मैग्ना कार्टा से मानव अधिकार अधिनियम तक
अधिकारों से पहले
मध्यकाल में राजा नियम बनाता था और जैसे चाहे सज़ा दे सकता था।
मुख्य पड़ाव
- 1215 मैग्ना कार्टा: सामंतों ने राजा जॉन से मनवाया कि राजा क़ानून के नीचे है और किसी स्वतंत्र व्यक्ति को उसके बराबर वालों के क़ानूनी फ़ैसले या देश के क़ानून के बिना क़ैद या सज़ा नहीं। आज इसके कुछ ही अनुच्छेद बचे हैं, पर क़ानून के शासन का विचार यहीं से शुरू हुआ।
- कॉमन लॉ: सदियों तक जजों के फ़ैसलों से ऐसा क़ानून बना जो पूरे देश में एक जैसा लागू हुआ (न्यायिक नज़ीर)।
- 1679 हेबियस कॉर्पस अधिनियम: क़ैद किए गए व्यक्ति को अदालत के सामने लाना ज़रूरी, ताकि बिना क़ानूनी कारण कोई बंद न रहे।
- 1689 बिल ऑफ़ राइट्स: राजा की शक्ति सीमित की, क़ानून और कर पर संसद को नियंत्रण दिया, और क्रूर व असामान्य सज़ाओं पर रोक लगाई।
- 19वीं–20वीं सदी: ज़्यादा लोगों को वोट का अधिकार मिला; फिर समानता के क़ानून आए।
- 1948 मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा (संयुक्त राष्ट्र), दूसरे विश्व युद्ध की भयावहता के बाद।
- 1950 यूरोपीय मानव अधिकार कन्वेंशन (काउंसिल ऑफ़ यूरोप), स्ट्रासबर्ग में अदालत के साथ; ब्रिटेन ने इसे लिखने में मदद की।
- 1998 मानव अधिकार अधिनियम (2000 से लागू): कन्वेंशन के अधिकारों को ब्रिटेन के क़ानून का हिस्सा बनाया, ताकि लोग ब्रिटेन की अदालतों में इनका दावा कर सकें। सरकारी संस्थाओं को इनका सम्मान करना है।
सज़ा और उसके लक्ष्य
दोषी पाए जाने के बाद जज या मजिस्ट्रेट सज़ा तय करते हैं। वे सज़ा के दिशानिर्देश मानते हैं और अपराध की गंभीरता, नुक़सान, गंभीर करने वाले कारक (जैसे पहले के अपराध, हथियार) और नरमी के कारक (जैसे जल्दी अपराध मानना, सच्चा पछतावा, कम उम्र) देखते हैं।
सज़ा के पाँच लक्ष्य
- दंड (प्रतिशोध): अपराधी को उसके किए का फल।
- निवारण: इस अपराधी और दूसरों को अपराध से रोकना।
- सुधार (पुनर्वास): अपराधी को बदलने में मदद, जैसे नशा-इलाज, पढ़ाई।
- जनता की सुरक्षा: ख़तरनाक लोगों को दूसरों से दूर रखना।
- क्षतिपूर्ति: अपराधी पीड़ित या समाज की भरपाई करे, जैसे मुआवज़ा, बिना वेतन काम।
सज़ा के प्रकार (हल्की से कड़ी)
- चेतावनी देकर छोड़ना (discharge): पूरी छूट, या शर्त के साथ (तय समय में फिर अपराध न हो तो सज़ा नहीं)।
- जुर्माना: पैसे देना; सबसे आम सज़ा।
- सामुदायिक आदेश: बिना वेतन काम, कर्फ़्यू, इलाज, निगरानी।
- निलंबित सज़ा: जेल तभी जब फिर अपराध करे या शर्त तोड़े।
- जेल: गंभीर अपराधों के लिए; युवा अपराधी युवा संस्थानों में।
अपराध दर और अपराध की रोकथाम
अपराध कैसे नापा जाता है
- पुलिस में दर्ज अपराध: जो अपराध पुलिस को बताए और दर्ज हुए। जिनकी शिकायत ही नहीं हुई, वे छूट जाते हैं।
- पीड़ित सर्वेक्षण (जैसे राष्ट्रीय अपराध सर्वेक्षण): बहुत सारे लोगों से पूछा जाता है कि उनके साथ क्या अपराध हुए, बिना शिकायत वाले भी।
इंग्लैंड और वेल्स समेत कई देशों में पीड़ित सर्वेक्षण के अनुसार कुल अपराध 1990 के दशक के मध्य से काफ़ी घटा है, हालाँकि ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे कुछ अपराध बढ़े हैं।
