ध्वनि और अक्षर एक नहीं हैं
ध्वनि-विज्ञान (Phonetics) बोली की ध्वनियों का अध्ययन है: हम उन्हें कैसे बनाते हैं, वे कैसे फैलती हैं और कान उन्हें कैसे सुनता है। अक्षर या वर्ण काग़ज़ पर बना निशान है। ध्वनि वह है जो हम बोलते हैं। दोनों हमेशा नहीं मिलते: अंग्रेज़ी का knife पाँच अक्षरों का है पर उसमें तीन ही ध्वनियाँ हैं, क्योंकि k नहीं बोला जाता। phone में ph दो अक्षर हैं पर ध्वनि एक (f) है।
हर ध्वनि फेफड़ों की हवा से बनती है। हवा गले के स्वर-यंत्र (larynx) से गुज़रती है और जीभ, दाँत और होंठ उसे आकार देते हैं।
स्वर: खुली हवा
स्वर (vowel) वह ध्वनि है जिसमें हवा खुली रहती है: कोई उसे छूता या रोकता नहीं। स्वरों को तीन बातों से अलग करते हैं:
- जीभ की ऊँचाई: ऊँची (ई, ऊ) या नीची (आ)।
- आगे या पीछे: ई आगे का स्वर है, ऊ पीछे का।
- होंठ: गोल (ऊ) या फैले (ई)।
किसी भाषा में स्वर-अक्षरों से ज़्यादा स्वर-ध्वनियाँ हो सकती हैं। अंग्रेज़ी में पाँच स्वर-अक्षर (a, e, i, o, u) हैं पर करीब बीस स्वर-ध्वनियाँ।
व्यंजन: रुकी हुई हवा
व्यंजन (consonant) तब बनता है जब हवा कहीं रुकती या दबती है। हर व्यंजन को तीन तरह से बताते हैं:
- घोष: घोष (गला काँपता है: ब, द, ग, ज़) या अघोष (कंपन नहीं: प, त, क, स)।
- स्थान: द्वार कहाँ है: होंठ (प, ब), जीभ की नोक (त, द), जीभ का पिछला भाग (क, ग)।
- प्रयत्न: द्वार कैसे काम करता है: पूरा बंद होकर खुलना (प, त, क), दबकर फुसफुसाना (स, फ), या नाक से हवा जाना (म, न)।
जाँचो: गले पर उँगली रखकर पहले zzz और फिर sss बोलो। कंपन सिर्फ़ zzz में महसूस होगा।
ध्वनि और स्वनिम; उनके रूप
स्वनिम (phoneme) वह सबसे छोटी ध्वनि-इकाई है जो शब्द का अर्थ बदल सकती है। पल में प की जगह ब लगाओ तो बल बन जाता है, यानी नया शब्द। इसलिए /प/ और /ब/ दो स्वनिम हैं।
एक ही स्वनिम को थोड़ा अलग-अलग ढंग से बोला जा सकता है। अंग्रेज़ी pin के p के साथ हवा का छोटा झोंका आता है; spin के p के साथ नहीं। सुनने वाला दोनों को एक ही /p/ सुनता है। ये उसी स्वनिम के रूप (variants) हैं। इनसे कभी नया शब्द नहीं बनता, और ये अक्सर पड़ोसी ध्वनियों पर निर्भर करते हैं।
समीकरण, विषमीकरण और लोप
असली बोली में पास-पास की ध्वनियाँ एक-दूसरे को बदल देती हैं।
- समीकरण (assimilation): एक ध्वनि अपने पड़ोसी जैसी हो जाती है। input बोला जाता है 'imput', क्योंकि n होंठ पर आकर p जैसा हो जाता है। यह घोष-अघोष के बारे में भी हो सकता है: कई भाषाओं में अघोष व्यंजन के पहले घोष व्यंजन अघोष हो जाता है।
- विषमीकरण (dissimilation): एक-सी दो ध्वनियाँ बोलने में आसानी के लिए अलग-सी हो जाती हैं। बहुत लोग Feb-u-ary बोलते हैं, यानी दो r में से एक छूट जाता है।
- लोप (simplification): कठिन व्यंजन-समूह में से एक ध्वनि गिर जाती है। listen को हम 'lisen' और handsome को 'hansom' बोलते हैं।
कारण हर बार एक ही है: मुँह सबसे आसान रास्ता ढूँढता है।
पुराने ध्वनि-परिवर्तन (ऐतिहासिक विकल्प)
कभी-कभी एक ही शब्द-परिवार में पुराने नियमों के कारण ध्वनि बदल जाती है, जो आज स्वाभाविक नहीं लगती। इन्हें ध्वनि-विकल्प (alternations) कहते हैं। अंग्रेज़ी में: knife और knives (f और v), foot और feet (ऊ और ई), sing, sang, sung। स्लाव और भारतीय भाषाओं समेत कई भाषाओं में ऐसे जोड़े हैं: मूल शब्द का अर्थ वही रहता है पर नया प्रत्यय लगते ही कोई स्वर या व्यंजन बदल जाता है। इन्हें अपवाद नहीं, ढाँचे की तरह सीखो।
