National Year 11 Statistics
अध्याय: 2
1. 2. Processing, representing and analysing data (part 2)
2e Scatter diagrams and correlation · 2f Time series · 2g Quality assurance (H) · 2h Estimation
- सहसंबंध: प्रकीर्ण आरेख, कार्ल पियर्सन गुणांक और स्पीयरमैन कोटि सहसंबंध – सहसंबंध बताता है कि दो चर साथ-साथ कैसे बदलते हैं। दोनों साथ बढ़ें तो धनात्मक, एक बढ़े और दूसरा घटे तो ऋणात्मक, और कोई सीधा पैटर्न न हो तो शून्य। प्रकीर्ण आरेख इसे चित्र में दिखाता है। कार्ल पियर्सन का गुणांक r दिशा और ताक़त नापता है और हमेशा −1 से +1 के बीच रहता है। स्पीयरमैन का कोटि सहसंबंध R कोटियों (रैंक) से चलता है और सुंदरता या ईमानदारी जैसे गुणों पर भी काम करता है; समान कोटियों में छोटा सुधार जोड़ते हैं।
- काल श्रेणी: चल माध्य, प्रवृत्ति और मौसमी उतार-चढ़ाव – काल श्रेणी (time series) ऐसे आँकड़े हैं जो बराबर समय के अंतर पर लिखे जाते हैं, जैसे हर तिमाही की बिक्री या हर महीने की बारिश। इसे रेखा-ग्राफ़ पर बनाते हैं: समय x-अक्ष पर। असली आँकड़े मौसम के साथ ऊपर-नीचे होते हैं (मौसमी उतार-चढ़ाव), कई सालों की लंबी लहरों में (चक्रीय उतार-चढ़ाव) और थोड़े बेतरतीब ढंग से भी। लंबी दिशा (प्रवृत्ति) देखने के लिए हम चल माध्य (moving average) निकालते हैं: लगातार कुछ मानों का औसत, जैसे तिमाही आँकड़ों के लिए 4 मान। चल माध्य से होकर खींची सबसे ठीक बैठने वाली रेखा प्रवृत्ति रेखा है। मौसमी अंतर = असली मान − प्रवृत्ति मान। प्रवृत्ति में औसत मौसमी अंतर जोड़ने से अनुमान (forecast) मिलता है।
- प्रतिदर्श बंटन (Sampling Distribution) और केंद्रीय सीमा प्रमेय – नमूने से निकाली संख्या (जैसे नमूना माध्य x̄ या नमूना अनुपात p̂) हर नमूने में थोड़ी बदलती है। अगर हम बहुत सारे नमूने लें और हर बार यह संख्या लिखें, तो जो पैटर्न बनता है वह उसका प्रतिदर्श बंटन है। इसका केंद्र असली मान (μ या p) होता है, फैलाव मानक त्रुटि (माध्य के लिए σ/√n, अनुपात के लिए √(p(1−p)/n)) होता है, और केंद्रीय सीमा प्रमेय के अनुसार बड़ा n होने पर इसका आकार लगभग सामान्य (घंटी जैसा) हो जाता है।
- प्रतिचयन: प्रतिदर्श से पूरी समष्टि को जानना – समष्टि (population) वह पूरा समूह है जिसके बारे में हम जानना चाहते हैं; प्रतिदर्श (sample) उसका छोटा भाग है जिसे हम सच में जाँचते हैं। अच्छा प्रतिदर्श यादृच्छिक रूप से चुना जाता है ताकि वह पूरी समष्टि जैसा दिखे। सरल यादृच्छिक प्रतिचयन में सबको बराबर मौका; स्तरीकृत में हर समूह से सही हिस्सा; क्रमबद्ध में हर k-वाँ सदस्य। अलग-अलग प्रतिदर्श थोड़े अलग उत्तर देते हैं (प्रतिचयन-विचलन), पर बड़े प्रतिदर्श कम डगमगाते हैं (बड़ी संख्याओं का नियम)। पक्षपाती प्रतिदर्श कितना भी बड़ा हो, ग़लत उत्तर देता है।
2. 3. Probability
Probability from data and theory · Combined events · Probability distributions (H)
- प्रायिकता: एक घटना की संभावना – प्रायिकता बताती है कि कोई बात होने की कितनी संभावना है, 0 से 1 तक की एक संख्या में। जब सारे परिणाम समप्रायिक हों, तब P(घटना) = अनुकूल परिणामों की संख्या ÷ कुल परिणामों की संख्या। असंभव घटना की प्रायिकता 0 और निश्चित घटना की 1 होती है।
- संयुक्त घटनाएँ, वृक्ष आरेख और सप्रतिबंध प्रायिकता – जब दो चीज़ें होती हैं, तो हर परिणाम प्रतिदर्श समष्टि, तालिका, वेन आरेख या वृक्ष आरेख में लिखो। वृक्ष की शाखाओं पर गुणा करो (गुणन नियम) और जो रास्ते चाहिए उन्हें जोड़ो। अगर पहली घटना दूसरी को बदल दे तो घटनाएँ आश्रित हैं, जैसे बिना वापस डाले निकालना। सप्रतिबंध प्रायिकता P(A | B) वह संभावना है कि A हो, जब पता है कि B हो चुका: P(A | B) = P(A और B) ÷ P(B)।
- असतत यादृच्छिक चर का प्रायिकता बंटन – यादृच्छिक चर X किसी प्रयोग के हर परिणाम को एक संख्या में बदलता है। उसका प्रायिकता बंटन हर मान x और उसकी प्रायिकता P(X = x) की सूची है; हर P, 0 और 1 के बीच होता है और सबका जोड़ 1 होता है। माध्य E(X) = Σx·P(x) लंबे समय का औसत (संतुलन बिंदु) है। प्रसरण Var(X) = Σ(x − μ)²P(x) = E(X²) − μ² फैलाव बताता है; σ = √Var। खास मॉडल: एकसमान, द्विपद B(n, p) जिसका माध्य np और प्रसरण np(1 − p), और प्वासों जिसमें माध्य = प्रसरण = λ।