अपराध दर क्यों बदलती है
ग़रीबी और बेरोज़गारी, नशा और शराब, युवाओं की संख्या, बेहतर सुरक्षा (कार अलार्म, ताले), तकनीक (जो नए ऑनलाइन अपराध लाती है), पुलिस की मौजूदगी, और लोग शिकायत करने को कितने तैयार हैं।
अपराध रोकना
- स्थितिजन्य: अपराध कठिन बनाना: सड़क की रोशनी, CCTV, ताले, सामान पर निशान, सुरक्षित गलियाँ।
- सामाजिक: कारणों पर काम: युवा क्लब, शिक्षा, रोज़गार, नशा-इलाज।
- सामुदायिक: पड़ोस निगरानी, सामुदायिक पुलिस, पुनर्स्थापनात्मक न्याय।
खुद आज़माइए: जज बनिए
एक मामला लीजिए: 18 साल का युवक, पहले कोई अपराध नहीं, फ़ोन चुराता है, अपराध मान लेता है और माफ़ी माँगता है। एक गंभीर करने वाला और एक नरमी वाला कारक लिखिए। एक सज़ा चुनिए और बताइए कि वह पाँच में से किन लक्ष्यों को पूरा करती है। दोस्त से तुलना कीजिए: क्या आपने लक्ष्यों को एक जैसा तौला?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पड़ाव: 1215 मैग्ना कार्टा → 1679 हेबियस कॉर्पस → 1689 बिल ऑफ़ राइट्स → 1948 UDHR → 1950 ECHR → 1998 मानव अधिकार अधिनियम
- सज़ा के लक्ष्य: दंड, निवारण, सुधार, जनता की सुरक्षा, क्षतिपूर्ति
- सज़ाएँ: छोड़ना → जुर्माना → सामुदायिक आदेश → निलंबित सज़ा → जेल
- अपराध नापना: पुलिस में दर्ज अपराध + पीड़ित सर्वेक्षण
हल किए गए उदाहरण
1. मैग्ना कार्टा का ज़्यादातर हिस्सा अब क़ानून नहीं है, फिर भी उसकी चर्चा क्यों होती है?
उसने पहली बार यह विचार रखा कि शासक क़ानून के नीचे है और बिना क़ानूनी फ़ैसले सज़ा नहीं हो सकती। क़ानून के शासन और निष्पक्ष सुनवाई के इन विचारों ने दुनिया भर के अधिकार-दस्तावेज़ों को आकार दिया।
2. एक व्यक्ति को पार्क साफ़ करने के 150 घंटे बिना वेतन काम की सज़ा मिली। यह किन लक्ष्यों को पूरा करती है?
दंड (ख़ाली समय गया), क्षतिपूर्ति (समाज की भरपाई) और शायद सुधार (नियमित दिनचर्या और ज़िम्मेदारी सीखना)।
3. पुलिस में दर्ज अपराध बढ़े, पर पीड़ित सर्वेक्षण में अपराध घटा। दोनों सच कैसे?
हो सकता है पुलिस अब ज़्यादा ध्यान से दर्ज करती हो, या लोग ज़्यादा शिकायत करते हों। सर्वेक्षण बिना शिकायत वाले अपराध भी गिनता है, इसलिए असली स्तर घटता दिखा सकता है।
4. मानव अधिकार अधिनियम 1998 ने ब्रिटेन के लोगों के लिए क्या बदला?
इसने यूरोपीय कन्वेंशन के अधिकारों को ब्रिटेन के क़ानून का हिस्सा बनाया, ताकि लोग सिर्फ़ स्ट्रासबर्ग नहीं, ब्रिटेन की अदालतों में भी अधिकारों का मामला ला सकें, और सरकारी संस्थाओं को इनका सम्मान करना पड़े।
आम गलतियाँ
- सोचना कि 1215 में मैग्ना कार्टा ने सबको अधिकार दिए। शुरू में यह मुख्य रूप से सामंतों और स्वतंत्र लोगों के लिए था; इसके विचार बाद में फैले।
- यूरोपीय मानव अधिकार कन्वेंशन (काउंसिल ऑफ़ यूरोप) को यूरोपीय संघ समझना। ये अलग संगठन हैं।
- कहना कि जेल सबसे आम सज़ा है। सबसे आम जुर्माना है।
- पुलिस के आँकड़ों को अपराध की पूरी सच्चाई मानना। बहुत से अपराधों की शिकायत ही नहीं होती, इसलिए पीड़ित सर्वेक्षण भी होते हैं।