चयापचय: उपचय और अपचय
चयापचय (metabolism) जीवित कोशिका के भीतर की सारी रासायनिक क्रियाओं का समूह है। इसके दो पहलू हैं।
- उपचय (anabolism, स्वांगीकरण): छोटे अणु जुड़कर बड़े अणु बनाते हैं, जैसे ऐमीनो अम्ल से प्रोटीन या शर्कराओं से मंड। इसमें ऊर्जा लगती है।
- अपचय (catabolism, विघटन): बड़े अणु टूटकर छोटे बनते हैं, जैसे ग्लूकोज़ से CO2 और पानी। इसमें ऊर्जा निकलती है।
अपचय की ऊर्जा एक छोटे अणु ATP (कोशिका का ऊर्जा-सिक्का) में जमा होती है। उपचय ATP ख़र्च करता है। दोनों पहलू हर समय चलते हैं, और एंज़ाइम हर क्रिया को तेज़ करते हैं।
स्वपोषी, परपोषी और मिश्रपोषी
जीवों को इस आधार पर बाँटा जाता है कि वे भोजन कैसे पाते हैं।
- स्वपोषी (autotroph, "स्वयं खाने वाले") CO2 और पानी जैसी सरल चीज़ों से भोजन बनाते हैं। पौधे, शैवाल और कुछ बैक्टीरिया स्वपोषी हैं।
- परपोषी (heterotroph, "दूसरे से खाने वाले") अपना भोजन नहीं बना सकते, दूसरे जीवों या उनके अवशेषों को खाते हैं। जंतु, कवक और ज़्यादातर बैक्टीरिया परपोषी हैं।
- मिश्रपोषी (mixotroph) दोनों कर सकते हैं। यूग्लीना, तालाब का नन्हा जीव, प्रकाश में भोजन बनाता है और अंधेरे में सोख लेता है। कुछ मांसाहारी पौधे, जैसे सनड्यू, प्रकाश-संश्लेषण भी करते हैं और खनिजों के लिए कीट भी पकड़ते हैं।
प्रकाश-संश्लेषण और रसायन-संश्लेषण
दोनों क्रियाएँ CO2 से शर्करा बनाती हैं, पर ऊर्जा का स्रोत अलग है।
प्रकाश-संश्लेषण
पौधे, शैवाल और कुछ बैक्टीरिया हरितलवकों में हरे क्लोरोफ़िल से पकड़ी प्रकाश ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं:
CO2 + पानी + प्रकाश → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन
यह लगभग हर खाद्य-शृंखला को भोजन देता है और हवा में ऑक्सीजन देता है।
रसायन-संश्लेषण
कुछ बैक्टीरिया हाइड्रोजन सल्फ़ाइड, अमोनिया या लोहे के यौगिकों जैसी सरल चीज़ों के ऑक्सीकरण से मिली रासायनिक ऊर्जा इस्तेमाल करते हैं। प्रकाश नहीं चाहिए। वे गहरे सागर के छिद्रों के पास, मिट्टी और गुफाओं में रहते हैं। मिट्टी के नाइट्रीकारी बैक्टीरिया रसायन-संश्लेषी हैं: वे पौधों को नाइट्रोजन पाने में मदद करते हैं।
झटपट तुलना: प्रकाश-संश्लेषण = प्रकाश ऊर्जा; रसायन-संश्लेषण = रासायनिक ऊर्जा।
ऊर्जा-चयापचय के चरण
जब कोशिका ऊर्जा पाने के लिए ग्लूकोज़ तोड़ती है, तो यह तीन चरणों में होता है।
- तैयारी वाला चरण: बड़े भोजन-अणु (मंड, वसा, प्रोटीन) छोटे अणुओं (ग्लूकोज़, वसा-अम्ल, ऐमीनो अम्ल) में कटते हैं, ज़्यादातर आँत में या पाचन-कोष्ठों में। लगभग सारी ऊर्जा ऊष्मा के रूप में चली जाती है। ATP नहीं बनता।
- ग्लाइकोलिसिस (अवायुवीय): कोशिका-द्रव्य में एक ग्लूकोज़ (6 कार्बन परमाणु) दो छोटे टुकड़ों (पाइरूवेट, हर एक में 3 कार्बन) में बँटता है। इससे 2 ATP बनते हैं और ऑक्सीजन नहीं चाहिए।
- ऑक्सीजन वाला (वायुवीय) चरण: माइटोकॉन्ड्रिया में टुकड़े पूरी तरह CO2 और पानी में टूटते हैं, और लगभग 28 ATP और बनते हैं।
