइकोसिडिक बंध तोड़कर माल्टोज़ बनाता है।
- झिल्ली से जुड़े डाइसैकेराइडेज़ इलियम कोशिकाओं के सूक्ष्मांकुरों (microvilli) पर होते हैं: माल्टेज़ माल्टोज़ → ग्लूकोज़, सुक्रेज़ सुक्रोज़ → ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़, लैक्टेज़ लैक्टोज़ → ग्लूकोज़ + गैलेक्टोज़।
प्रोटीन
- एंडोपेप्टिडेज़ चेन के अंदर पेप्टाइड बंध तोड़ते हैं, जिससे कई छोटे टुकड़े (और ज़्यादा सिरे) बनते हैं।
- एक्सोपेप्टिडेज़ चेन के सिरों से एक-एक अमीनो अम्ल हटाते हैं।
- झिल्ली से जुड़े डाइपेप्टिडेज़ डाइपेप्टाइड को दो अमीनो अम्लों में तोड़ते हैं।
लिपिड
- लाइपेज़ (अग्न्याशय) ट्राइग्लिसराइड के एस्टर बंध तोड़कर मोनोग्लिसराइड और वसा अम्ल बनाता है।
- पित्त लवण (यकृत से) वसा का इमल्सीकरण करते हैं: एक बड़ी बूँद कई छोटी बूँदें बन जाती है, लाइपेज़ के लिए सतह बहुत बढ़ जाती है। पित्त लवण एंज़ाइम नहीं हैं।
ग्लूकोज़ और अमीनो अम्ल का अवशोषण: सह-परिवहन
अवशोषण मुख्य रूप से इलियम में होता है। अंकुर (villi) और सूक्ष्मांकुर बहुत बड़ी सतह देते हैं, दीवार एक कोशिका मोटी है और रक्त-प्रवाह ढलान बनाए रखता है।
- कोशिका के रक्त वाले तरफ़ सोडियम–पोटैशियम पंप ATP लेकर Na⁺ को कोशिका से रक्त में भेजता है। इससे कोशिका के अंदर Na⁺ कम रहता है।
- अब Na⁺ लुमेन से कोशिका में एक सह-परिवाहक प्रोटीन (co-transporter) से विसरित होता है। यह प्रोटीन तभी चलता है जब Na⁺ के साथ एक ग्लूकोज़ (या अमीनो अम्ल) भी जाए।
- कोशिका में ग्लूकोज़ बढ़ता है और सुगम विसरण से रक्त में चला जाता है।
यह अप्रत्यक्ष सक्रिय परिवहन है: ATP पंप खर्च करता है, सह-परिवाहक नहीं। अमीनो अम्ल भी अपने सह-परिवाहकों से इसी तरह आते हैं।
मिसेल और लिपिड का अवशोषण
मिसेल पित्त लवणों से बनी छोटी गेंदें हैं, जिनके अंदर मोनोग्लिसराइड और वसा अम्ल रहते हैं। ये पानी से दूर भागने वाले अणुओं को पानी-भरे लुमेन में कोशिका की सतह तक ले जाते हैं।
- मिसेल सूक्ष्मांकुरों तक पहुँचकर मोनोग्लिसराइड और वसा अम्ल छोड़ते हैं।
- ये वसा में घुलनशील हैं, इसलिए फ़ॉस्फ़ोलिपिड परत से सीधे विसरित हो जाते हैं।
- कोशिका के अंदर चिकनी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (smooth ER) में ये फिर ट्राइग्लिसराइड बनते हैं।
- गॉल्जी उपकरण इन्हें कोलेस्ट्रॉल और प्रोटीन के साथ काइलोमाइक्रॉन में पैक करता है।
- काइलोमाइक्रॉन बहिःकोशिकता (exocytosis) से निकलकर अंकुर की लसीका नली लैक्टियल में जाते हैं, बाद में रक्त में पहुँचते हैं।
परीक्षा के लिए ज़रूरी बातें
