सार्वजनिक जगहों पर ज़्यादा सावधानी क्यों
सार्वजनिक स्थान वह जगह है जहाँ बहुत लोग आ सकते हैं: स्कूल का गेट, बाज़ार, मॉल, बस या रेलवे स्टेशन, सिनेमा, स्टेडियम, मेला। ज़्यादा लोग यानी कम जगह, ज़्यादा शोर और गड़बड़ की ज़्यादा संभावना। ज़्यादातर दिन कुछ नहीं होता। सुरक्षित आदतों में कुछ ख़र्च नहीं होता, इसलिए रोज़ अपनाइए।
- दो निकास और आग से बचने वाले निकास का चिह्न देख लीजिए।
- दोस्तों और घरवालों के साथ मिलने की जगह तय कीजिए।
- फ़ोन चार्ज रखिए और नंबर 112 याद रखिए (भारत, रूस और यूरोपीय संघ में आपातकालीन नंबर)।
- क़ीमती सामान छिपाकर रखिए और बैग बंद रखिए।
भीड़
जगह के हिसाब से लोग बहुत ज़्यादा हों तो भीड़ ख़तरनाक हो जाती है। भीड़ के दबाव में लोग एक-दूसरे से दब जाते हैं, हिल नहीं पाते और साँस लेना मुश्किल होता है। गिरना सबसे बुरा है, क्योंकि दूसरे ऊपर गिर पड़ते हैं।
- बहाव के साथ चलिए, उसके ख़िलाफ़ नहीं। धीरे-धीरे बगल की ओर किनारे की तरफ़ जाइए।
- साँस की जगह बचाने के लिए बाँहें छाती के आगे रखिए।
- पैरों पर खड़े रहिए। कुछ गिर जाए तो छोड़ दीजिए।
- तंग गेट, सीढ़ियाँ और बंद गलियों से बचिए। दीवार के पास रहिए पर उससे सटिए नहीं।
- जगह पहले से ज़्यादा भरी हो तो जल्दी निकल जाइए।
शांत भीड़ धीरे चलती है। घबराहट में सब एक ही निकास की ओर धक्का देते हैं, और दरवाज़े का जाम ही चोट पहुँचाता है, जैसा 3D के चरण 2 में दिखा।
सार्वजनिक इमारत में आग
लपटों से ज़्यादा ख़तरनाक धुआँ है, क्योंकि वह ऊपर उठकर दम घोंटता है। अलार्म बजे तो उसे गंभीरता से लीजिए।
- सामान मत उठाइए। तेज़ चलिए, पर दौड़िए मत।
- सीढ़ियाँ इस्तेमाल कीजिए, लिफ़्ट कभी नहीं।
- आग से दूर वाले निकास की ओर जाइए। धुआँ हो तो झुककर चलिए और नाक-मुँह पर कपड़ा रखिए।
- बंद दरवाज़े को पहले हाथ के पिछले हिस्से से छूकर देखिए। गर्म हो तो मत खोलिए।
- बाहर तय जगह पर इकट्ठा होइए। 112 पर फ़ोन कीजिए और कोई लापता हो तो कर्मचारियों को बताइए। वापस अंदर कभी मत जाइए।
संदिग्ध वस्तुएँ और आतंकी ख़तरा
संदिग्ध वस्तु वह बैग, पार्सल या डिब्बा है जो अकेला पड़ा है, ऐसी जगह जहाँ उसे नहीं होना चाहिए, और कोई उसे लेने नहीं आता। वह खोया हुआ बैग भी हो सकता है, पर पक्का कोई नहीं कह सकता।
- उसे न छुएँ, न हिलाएँ, न खोलें, न पास से फ़ोटो लें। उसके पास फ़ोन या रेडियो इस्तेमाल मत कीजिए।
- आसपास के लोगों से पूछिए कि किसी का है क्या। नहीं है तो तुरंत कर्मचारी, सुरक्षाकर्मी या पुलिस को बताइए।
- जितना हो सके दूर हटिए, 100 मीटर तक, और दीवार या मोड़ की ओट में रहिए।
- दूसरों को भी शांति से हटाइए। निकास पर भीड़ मत लगाइए।
हमला या गोलीबारी का अलार्म हो तो: रास्ता साफ़ हो तो भागिए, न हो तो छिपिए (दरवाज़ा बंद या रोक दीजिए, आवाज़ बंद, झुककर रहिए), और सुरक्षित होते ही 112 पर फ़ोन कीजिए। पुलिस के निर्देश मानिए। वीडियो बनाने या देखने मत रुकिए।
भीड़ में अपराध