ऑक्सीजन के साथ कुल: प्रति ग्लूकोज़ लगभग 30 ATP। (कुछ किताबें 36 या 38 कहती हैं; नए मापों में लगभग 30 से 32 मिलता है। अपने शिक्षक की संख्या देख लें।)
समीकरण: ग्लूकोज़ + 6 O2 → 6 CO2 + 6 पानी + ऊर्जा (ATP)।
अवायुवीय और वायुवीय टूटना
वायुवीय (aerobic) यानी ऑक्सीजन के साथ; अवायुवीय (anaerobic) यानी ऑक्सीजन के बिना।
- वायुवीय: तीनों चरण चलते हैं। ग्लूकोज़ → CO2 + पानी। लगभग 30 ATP।
- अवायुवीय (किण्वन): सिर्फ़ ग्लाइकोलिसिस और एक और क़दम। प्रति ग्लूकोज़ लगभग 2 ATP।
- लैक्टिक अम्ल किण्वन: ग्लूकोज़ → लैक्टिक अम्ल। थकी पेशियों और दही के बैक्टीरिया में।
- अल्कोहली किण्वन: ग्लूकोज़ → अल्कोहल + CO2। यीस्ट में, डबलरोटी तथा शराब और बीयर बनाने में।
अवायुवीय बहुत कम कुशल है: 30 के मुक़ाबले करीब 2 ATP। इसलिए जटिल जंतु ऑक्सीजन पर निर्भर हैं, जबकि कुछ बैक्टीरिया और यीस्ट उसके बिना जी सकते हैं।
खुद करके देखें: फूलने वाला गुब्बारा
करके देखिए (किसी बड़े के साथ)। एक छोटी बोतल में आधा चम्मच सूखा यीस्ट, एक चम्मच चीनी और गुनगुना पानी डालिए। गर्दन पर गुब्बारा चढ़ाइए। 30 मिनट इंतज़ार कीजिए।
- गुब्बारे का क्या होता है? (अल्कोहली किण्वन की CO2 से फूलता है।)
- दूसरी बोतल बिना चीनी की बनाइए। क्या गुब्बारा फूलता है? क्यों नहीं?
- 1 मिनट एक जगह दौड़िए। अपनी पेशियाँ और साँस महसूस कीजिए। उन्होंने कौन-सा रास्ता इस्तेमाल किया?
3D में पहले पूरी ऑक्सीजन में 3 ग्लूकोज़ का ATP अनुमान लगाइए (3 x 30 = 90), फिर स्लाइडर चलाकर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- प्रकाश-संश्लेषण: CO2 + पानी + प्रकाश → ग्लूकोज़ + ऑक्सीजन
- वायुवीय: ग्लूकोज़ + 6 O2 → 6 CO2 + 6 H2O + ऊर्जा (लगभग 30 ATP)
- अवायुवीय: ग्लूकोज़ → लैक्टिक अम्ल (या अल्कोहल + CO2) + 2 ATP
- चरण: 1 तैयारी (ATP नहीं), 2 ग्लाइकोलिसिस (+2 ATP), 3 वायुवीय (लगभग +28 ATP)
- स्वपोषी = अपना भोजन बनाए; परपोषी = बना-बनाया खाए; मिश्रपोषी = दोनों
हल किए गए उदाहरण
1. ऑक्सीजन के साथ 4 ग्लूकोज़ अणु कितना ATP बनाते हैं (प्रति ग्लूकोज़ 30 लें)?
4 x 30 = 120 ATP।
2. एक पेशी-कोशिका 10 ग्लूकोज़ अणु बिना ऑक्सीजन के तोड़ती है। वह कितना ATP बनाती है, और ऑक्सीजन के साथ की तुलना में कितना कम?
बिना ऑक्सीजन: 10 x 2 = 20 ATP। ऑक्सीजन के साथ: 10 x 30 = 300 ATP। अंतर = 300 − 20 = 280 ATP कम।
3. वीनस फ़्लाईट्रैप स्वपोषी है, परपोषी या मिश्रपोषी? समझाइए।
मिश्रपोषी। वह हरी पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण से भोजन बनाता है, और कीट भी पकड़ता है, मुख्यतः ग़रीब मिट्टी में कम नाइट्रोजन और खनिज पाने के लिए।
आम गलतियाँ
- सोचना कि पौधे श्वसन नहीं करते। पौधे प्रकाश-संश्लेषण और श्वसन दोनों करते हैं, सभी कोशिकाओं में हर समय।
- श्वसन (कोशिका में ग्लूकोज़ तोड़कर ऊर्जा निकालना) को साँस लेने (हवा अंदर-बाहर करना) से मिला देना।
- कहना कि ऊर्जा 'बनती' है। ऊर्जा एक रूप से दूसरे में बदलती है, यहाँ भोजन से ATP में।
- मानना कि अवायुवीय का मतलब ऊर्जा नहीं। उससे प्रति ग्लूकोज़ 2 ATP मिलता है, वायुवीय से बहुत कम।