भाषा क्या है और भाषावैज्ञानिक क्या पढ़ते हैं?
भाषा साझा संकेतों की व्यवस्था है। भाषावैज्ञानिक उसे परतों में बाँटते हैं: ध्वनियाँ (ध्वनि-विज्ञान), शब्द और उनके भाग (रूप-विज्ञान), वाक्य (वाक्य-विन्यास), अर्थ (अर्थ-विज्ञान) और जीवन में प्रयोग (प्रयोग-विज्ञान: संदर्भ से अर्थ कैसे बदलता है, जैसे "नमक पकड़ा दोगे?" अनुरोध है, क्षमता का सवाल नहीं)।
देखने और वर्गीकरण के लिए एक इकाई (ध्वनि, शब्द, वाक्य) लो और पूछो वह किस परत की है।
भाषा और विचार। क्या भाषा सोच को आकार देती है? थोड़ा-सा हाँ। रूसी में नीले के दो बुनियादी शब्द हैं (हल्का और गहरा) और बोलने वाले इन रंगों को थोड़ा जल्दी पहचानते हैं। भाषा ध्यान को दिशा देती है; दिमाग़ को बाँधती नहीं।
रूप: बोली, समाज-बोली और प्रयुक्ति
कोई भाषा एक ही चीज़ नहीं होती। बोली (dialect) जगह से जुड़ा रूप है (दिल्ली की हिंदी और भोजपुरी रंग वाली हिंदी)। समाज-बोली (sociolect) किसी समूह से जुड़ा रूप है (उम्र, पेशा, वर्ग)। प्रयुक्ति (register) वह ढंग है जिसमें आप किसी स्थिति में बोलते हैं (औपचारिक पत्र बनाम दोस्त को वॉयस नोट)। मानक रूप बस वह रूप है जो स्कूल और समाचार के लिए चुना गया है; वह "बेहतर" नहीं है।
भाषा और बोली के बीच की रेखा अक्सर सामाजिक होती है, केवल भाषावैज्ञानिक नहीं। आपसी समझ मदद करती है, पर इतिहास और पहचान भी मायने रखते हैं। बहुभाषिकता का मतलब है एक से ज़्यादा भाषाएँ बोलना; दुनिया में ज़्यादातर जगह यह सामान्य है।
भाषा का बदलाव: डिजिटल माध्यम, उधार शब्द, युवा-बोली
हर जीवित भाषा बदलती है: ध्वनियाँ खिसकती हैं, नए शब्द जन्मते हैं, अर्थ बहकते हैं। लैटिन mater सदियों में छोटे-छोटे क़दमों से स्पेनिश madre बना।
- उधार लेना: अंग्रेज़ी ने भारतीय भाषाओं से jungle, shampoo, pyjamas लिए; हिंदी में स्कूल, फ़ोन चलते हैं। जर्मन जैसी भाषाएँ नई तकनीक के लिए अंग्रेज़ी शब्द (anglicism) लेती हैं।
- डिजिटल माध्यम: संक्षिप्त रूप (lol, brb), इमोजी और वॉयस नोट तेज़ी से फैलते हैं और लेखन को बोलचाल के क़रीब लाते हैं।
- युवा-बोली: किशोर अपनापन जताने के लिए शब्द गढ़ते हैं; कुछ मिट जाते हैं, कुछ टिक जाते हैं।
बदलाव "गिरावट" नहीं है। यह भाषा का अपने बोलने वालों के साथ चलना है।
भाषा-परिवार और दुनिया की भाषाएँ
दुनिया में लगभग 7,000 भाषाएँ हैं। संबंधित भाषाएँ एक परिवार बनाती हैं, क्योंकि उनका पूर्वज एक है। अंग्रेज़ी, जर्मन, स्पेनिश, हिंदी और बांग्ला सब भारोपीय (Indo-European) हैं। "माँ" देखो: स्पेनिश madre, अंग्रेज़ी mother, हिंदी माँ: ये एक पुरानी जड़ से आए हैं। दूसरे परिवार: द्रविड़ (तमिल, तेलुगु), चीनी-तिब्बती (चीनी), अफ़्रो-एशियाई (अरबी)। बास्क जैसी कुछ भाषाएँ किसी ज्ञात परिवार में नहीं हैं।
आपकी भाषाई जीवनी: घर, स्कूल और ऑनलाइन जितनी भाषाएँ सुनते हैं, सबकी सूची बनाओ और लिखो कब कौन-सी बोलते हैं। यही आपका भाषा-नक्शा है। एक कक्षा में दस भाषाएँ हो सकती हैं; यह विविधता है, समस्या नहीं।
भाषाओं की तुलना: शब्द-क्रम, बोली और लिखी भाषा
शब्द-क्रम। अंग्रेज़ी और स्पेनिश आम तौर पर कर्ता-क्रिया-कर्म (SVO) कहती हैं: "I eat rice"। हिंदी और जापानी कर्ता-कर्म-क्रिया (SOV): "मैं चावल खाता हूँ"। दोनों समान रूप से सामान्य हैं। दो जानी-पहचानी भाषाओं की तुलना अपना व्याकरण पहचानने का सबसे तेज़ तरीक़ा है।