भीड़ में जेबकतरे और ठग घूमते हैं। बैग आगे रखिए और ज़िप बंद रखिए, फ़ोन अंदर की जेब में रखिए और पैसे मत दिखाइए। अनजान लोगों के साथ मत जाइए और उनसे खाना-पीना मत लीजिए। कोई पीछा करे तो रोशनी और लोगों वाली जगह (दुकान, गार्ड) पर जाकर मदद माँगिए। कोई बैग छीने तो छोड़ दीजिए। आपकी सुरक्षा बैग से ज़्यादा ज़रूरी है। फिर पुलिस को बताइए और कार्ड और फ़ोन ब्लॉक कराइए।
आपातकालीन सेवाएँ और पुलिस
नंबर 112 पुलिस, दमकल और एम्बुलेंस तीनों तक पहुँचाता है। शांत रहिए और बताइए कहाँ हैं (जगह, पहचान की चीज़), क्या हुआ है, कितने लोगों को मदद चाहिए, और अपना नाम। जब तक ऑपरेटर न कहे, फ़ोन मत काटिए।
पुलिस की मदद कीजिए, रुकावट मत बनिए। हटने को कहें तो हटिए, पहचान पत्र माँगें तो दिखाइए, जो देखा वह बताइए, और दमकल व एम्बुलेंस के लिए रास्ता खाली रखिए। बिना जाँचे अफ़वाह या फ़ोटो मत फैलाइए, इनसे घबराहट फैलती है। झूठा फ़ोन करना दंडनीय अपराध है।
करके देखिए: अपनी निकास योजना
अगली बार मॉल या स्टेशन में घुसते ही दस सेकंड रुकिए। ढूँढिए (1) दो निकास, (2) आग निकास का चिह्न, (3) मिलने की जगह। दोस्त को बताइए। फिर 3D में एक निकास बंद करके देखिए कि 60 लोगों को कितना समय लगता है। पहले अनुमान लगाइए, फिर जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- निकलो, शांत रहो, फ़ोन करो 112
- भीड़: बहाव के साथ, बगल से किनारे की ओर, बाँहें आगे, पैरों पर खड़े रहो
- आग: लिफ़्ट नहीं, झुककर, आग से दूर, बाहर मिलो
- संदिग्ध वस्तु: न छुओ, दूर हटो, पुलिस को बताओ (112)
हल किए गए उदाहरण
1. आप मॉल में हैं और आग का अलार्म बजता है। आप क्या करेंगे? क्रम से लिखिए।
सामान छोड़िए, आग या धुएँ से दूर वाले निकास की ओर तेज़ चलिए, सीढ़ी लीजिए लिफ़्ट नहीं, धुएँ में झुकिए, बाहर तय जगह पर मिलिए, 112 पर फ़ोन कीजिए और लापता लोगों की सूचना दीजिए। अंदर वापस मत जाइए।
2. मेले में भीड़ एक गेट की ओर धक्का देने लगती है। क्या करें?
बहाव के ख़िलाफ़ या गेट की तरफ़ मत जाइए। बगल की ओर किनारे चलिए, बाँहें छाती के आगे रखिए, पैरों पर खड़े रहिए और दूसरा निकास ढूँढिए। हो सके तो भीड़ बढ़ने से पहले निकल जाइए।
3. बस स्टॉप पर एक बैग दस मिनट से अकेला पड़ा है। अब क्या करें?
उसे मत छुएँ। पास के लोगों से पूछें। किसी का न हो तो सुरक्षाकर्मी या पुलिस को बताएँ और 112 पर फ़ोन करें। ख़ुद दूर हटें और दूसरों को भी हटाएँ।
4. आपको पता चलता है कि बाज़ार में गोलीबारी शुरू हुई है। क्या विकल्प हैं?
रास्ता साफ़ और आवाज़ से उलटी ओर हो तो भागें। नहीं तो छिपें: दरवाज़ा बंद या रोक दें, फ़ोन साइलेंट करें, झुककर रहें। सुरक्षित होने पर 112 पर फ़ोन करें और पुलिस के निर्देश मानें।
5. 3D में 60 लोग एक निकास से निकलते हैं। दूसरा निकास खुलने पर बेहतर क्यों होता है?
भीड़ दो धाराओं में बँट जाती है और हर दरवाज़े पर कम लोग होते हैं। धक्का-मुक्की कम होती है, जाम छोटा होता है और निकलना तेज़ होता है।
आम गलतियाँ
- आग में लिफ़्ट इस्तेमाल करना। वह रुक सकती है और फँसा सकती है; सीढ़ी लीजिए।
- फ़ोन या बैग लेने वापस जाना। सामान दोबारा आ सकता है, इंसान नहीं।
- जिज्ञासा में अकेला बैग उठाना या खोलना।
- भीड़ के ख़िलाफ़ दौड़ना या गेट पर खड़े रहना। बहाव के साथ बगल से चलिए।