Japan 高校(専門学科)1〜3年 Physical Education (specialist)
अध्याय: 8
1. Introduction to Sport
Cultural features and modern development of sport · Effective ways of learning sport · Designing a rich sporting life · Coaching methods, health and safety in sport · Planning and running sport
- खेल और समाज – खेल समाजशास्त्र देखता है कि खेल और समाज एक-दूसरे को कैसे बदलते हैं। शारीरिक गतिविधि खुले खेल-कूद से शुरू होकर शारीरिक मनोरंजन और फिर खेल (स्पोर्ट) तक जाती है, जिसमें तय नियम, संगठन और गंभीर मुकाबला होता है। आधुनिक खेल ढीले-ढाले स्थानीय लोक खेलों से बने: औद्योगिक युग में लिखित नियम, क्लब और शासी निकाय आए, और लगभग 1950 के बाद टीवी, पैसे और यात्रा ने खेल को वैश्विक और पेशेवर बना दिया। आज खेल, मीडिया और प्रायोजक एक "सुनहरे त्रिकोण" में बँधे हैं। हर समूह बराबर नहीं खेलता: पैसा, समय, सुविधा, भेदभाव और रूढ़ियाँ बाधा बनती हैं, इसलिए सरकारें और क्लब महिलाओं, दिव्यांगों, बुज़ुर्गों और कम आय वाले परिवारों की बराबर पहुँच के लिए काम करते हैं। खेल का अँधेरा पक्ष भी है, यानी विचलन, जैसे डोपिंग, हिंसा और मैच फ़िक्सिंग, जिसे नियम, जाँच और क़ानून रोकते हैं। खेल सेहत, पहचान और एकता बना सकता है, पर बाँट भी सकता है।
- खेल सीखने के असरदार तरीके – खेल सीखने के तीन आधार हैं: फ़ीडबैक और आराम के साथ कौशल का अभ्यास, रणनीति की समझ (खेल में चतुर निर्णय), और सुरक्षित खेल: वार्म-अप, सही सामान और अपने शरीर के हिसाब से मेहनत। नियमित खेल हृदय, माँसपेशियों और हड्डियों को मज़बूत करता है और मन को भी हल्का और एकाग्र बनाता है।
- समृद्ध खेल-जीवन की योजना – समृद्ध खेल-जीवन का मतलब है कि जीवन के हर पड़ाव पर खेल का मज़ा उस तरह लेना जो उस उम्र को सूट करे। बच्चों को रोज़ लगभग 60 मिनट खेल चाहिए। किशोर और वयस्क पसंद का खेल चुनकर पढ़ाई-काम के बीच समय निकाल सकते हैं; वयस्कों को हफ़्ते में लगभग 150 मिनट चाहिए। बुज़ुर्गों के लिए चलना, योग और तैराकी जैसे हल्के खेल अच्छे हैं। पार्क, स्कूल, क्लब और कोच मिलकर खेल को सबके लिए आसान बनाते हैं।
2. Sport I
Ways to engage in judged (scored) sports · Ways to engage in measured sports
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3. Sport II
Ways to engage in goal-type ball games · Ways to engage in net-type ball games · Ways to engage in base-type ball games · Ways to engage in target-type ball games
- नेट वाले खेल (Net-Type Games) – नेट वाले खेलों में एक नेट कोर्ट को दो हिस्सों में बाँटता है और हर पक्ष गेंद को नेट के ऊपर से इस तरह भेजता है कि वह विरोधी के कोर्ट के अंदर गिरे और वापस न लौट सके। वॉलीबॉल टीम का उदाहरण है; बैडमिंटन, टेनिस और टेबल टेनिस रैकेट वाले उदाहरण हैं। रैली का क्रम होता है: सर्व, रिसीव, सेट और अटैक। खिलाड़ी अच्छी पोज़िशन में खड़े होकर और बातचीत करके कोर्ट ढकते हैं।
- बेस वाले खेल (बैट-और-बॉल खेल) – बेस वाले खेलों में बल्लेबाज़ गेंद को मैदान में मारकर बेसों के चक्कर लगाता है और क्षेत्ररक्षक टीम धावक के पहुँचने से पहले गेंद को बेस तक पहुँचाने की कोशिश करती है। बेसबॉल, सॉफ्टबॉल और राउंडर्स इसके उदाहरण हैं; क्रिकेट में भी यही बैट-बॉल की सोच है। जीतने के लिए तीन कौशल चाहिए: गेंद को खाली जगह (गैप) में मारना, समझदारी से बेस दौड़ना और तेज़ थ्रो व टीम तालमेल से क्षेत्ररक्षण।
- टारगेट-टाइप खेल (निशाने वाले खेल) – टारगेट-टाइप खेल में आप गेंद, पत्थर या तीर को निशाने की ओर भेजते हैं और इस आधार पर अंक पाते हैं कि वह निशाने के कितना पास रुका। विरोधी को छूना नहीं पड़ता। कौशल निशाना, ताकत और दिशा से आता है। आप खिलाड़ी, रणनीतिकार, स्कोरर, रेफरी, कोच या दर्शक बनकर भाग ले सकते हैं।
4. Sport III
Ways to engage in martial arts · Ways to engage in combat sports of other countries
