Netherlands VWO 5 Mathematics D
अध्याय: 2
1. Probability and statistics (part 2)
Probability distributions · Hypothesis testing · Correlation and regression · Profile-specific deepening
- प्रसामान्य बंटन (Normal Distribution) – प्रसामान्य बंटन एक सतत, सममित, घंटी जैसा बंटन है जो माध्य μ (केंद्र) और मानक विचलन σ (फैलाव) से तय होता है: X ~ N(μ, σ²)। माध्य = माध्यिका = बहुलक। लगभग 68% मान μ से 1σ के भीतर, 95% 2σ के भीतर और 99.7% 3σ के भीतर होते हैं। किसी भी मान को मानक स्कोर z = (x − μ)/σ में बदलते हैं, जो N(0, 1) का पालन करता है; प्रायिकता वक्र के नीचे का क्षेत्रफल है, जिसे तालिका या कैलकुलेटर से Φ(z) के रूप में पढ़ते हैं।
- परिकल्पना परीक्षण (Hypothesis Testing) – परिकल्पना परीक्षण नमूने (sample) से पूरी जनसंख्या के बारे में किसी दावे को जाँचता है। शुरुआत शून्य परिकल्पना H₀ (कोई बदलाव नहीं, जैसे p = 0.5) और वैकल्पिक परिकल्पना H₁ (जो हमें शक है, जैसे p > 0.5) से होती है। सार्थकता स्तर चुनो, जैसे 5%। अगर H₀ सच हो तो हमारा नतीजा (या उससे भी चरम) कितना संभव है, यही p-मान है। p-मान स्तर से कम हो या नतीजा क्रांतिक क्षेत्र में हो, तो H₀ अस्वीकार। वरना H₀ अस्वीकार करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं। टाइप I त्रुटि: सच्ची H₀ को अस्वीकार करना; टाइप II: झूठी H₀ को अस्वीकार न करना।
2. Geometry
Analytic and synthetic methods · Conic sections · Space · Applications and ICT
- तर्क और उपपत्ति: गणितज्ञ कैसे दिखाते हैं कि कोई बात हमेशा सत्य है – उपपत्ति (proof) सही कारणों की ऐसी कड़ी है जो दिखाती है कि कथन हर स्थिति में सत्य है। कथन सत्य या असत्य होता है; 'यदि P तो Q' (P ⇒ Q) का अर्थ है P होने पर Q ज़रूर होगा, पर उसका विलोम Q ⇒ P ग़लत भी हो सकता है। P ⇔ Q का अर्थ दोनों दिशाएँ सही। मुख्य विधियाँ: प्रत्यक्ष उपपत्ति (ज्ञात तथ्यों से क़दम-दर-क़दम, जैसे विषम संख्या 2n + 1); सभी स्थितियाँ जाँचकर उपपत्ति; प्रति-उदाहरण से खंडन (एक असफल स्थिति दावे को गिरा देती है); विरोधाभास से उपपत्ति (उल्टा मानकर असंभव तक पहुँचना)। ज्यामितीय उपपत्ति में हर पंक्ति का कारण लिखा जाता है (समांतर रेखाएँ, सर्वांगसम और समरूप त्रिभुज)। विश्लेषणात्मक उपपत्ति निर्देशांक लेती है; संश्लेषणात्मक उपपत्ति शुद्ध ज्यामिति।
- शंकु परिच्छेद (कक्षा 11): वृत्त, परवलय, दीर्घवृत्त और अतिपरवलय – द्वि-शंकु को समतल से काटने पर वृत्त, दीर्घवृत्त, परवलय या अतिपरवलय बनता है; शीर्ष से कटे तो बिंदु, रेखा या रेखा-युग्म (अपभ्रष्ट)। वृत्त: (x − h)² + (y − k)² = r²। परवलय y² = 4ax: नाभि (a, 0), नियता x = −a, नाभिलंब 4a, e = 1। दीर्घवृत्त x²/a² + y²/b² = 1: c² = a² − b², e = c/a < 1, नाभिलंब 2b²/a, PF₁ + PF₂ = 2a। अतिपरवलय x²/a² − y²/b² = 1: c² = a² + b², e > 1, |PF₁ − PF₂| = 2a।
- सदिश बीजगणित – सदिश (vector) में माप (परिमाण) और दिशा दोनों होते हैं। 3D में a = xî + yĵ + zk̂ लिखते हैं। लंबाई |a| = √(x² + y² + z²)। दिक्-कोसाइन l = x/|a|, m = y/|a|, n = z/|a| और l² + m² + n² = 1। सदिश सिर-से-पूँछ (त्रिभुज नियम) या घटक-दर-घटक जुड़ते हैं। ka लंबाई को k गुना करता है, k ऋण हो तो दिशा उल्टी। AB को m : n में बाँटने वाले बिंदु का स्थिति सदिश अंतः (mb + na)/(m + n) और बाह्य (mb − na)/(m − n)। अदिश गुणनफल a·b = |a||b|cosθ एक संख्या है। सदिश गुणनफल a×b दोनों पर लंब नया सदिश है; इसकी लंबाई समांतर चतुर्भुज का क्षेत्रफल है।