समाजशास्त्र में संस्कृति का अर्थ
रोज़ की बातचीत में 'संस्कृति' का मतलब कभी कला और साहित्य होता है। समाजशास्त्र में संस्कृति बड़ी चीज़ है: वे विचार, मूल्य, आदतें और वस्तुएँ जो कोई समूह साझा करता है और आगे बढ़ाता है। सांस्कृतिक व्यवहार वे काम हैं जो लोग करते हैं, जैसे पढ़ना, फ़िल्म देखना, संग्रहालय जाना, खेलना, वाद्य सीखना या संगीत सुनना।
समाजशास्त्री पूछते हैं: कौन क्या करता है, कितनी बार, और क्यों? वे पाते हैं कि सांस्कृतिक व्यवहार अचानक नहीं होते। वे समाज के पैटर्न का पालन करते हैं। यहीं से संस्कृति का समाजशास्त्र शुरू होता है।
फ़्रांसीसी समाजशास्त्री पियरे बोर्द्यू ने कहा कि पसंद एक संकेत का भी काम करती है। कुछ कला या संगीत की जानकारी सांस्कृतिक पूँजी की तरह काम कर सकती है: वह पैसे की तरह सम्मान और मौके दिलाती है। जिन परिवारों में यह ज़्यादा होती है वे इसे बच्चों को बिना किसी के ध्यान दिए आगे दे देते हैं।
वर्ग, लिंग, उम्र और जगह के अनुसार पसंद
बड़े समूहों के सर्वेक्षण दिखाते हैं कि पसंद इनसे बदलती है:
- उम्र: युवा नई शैलियाँ और पॉप आज़माते हैं; बड़े लोग अपनी जवानी का संगीत पसंद करते हैं, अक्सर शास्त्रीय या लोक। हर पीढ़ी अलग मीडिया के साथ बड़ी होती है।
- वर्ग और पढ़ाई: आमदनी, शिक्षा और पेशा तय करते हैं कि लोग कौन-से सांस्कृतिक कार्यक्रम खरीद सकते हैं और कहाँ सहज महसूस करते हैं। ज़्यादा पढ़ाई अक्सर चौड़ी पसंद और संग्रहालय, नाटक या संगीत-समारोह में ज़्यादा जाने से जुड़ी होती है।
- लिंग: पढ़ने में (कई देशों में उपन्यास महिलाएँ ज़्यादा पढ़ती हैं) और खेल में फ़र्क दिखता है, पर संगीत की पसंद अक्सर पास-पास होती है। फ़र्क आंशिक रूप से इससे आता है कि लड़कों और लड़कियों की परवरिश कैसे होती है।
- जगह: शहरों में ज़्यादा कंसर्ट, दुकानें और क्लब हैं; गाँवों में स्थानीय मेले और क्षेत्रीय लोक संगीत। भाषा और धर्म भी मायने रखते हैं।
सावधान: ये रुझान हैं, नियम नहीं। बहुत से लोग इनमें फ़िट नहीं होते। और संबंध यह साबित नहीं करता कि एक चीज़ दूसरी का कारण है: पसंद कई बातों से मिलकर बनती है। 3D में देखिए कि रंग इकट्ठे होते हैं पर पूरी तरह नहीं।
कुछ लोग सर्वभक्षी (omnivore) होते हैं: उन्हें कई तरह का संगीत पसंद है। अध्ययन बताते हैं कि ऐसे लोग ज़्यादा पढ़े-लिखे समूहों में आम हैं, यानी पसंद की चौड़ाई भी सांस्कृतिक पूँजी का संकेत हो सकती है।
संस्कृति तक डिजिटल पहुँच
स्ट्रीमिंग, वीडियो साइट और ई-किताबें लोगों को कहीं से भी, कभी भी, अक्सर मुफ़्त या सस्ते में गाने, फ़िल्में और किताबें देती हैं। इससे, ख़ासकर शहरों से दूर के लोगों के लिए, पहुँच बढ़ती है।