- पारंपरिक खेल और मार्शल आर्ट – पारंपरिक खेल सरल चीज़ों और पीढ़ी-दर-पीढ़ी चले नियमों से खेले जाते हैं, जैसे लट्टू, कंचे, गिल्ली-डंडा, रस्साकशी, कबड्डी और खो-खो। ये संस्कृति को ज़िंदा रखते हैं और फिटनेस व खेल-भावना बनाते हैं। मार्शल आर्ट और युद्ध-खेल (जूडो, ताइक्वांडो, कराटे, कुश्ती, कलारीपयट्टु, मुक्केबाज़ी) आत्म-नियंत्रण, सम्मान और तकनीक सिखाते हैं। हर युद्ध-खेल की नींव एक जैसी है: सम्मान का नमन, स्थिर स्टांस (गुरुत्व केंद्र चौड़े आधार के ऊपर), सुरक्षित गिरना, साफ नियम और सुरक्षा उपकरण।
5. Sport IV
Ways to engage in creative dance · Ways to engage in traditional dance
- रचनात्मक, लोक और रिदम नृत्य: समूह नृत्य बनाओ – समूह नृत्य में तीन तरह के नृत्य मिलते हैं। रचनात्मक नृत्य किसी विषय (जैसे लहर) को हरकत बनाता है। लोक नृत्य में सब मिलकर आसान पैटर्न, जैसे गोला, बनाते हैं। आधुनिक रिदम नृत्य एक पक्की ताल पर चलता है, जिसे आठ-आठ में गिना जाता है। समूह नृत्य बनाने के लिए विषय चुनो, पैटर्न चुनो, ताल गिनो और भागों को क्रम से जोड़ो।
- लोक नृत्य: आम लोगों का नाच, जापान से दुनिया तक – लोक नृत्य वह नाच है जो आम लोगों ने बनाया और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सिखाया। यह आमतौर पर सब मिलकर, एक स्थिर ताल पर और गोले, दो पंक्तियों या जोड़ियों जैसे सरल नक़्शों में नाचते हैं। कई हरकतें रोज़ के काम की नकल हैं। जापानी लोक नृत्य (मिन्योउ) में बोन ओदोरी और सोरान बुशी हैं। दुनिया में गोले के नाच, पंक्ति के नाच, जोड़ी बदलने वाले मिक्सर और डंडिया जैसे डंडा नृत्य हैं।
6. Sport V
Ways to engage in nature-experience outdoor activities · Ways to engage in competitive outdoor sports
- बाहरी गतिविधियाँ: ओरिएंटियरिंग, चढ़ाई और सुरक्षित रहना – बाहरी और साहसिक गतिविधियाँ, जैसे ओरिएंटियरिंग, ट्रेकिंग, चढ़ाई और पानी के खेल, बदलती प्राकृतिक जगहों पर की जाती हैं। इनमें कौशल (नक्शा पढ़ना, कम्पास चलाना, चढ़ने की तकनीक), सही फ़ैसले (रास्ता चुनना, अपनी सीमा जानना) और सुरक्षा की आदतें (योजना, सामान, टीमवर्क) चाहिए। साथ ही कोई निशान न छोड़कर प्रकृति की रक्षा करनी होती है।
7. Sport VI
Ways to engage in fitness exercise · Exercise to deepen body awareness and interaction · Planning exercise by life stage and lifestyle
- शारीरिक फिटनेस (Physical Fitness) – शारीरिक फिटनेस शरीर की वह क्षमता है जिससे रोज़ का काम, खेल और स्पर्धा ऊर्जा बचाकर की जा सके। इसके पाँच स्वास्थ्य संबंधी घटक (हृदय-श्वसन सहनशक्ति, पेशीय शक्ति, पेशीय सहनशक्ति, लचीलापन, शरीर संरचना) और छह कौशल संबंधी घटक (गति, फुर्ती, विस्फोटक शक्ति, संतुलन, तालमेल, प्रतिक्रिया समय) हैं। इसे FITT (आवृत्ति, तीव्रता, समय, प्रकार) और अधिभार, प्रगति, विशिष्टता, विश्राम, उत्क्रमणीयता जैसे सिद्धांतों वाली योजना से बढ़ाते हैं।
- शरीर को ढीला करने वाले व्यायाम (Body-Relaxation Exercises) – शरीर को ढीला करने वाले व्यायाम आसान हरकतें और धीमी साँस हैं, जिनसे कसी हुई मांसपेशियाँ नरम होती हैं और मन शांत होता है। पहले पहचानो कि तनाव कहाँ है (कंधे, जबड़ा, मुट्ठियाँ), फिर उसे छोड़ो: कंधे उठाओ-छोड़ो, खिंचाव, पेट से साँस (4 गिनती अंदर, 6 बाहर)। साथी के साथ शीशे जैसे खेल से भरोसा और जुड़ाव भी बढ़ता है।
- समृद्ध खेल-जीवन की योजना – समृद्ध खेल-जीवन का मतलब है कि जीवन के हर पड़ाव पर खेल का मज़ा उस तरह लेना जो उस उम्र को सूट करे। बच्चों को रोज़ लगभग 60 मिनट खेल चाहिए। किशोर और वयस्क पसंद का खेल चुनकर पढ़ाई-काम के बीच समय निकाल सकते हैं; वयस्कों को हफ़्ते में लगभग 150 मिनट चाहिए। बुज़ुर्गों के लिए चलना, योग और तैराकी जैसे हल्के खेल अच्छे हैं। पार्क, स्कूल, क्लब और कोच मिलकर खेल को सबके लिए आसान बनाते हैं।
8. Comprehensive Sport Seminar
Research on sport theory and practice · Research on coaching and running sport · Research on social participation through sport
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