श्रुति-मधुरता: ध्वनियों का संगीत
श्रुति-मधुरता (euphony) का अर्थ है कानों को भाने वाला, बहता हुआ स्वर। लेखक ध्वनि का जान-बूझकर प्रयोग करते हैं:
- अनुप्रास (alliteration): एक ही शुरुआती ध्वनि का दोहराव ('चंदन की चुनरी, चाँदनी चमके')।
- स्वर-मैत्री (assonance): एक ही स्वर का दोहराव।
- ध्वन्यनुकरण (onomatopoeia): ऐसे शब्द जो आवाज़ की नकल करते हैं (भन-भन, छप-छप, कल-कल)।
कठोर ध्वनियाँ (क, त, र) गुस्सा या तेज़ी दिखा सकती हैं; मुलायम ध्वनियाँ (म, ल, स) शांति दिखा सकती हैं। लेखक कठिन व्यंजन-समूहों से भी बचते हैं ताकि पंक्ति आसानी से बोली जा सके। श्रुति-मधुरता का उलटा श्रुति-कटुता है।
करके देखो
गला-परीक्षण: गला पकड़कर प-ब, त-द, क-ग, स-ज़ बोलो। हर जोड़ी में किसमें कंपन है? गति-परीक्षण: 'ten bikes' पहले धीरे और फिर तेज़ बोलो। जीभ कहाँ जाती है? तीन ऐसे शब्द लिखो जो तेज़ बोलने में अलग निकलते हैं।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- स्वर = खुली हवा; व्यंजन = रुकी या दबी हवा
- घोष = गला काँपे (ब, द, ग, ज़); अघोष = कंपन नहीं (प, त, क, स)
- व्यंजन का वर्णन = घोष + स्थान + प्रयत्न
- स्वनिम: अर्थ बदलता है (पल / बल); उसके रूप: अर्थ नहीं बदलता
- समीकरण = पड़ोसी एक-से हों; विषमीकरण = एक-सी ध्वनियाँ अलग हों; लोप = ध्वनि गिर जाए
हल किए गए उदाहरण
1. 'बल' के व्यंजन ब का वर्णन करो।
घोष: घोष (गला काँपता है)। स्थान: होंठ (दोनों होंठ बंद होते हैं)। प्रयत्न: स्पर्श (हवा पूरी रुककर झटके से निकलती है)। इसलिए ब घोष ओष्ठ्य स्पर्श व्यंजन है। इसका अघोष जोड़ीदार प है।
2. क्या 'pin' का p और 'spin' का p दो स्वनिम हैं?
नहीं। ये थोड़े अलग सुनाई देते हैं (झोंका है या नहीं) पर एक को दूसरे की जगह रखने से नया शब्द नहीं बनता। ये एक ही स्वनिम /p/ के दो रूप हैं। pin और bin देखो: p और b अलग स्वनिम हैं, क्योंकि शब्द बदल जाता है।
3. बहुत लोग 'ten bikes' को 'tem bikes' क्यों बोलते हैं?
समीकरण के कारण। b होंठ से बनता है। उससे ठीक पहले जीभ की नोक वाला n है, इसलिए तेज़ बोलने में n होंठ पर आकर m (ओष्ठ्य नासिक्य) बन जाता है। ध्वनियाँ एक-जैसी हो जाती हैं और मेहनत बचती है।
4. 'castle' को 'kassle' बोलने में कौन-सा ध्वनि-परिवर्तन है?
लोप। s-t-l समूह में बीच की ध्वनि t गिर जाती है, क्योंकि लगातार तीन व्यंजन बोलना कठिन है। वर्तनी में t रहता है, पर बोला नहीं जाता।
5. पंक्ति 'सर-सर सरिता सरकती सरस' में कौन-सा ध्वनि-साधन है और कैसा भाव मिलता है?
स की अनुप्रास (दोहराव)। यह फुसफुसाहट जैसा कोमल बहाव देता है, इसलिए शांत, कोमल भाव बनता है। यह श्रुति-मधुरता है।
आम गलतियाँ
- अक्षरों को ध्वनि गिन लेना। 'knife' में पाँच अक्षर पर तीन ध्वनियाँ हैं; 'phone' में ph दो अक्षर पर ध्वनि एक।
- स्वर को केवल अ, इ, उ जैसे अक्षर समझना। स्वर वह ध्वनि है जो खुली हवा से बनती है।
- हर थोड़े अलग सुनाई देने वाले p को नया स्वनिम कह देना। नया स्वनिम तभी बनता है जब अर्थ बदले।
- समीकरण और विषमीकरण को एक समझना। समीकरण में पड़ोसी एक-से हो जाते हैं; विषमीकरण में एक-से होते हुए भी अलग हो जाते हैं।