लेकिन पहुँच बराबर नहीं है:
- डिजिटल खाई: हर किसी के पास स्मार्टफ़ोन, तेज़ इंटरनेट या काफ़ी डेटा नहीं।
- कौशल: क्या खोजना है, यह जानने के लिए मार्गदर्शन चाहिए।
- एल्गोरिद्म: ऐप वही सुझाते हैं जो आपने पहले सुना, जिससे आप छोटे घेरे में रह सकते हैं; या वे कुछ नया भी दिखा सकते हैं।
- भाषा और स्थानीय संस्कृति: बड़े प्लेटफ़ॉर्म वैश्विक हिट पसंद करते हैं; स्थानीय कलाकारों को खोजे जाने के तरीके चाहिए।
यानी डिजिटल जीवन संभावनाएँ बढ़ाता है, जबकि पुरानी असमानताएँ नए रूप में चल सकती हैं।
मिले-जुले सांस्कृतिक प्रभाव
संस्कृतियाँ डिब्बों में नहीं रहतीं। यात्रा, प्रवास, व्यापार, फ़िल्म और इंटरनेट से वे मिलती और घुलती हैं। इसे सांस्कृतिक मिश्रण या फ़्यूज़न कहते हैं।
- भारतीय फ़िल्म संगीत शास्त्रीय रागों, लोक धुनों और पश्चिमी ऑर्केस्ट्रा को मिलाता है।
- पंजाब में जन्मा भांगड़ा दुनिया भर में हिप-हॉप और पॉप से मिला।
- के-पॉप वैश्विक पॉप शैलियों को कोरियाई भाषा और नृत्य के साथ जोड़ता है।
मिश्रण रचनात्मकता और समझ ला सकता है। चिंता भी हो सकती है: कुछ को स्थानीय परंपराओं के खोने का डर है, या यह कि बड़ी वैश्विक कंपनियाँ हावी हो जाएँगी। अक्सर दोनों साथ होते हैं: वैश्विक शैलियाँ फैलती हैं और स्थानीय लोग उन्हें अपने ढंग से ढाल लेते हैं।
स्ट्रीमिंग के साथ 3D हर व्यक्ति को दूसरी पसंद के साथ दिखाता है: निजी स्तर पर और मिश्रण।
दर्शक आँकड़े पढ़ना
संस्कृति का अध्ययन करने के लिए शोधकर्ता सर्वेक्षण और दर्शक आँकड़े इस्तेमाल करते हैं, जैसे पिछले साल कितने प्रतिशत लोग कंसर्ट गए। इन्हें कैसे पढ़ें:
- देखिए किनसे पूछा गया (नमूना): कितने, किस उम्र और जगह के? छोटा या पक्षपाती नमूना भटकाता है।
- अलग आकार के समूहों की तुलना के लिए प्रतिशत में बदलिए: 12 में से 6 गाँव वाले यानी 50 प्रतिशत।
- समूहों की तुलना कीजिए (उम्र बनाम उम्र) और बड़े अंतर पर ध्यान दीजिए।
- शक करिए: क्या लोगों ने सच बताया, क्या सवाल साफ़ था, और क्या कोई और कारण पैटर्न समझा सकता है। पैटर्न कारण साबित नहीं करता।
श्रेणियों के लिए बार चार्ट इस्तेमाल करिए और पैमाना देखिए। 3D में चित्र के नीचे के आँकड़े पढ़िए: हर स्तंभ सबसे लोकप्रिय शैली और उसकी गिनती बताता है।
कौन बजाता है और कौन सुनता है: संगीत का चलन
दो बातें अलग हैं: सुनना और बजाना। लगभग सब सुनते हैं; वाद्य बजाने या समूह में गाने वाले बहुत कम होते हैं। सर्वेक्षण आमतौर पर पूछते हैं: कितने घंटे? कौन-सी शैलियाँ? कौन बजाता है?