बोली हुई बनाम लिखी भाषा। बोलना तेज़ और जीवंत है: छोटे वाक्य, भराव ("अं…"), दोहराव, और हाव-भाव व लहजा मदद करते हैं। लेखन योजनाबद्ध और संपादित है: लंबे वाक्य, चुने हुए शब्द, चेहरा नहीं। कुछ शब्द एक ही माध्यम में चलते हैं (बोलचाल में "चल यार", निबंध में "अतः")।
भाषा-अर्जन, बहुभाषिकता और सांकेतिक भाषाएँ
भाषा-अर्जन। शिशु लगभग 6 महीने में बड़बड़ाते हैं, 12 महीने के आसपास पहले शब्द बोलते हैं और लगभग 2 साल में दो शब्द जोड़ते हैं। वे नियमों से नहीं, लोगों को सुनकर और उनके साथ बात करके सीखते हैं। बच्चे एक साथ दो-तीन भाषाओं में भी बड़े हो सकते हैं।
बहुभाषी देश। भारत में बहुत-सी भाषाएँ हैं; स्पेन में स्पेनिश के साथ अपने क्षेत्रों में कैटलन, गैलिशियन और बास्क जैसी भाषाएँ हैं। लोग व्यक्ति और स्थिति के अनुसार भाषाएँ बदलते रहते हैं।
सांकेतिक भाषाएँ (जैसे भारतीय सांकेतिक भाषा) पूरी भाषाएँ हैं, जिनका अपना व्याकरण है और जो हाथ, चेहरे व शरीर से बनती हैं। वे बोली का इशारों वाला रूप नहीं हैं।
करके देखो: अभ्यास
3D में: समय-पट्टी खिसकाकर mater को madre बनते देखो। शब्द-क्रम चुनने वाले में अंग्रेज़ी, हिंदी, जापानी आज़माओ। किन भाषाओं में क्रिया अंत में है?
घर पर: दादा-दादी से ऐसे 10 शब्द पूछो जो वे बोलते हैं और आप नहीं। दो कॉलम में लिखो (उनका शब्द, आपका शब्द)। कौन-से दूसरी भाषा से आए हैं? फिर एक वाक्य दो प्रयुक्तियों में बोलो: दोस्त से और प्रधानाचार्य से।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- परतें: ध्वनि, शब्द, वाक्य, अर्थ, प्रयोग
- रूप: बोली (जगह), समाज-बोली (समूह), प्रयुक्ति (स्थिति)
- भाषा-परिवार = एक साझा पूर्वज से निकली भाषाएँ
- शब्द-क्रम: SVO (अंग्रेज़ी, स्पेनिश) / SOV (हिंदी, जापानी)
- अर्जन: ~6 महीने बड़बड़ाना, ~12 महीने पहले शब्द, ~2 साल दो शब्द
हल किए गए उदाहरण
1. भाषा की कौन-सी परत वाक्य में शब्दों के क्रम का अध्ययन करती है?
वाक्य-विन्यास (syntax)। वह देखता है शब्द मिलकर वाक्य कैसे बनाते हैं।
2. कोई दोस्त से "चलता हूँ यार" कहता है पर प्रधानाचार्य से "मुझे अब जाना है"। यह क्या है?
प्रयुक्ति (register): स्थिति के साथ शैली बदलती है।
3. स्पेनिश "madre", अंग्रेज़ी "mother" और हिंदी "माँ" मिलते-जुलते हैं। यह क्या दिखाता है?
वे एक पुरानी साझा जड़ से आए हैं, इसलिए ये भाषाएँ एक परिवार (भारोपीय) में हैं।
4. "I / eat / rice" को SOV क्रम में रखो।
I rice eat (हिंदी: मैं चावल खाता हूँ)।
5. क्या बोली "ग़लत भाषा" है?
नहीं। बोली अपने नियमों वाला रूप है। "मानक" का मतलब बस स्कूल और समाचार के लिए चुना हुआ।
6. भाषावैज्ञानिक सांकेतिक भाषाओं को असली भाषा क्यों कहते हैं?
उनका अपना व्याकरण और शब्दावली है, वे कुछ भी कह सकती हैं, और बच्चे उन्हें स्वाभाविक रूप से सीखते हैं।
आम गलतियाँ
- मानक रूप को "सही" और बोलियों को "ग़लत" समझना।
- भाषा के बदलाव को हमेशा गिरावट मानना।
- सांकेतिक भाषा को बोली की नक़ल कहना। उसका अपना व्याकरण है।
- औपचारिक लेखन में बोलचाल और लिखित शैली मिला देना।