ध्वनि-तालिका: वर्णमाला
वर्णमाला ("अक्षरों की माला") संस्कृत और ज़्यादातर भारतीय भाषाओं की ध्वनियों को एक सुंदर क्रम में रखती है। पहले स्वर। फिर व्यंजन पाँच-पाँच की पाँच पंक्तियों (वर्ग) में। हर पंक्ति का नाम उसकी पहली ध्वनि से बनता है: कवर्ग, चवर्ग, टवर्ग, तवर्ग, पवर्ग।
यह क्रम बेतरतीब नहीं। हर पंक्ति मुँह की एक जगह से बनती है, पीछे (कंठ) से आगे (ओष्ठ) की ओर। एक पंक्ति के भीतर पाँच ध्वनियाँ यूँ चलती हैं: कठोर, साँस के साथ कठोर, कोमल, साँस के साथ कोमल, और नासिक्य (नाक से)।
पाणिनि और अष्टाध्यायी
पाणिनि लगभग ईसा-पूर्व पाँचवीं से चौथी सदी में हुए। उनकी पुस्तक अष्टाध्यायी ("आठ अध्याय") में लगभग 4000 छोटे नियम हैं, जिन्हें सूत्र कहते हैं। सूत्र कुछ शब्दों में समाया नियम है, जो याद रखने और पढ़ाने में आसान है।
नियम छोटे रखने के लिए पाणिनि ने शिव-सूत्र (माहेश्वर सूत्र) बनाए: ध्वनियाँ 14 डिब्बियों में। प्रत्याहार एक डिब्बी की पहली ध्वनि और दूसरी डिब्बी के अंतिम चिह्न से बना छोटा कोड है, जो बीच की सारी ध्वनियों के लिए खड़ा होता है। जैसे अच् यानी सारे स्वर और हल् यानी सारे व्यंजन। एक छोटा शब्द लंबी सूची की जगह ले लेता है।
धातु, प्रत्यय और शब्द बनाना
पाणिनि का व्याकरण शब्द मशीन की तरह बनाता है। आधार धातु (क्रिया का मूल) है, जैसे भू (होना)। फिर जुड़ने वाले टुकड़े प्रत्यय आते हैं। नियमों से ध्वनियाँ जुड़ती हैं: भू + अ + ति बनता है भवति, "वह होता है"।
थोड़ी-सी धातुओं और प्रत्ययों से हज़ारों शब्द बन जाते हैं। इसीलिए इस व्याकरण को बहुत पूर्ण माना जाता है। इसने बाद के विद्वानों की सोच को भी ढाला, और आज भाषावैज्ञानिक और कंप्यूटर वैज्ञानिक इसका अध्ययन करते हैं।
दूसरी महान परंपराएँ
- यास्क (पाणिनि से पहले): निरुक्त, शब्दों की उत्पत्ति (व्युत्पत्ति) पर।
- कात्यायन: वार्त्तिक, पाणिनि की कमियाँ भरने वाली टिप्पणियाँ।
- पतंजलि: महाभाष्य, पाणिनि को बहस के ढंग से समझाने वाली लंबी टीका।
- भर्तृहरि: वाक्यपदीय, वाक्य और शब्दों के अर्थ पर।
- तोल्काप्पियम: तमिल का सबसे पुराना उपलब्ध व्याकरण: अक्षर, शब्द और अर्थ पर। इससे पता चलता है कि दक्षिण की अपनी समृद्ध परंपरा थी।
- हेमचंद्र (ईसा की 12वीं सदी): प्राकृत और अपभ्रंश के व्याकरण लिखे, जो उस समय की आम बोलियाँ थीं।
शुरुआती लेखकों की तिथियाँ सिर्फ़ अंदाज़न हैं और विद्वान अभी भी बहस करते हैं।
करके देखो
घर पर करो। उँगलियाँ हल्के से गले पर रखकर "क" बोलो। फिर जीभ तालू से लगाकर "च"। फिर दाँतों पर जीभ रखकर "त", और होंठों से "प"। महसूस करो कि ध्वनि की जगह आगे बढ़ती है। फिर अपनी भाषा के तीन शब्द लो और उनकी पहली ध्वनियों को पाँच पंक्तियों में छाँटो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वर्णमाला = स्वर + 5 वर्गों में 25 व्यंजन
- पाँच स्थान: कंठ, तालु, मूर्धा, दंत, ओष्ठ
- पाणिनि की अष्टाध्यायी ≈ 4000 सूत्र (नियम)
- प्रत्याहार: अच् = स्वर; हल् = व्यंजन
- धातु + प्रत्यय = शब्द; भू + अ + ति → भवति
हल किए गए उदाहरण
1. वर्णमाला की कौन-सी पंक्ति होंठों से बनती है? उसकी ध्वनियाँ बताओ।
पवर्ग: प, फ, ब, भ, म।
2. भवति शब्द में धातु कौन-सी है और प्रत्यय कौन-से?
भू (भव्) धातु है। अ और ति प्रत्यय हैं, जो जुड़कर "होता है" बनाते हैं।
3. प्रत्याहार "अच्" किसके लिए है?
सारे स्वरों के लिए। एक छोटा कोड ध्वनियों की लंबी सूची को दर्शाता है।
4. विद्वान और कृति मिलाओ: यास्क, पाणिनि, पतंजलि।
यास्क: निरुक्त (शब्दों की उत्पत्ति); पाणिनि: अष्टाध्यायी (लगभग 4000 नियम); पतंजलि: महाभाष्य (टीका)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि पाणिनि ने सिर्फ़ संस्कृत कविता पर लिखा। उनकी पुस्तक शब्द और वाक्य बनने के नियमों की है।
- टवर्ग (जीभ पीछे मुड़ी) और तवर्ग (जीभ दाँतों पर) को गड्डमड्ड करना।
- तोल्काप्पियम को संस्कृत की पुस्तक कहना। यह तमिल का सबसे पुराना उपलब्ध व्याकरण है।
- शुरुआती विद्वानों की पक्की तिथियाँ बताना। तिथियाँ अंदाज़न हैं।