- सुनना युवाओं में सबसे ज़्यादा है, जो फ़ोन और हेडफ़ोन पर सुनते हैं। शैली की पसंद उम्र, पढ़ाई और जगह से बदलती है, जैसा 3D में दिखता है।
- बजाने के लिए समय, कक्षाओं और वाद्य के लिए पैसा, और हौसला चाहिए। ज़्यादा साधनों वाले परिवार बच्चों को ज़्यादा बार सिखाते हैं, यह भी सांस्कृतिक पूँजी के आगे जाने का एक तरीका है। कई जगह लड़कों और लड़कियों को अलग वाद्यों की ओर मोड़ा जाता है।
- शौक़ीन और पेशेवर: स्कूल के बैंड और कोरस, सामुदायिक समूह, और वे लोग जो संगीत से रोज़ी कमाते हैं।
सांस्कृतिक नीतियाँ (जैसे स्कूलों में मुफ़्त संगीत, सार्वजनिक कंसर्ट या सस्ते टिकट) इसे चौड़ा करने की कोशिश करती हैं कि कौन हिस्सा ले सके।
संगीत लोगों तक कैसे पहुँचता है: वितरण के रूप
वितरण का मतलब है कि संगीत बनाने वालों से सुनने वालों तक कैसे पहुँचे। इसके रूप समय के साथ बदले:
- लाइव: कंसर्ट, उत्सव, शादियाँ, मंदिर और सड़क का संगीत।
- रेडियो और टीवी: एक साथ कई लोगों तक प्रसारण, जो कार्यक्रम बनाने वाले चुनते हैं वही बजता है।
- भौतिक रिकॉर्डिंग: रिकॉर्ड, कैसेट, सीडी।
- डाउनलोड: आप फ़ाइल खरीदते हैं और वह आपकी होती है।
- स्ट्रीमिंग: आप सदस्यता देते हैं या विज्ञापन देखते हैं और लगभग कोई भी गाना तुरंत बजा सकते हैं। हर बार बजने पर मिलने वाला पैसा कम है, इसलिए कलाकार अक्सर लाइव शो और सामान से ज़्यादा कमाते हैं।
कलाकारों और श्रोताओं के बीच रिकॉर्ड लेबल, प्लेटफ़ॉर्म, आयोजक और गानों के उपयोग का भुगतान लेने वाली संस्थाएँ होती हैं। वितरण पर किसका नियंत्रण है, इससे तय होता है कि कौन-सा संगीत सुना जाएगा।
मामले: एक एल्बम, एक उत्सव, विज्ञापन का संगीत
एक एल्बम। चरण: रिकॉर्ड करना, पहला सिंगल जारी करना, वीडियो बनाना, रेडियो और सोशल मीडिया पर प्रचार, स्ट्रीमिंग साइट पर डालना, शायद प्रशंसकों के लिए विनाइल छापना, दौरे पर निकलना। समाजशास्त्र पूछता है: सबसे पहले कौन सुनता है (युवा, शहरी, ऑनलाइन लोग), और कौन छूट जाता है?
एक उत्सव। कई कलाकारों वाला बहु-दिवसीय आयोजन, जैसे किसी शहर या रिसॉर्ट का बड़ा संगीत उत्सव। वह टिकट बेचता है, प्रायोजक पाता है, और स्थानीय होटलों-दुकानों को आमदनी देता है। टिकट का दाम और यात्रा का खर्च तय करते हैं कि कौन आ सकता है, इसलिए दर्शक अक्सर कम उम्र और ज़्यादा सम्पन्न होते हैं। वह प्रशंसकों की साझा पहचान भी बनाता है।
विज्ञापन का संगीत। कोई कंपनी विज्ञापन में गाना या छोटी धुन (जिंगल) इस्तेमाल करने के लिए पैसा देती है। कलाकार को लाइसेंस शुल्क मिलता है और नए श्रोता; कंपनी को ऐसा एहसास मिलता है जो उसका सामान बेचे। आलोचक पूछते हैं कि चीज़ें बेचने में काम आने पर गाने का अर्थ खो तो नहीं जाता।
हर मामले में चार सवाल पूछिए: कौन बनाता है, कौन पैसा देता है, कौन सुनता है, कौन छूटता है?