आम प्रश्न: एंज़ाइम, बंध और उत्पाद का नाम; एंडोपेप्टिडेज़ एक्सोपेप्टिडेज़ को तेज़ क्यों करता है; सह-परिवहन के चरण; मिसेल की भूमिका; लिपिड का लुमेन से लैक्टियल तक का रास्ता। उत्तर में हमेशा बंध (ग्लाइकोसिडिक, पेप्टाइड, एस्टर), स्थान (लुमेन या झिल्ली) और उत्पाद लिखिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्टार्च + पानी —एमाइलेज़→ माल्टोज़
- माल्टोज़ + पानी —माल्टेज़→ ग्लूकोज़ + ग्लूकोज़
- सुक्रोज़ —सुक्रेज़→ ग्लूकोज़ + फ्रक्टोज़; लैक्टोज़ —लैक्टेज़→ ग्लूकोज़ + गैलेक्टोज़
- प्रोटीन —एंडोपेप्टिडेज़→ पॉलीपेप्टाइड —एक्सोपेप्टिडेज़→ अमीनो अम्ल + डाइपेप्टाइड —डाइपेप्टिडेज़→ अमीनो अम्ल
- ट्राइग्लिसराइड + पानी —लाइपेज़→ मोनोग्लिसराइड + 2 वसा अम्ल
- मुख्य शब्द: जल-अपघटन, इमल्सीकरण, मिसेल, सह-परिवहन, काइलोमाइक्रॉन, लैक्टियल
हल किए गए उदाहरण
1. एक प्रोटीन चेन में 60 अमीनो अम्ल हैं। समझाइए कि पहले एंडोपेप्टिडेज़ डालने से एक्सोपेप्टिडेज़ तेज़ क्यों काम करता है।
एक्सोपेप्टिडेज़ सिर्फ़ सिरों पर काम करता है। एक चेन के 2 सिरे होते हैं। एंडोपेप्टिडेज़ 5 जगह काटे तो 6 चेन और 12 सिरे बनते हैं। ज़्यादा सिरे = एक साथ ज़्यादा जगह काम, इसलिए अमीनो अम्ल तेज़ी से निकलते हैं।
2. एक दवा इलियम कोशिकाओं का Na⁺–K⁺ पंप रोक देती है। ग्लूकोज़ अवशोषण क्यों घटेगा?
पंप कोशिका में Na⁺ कम रखता है। पंप रुका तो अंदर Na⁺ बढ़ेगा और लुमेन से कोशिका की ओर Na⁺ की ढलान ख़त्म हो जाएगी। सह-परिवाहक ग्लूकोज़ तभी ले जाता है जब Na⁺ ढलान पर नीचे चले, इसलिए ग्लूकोज़ अंदर नहीं आएगा।
3. एक वसा अम्ल का लुमेन से लसीका तक का रास्ता लिखिए।
लाइपेज़ उसे ट्राइग्लिसराइड से अलग करता है → पित्त लवण के साथ मिसेल में जाता है → मिसेल उसे सूक्ष्मांकुर तक ले जाता है → झिल्ली से विसरित होता है → smooth ER में फिर ट्राइग्लिसराइड बनता है → गॉल्जी काइलोमाइक्रॉन बनाता है → बहिःकोशिकता → लैक्टियल।
4. 10 µm त्रिज्या की वसा बूँद 1 µm त्रिज्या की बूँदों में टूटती है। कुल सतह कितने गुना बढ़ेगी?
आयतन वही रहता है। छोटी बूँदें = (10/1)³ = 1000। बड़ी का क्षेत्रफल = 4π(10)² = 400π। छोटी कुल = 1000 × 4π(1)² = 4000π। सतह 10 गुना। ज़्यादा सतह = लाइपेज़ का तेज़ काम।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि पित्त लवण वसा पचाते हैं। वे सिर्फ़ इमल्सीकरण करते हैं; जल-अपघटन लाइपेज़ करता है।
- यह कहना कि सह-परिवाहक ATP लेता है। ATP रक्त-तरफ़ का Na⁺–K⁺ पंप लेता है; सह-परिवहन अप्रत्यक्ष है।
- एंडो- और एक्सोपेप्टिडेज़ में उलझना। एंडो = चेन के अंदर; एक्सो = सिरों पर।
- यह कहना कि लिपिड सीधे रक्त केशिका में जाते हैं। वे काइलोमाइक्रॉन बनकर लैक्टियल (लसीका) में जाते हैं।