करके देखें: छोटा सर्वेक्षण
20 लोगों (परिवार, पड़ोसी, दोस्त) से उनका पसंदीदा संगीत, उम्र-समूह और स्ट्रीमिंग इस्तेमाल करना पूछिए। एक तालिका बनाइए। गिनती को प्रतिशत में बदलिए। कौन-सा समूह कौन-सी शैली पसंद करता है? कोई हैरानी हुई? एक सावधान वाक्य लिखिए: 'मेरे छोटे सर्वेक्षण में ...'। फिर 3D की भीड़ से मिलाइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- सांस्कृतिक व्यवहार: पढ़ना, देखना, बजाना, सुनना, जाना
- सांस्कृतिक पूँजी (बोर्द्यू): जानकारी और पसंद जो सम्मान और मौके दिलाती है
- पसंद उम्र, पढ़ाई/वर्ग, लिंग और जगह के पैटर्न में चलती है (रुझान, नियम नहीं)
- सर्वभक्षी (omnivore): कई तरह की पसंद वाला व्यक्ति
- प्रतिशत = (गिनती / कुल) × 100
- वितरण के रूप: लाइव, रेडियो/टीवी, भौतिक रिकॉर्डिंग, डाउनलोड, स्ट्रीमिंग
- चार सवाल: कौन बनाता है, कौन पैसा देता है, कौन सुनता है, कौन छूटता है?
हल किए गए उदाहरण
1. 12 गाँव वालों के एक काल्पनिक सर्वेक्षण में 6 को लोक संगीत सबसे अच्छा लगता है। यह कितने प्रतिशत है?
6 / 12 × 100 = 50 प्रतिशत।
2. 3D की भीड़ में 12 शहर वालों में से किसी को लोक पसंद नहीं, पर 12 गाँव वालों में से 6 को है। हम क्या कह सकते हैं और क्या नहीं?
हम कह सकते हैं कि इस भीड़ में लोक की पसंद जगह से जुड़ी है। हम यह नहीं कह सकते कि गाँव में रहना कारण है, क्योंकि परिवार, भाषा और कार्यक्रम जैसी और बातें भी मायने रख सकती हैं, और भीड़ छोटी व काल्पनिक है।
3. उदाहरण के साथ 'सांस्कृतिक पूँजी' समझाइए।
सांस्कृतिक पूँजी वह जानकारी और पसंद है जो सम्मान और मौके दिलाती है। जिस बच्ची को परिवार कंसर्ट ले जाता है और संगीत की कक्षाओं का खर्च देता है, वह शास्त्रीय संगीत की भाषा सीख लेती है, जो किसी चयन-आधारित स्कूल के ऑडिशन में उसकी मदद कर सकती है।
4. संस्कृति तक डिजिटल पहुँच बराबर क्यों नहीं है, इसके दो कारण दीजिए।
हर किसी के पास स्मार्टफ़ोन, तेज़ इंटरनेट या काफ़ी डेटा नहीं है (डिजिटल खाई), और हर किसी के पास अच्छी सामग्री खोजने का कौशल या मार्गदर्शन नहीं; एल्गोरिद्म भी लोगों को एक ही छोटे घेरे में रख सकते हैं।
5. कलाकार अक्सर स्ट्रीमिंग से ज़्यादा लाइव शो से क्यों कमाते हैं?
स्ट्रीमिंग हर बार बजने पर बहुत कम देती है, जो लेबल और प्लेटफ़ॉर्म में बँटती है, जबकि कंसर्ट के टिकट और सामान की बिक्री ज़्यादा सीधे कलाकारों तक पहुँचती है।
आम गलतियाँ
- यह कहना कि 'पसंद सिर्फ़ निजी चुनाव है'। परिवार, स्कूल, पैसा और जगह भी इसे गढ़ते हैं।
- रुझान को नियम समझ लेना। बहुत से लोग अपने समूह के पैटर्न में नहीं आते।
- यह कहना कि संबंध कारण साबित करता है। उम्र और जगह पसंद से जुड़ी हैं, पर और कारण भी असर डालते हैं।
- अलग आकार के समूहों की कच्ची गिनती की तुलना करना। प्रतिशत लीजिए।