दीवानी कार्यवाही के प्रकार
दीवानी कानून लोगों को अधिकार देता है। दीवानी प्रक्रिया बताती है कि उन्हें बचाने के लिए अदालत से कैसे संपर्क करें। आपराधिक मामलों के उलट यहाँ किसी को सज़ा नहीं मिलती। अदालत विवाद निष्पक्षता से सुलझाती है, और हारने वाला आम तौर पर पैसा देता है या जो बनता है वह करता है।
कार्यवाही के आम प्रकार (नाम यूक्रेन की दीवानी प्रक्रिया संहिता से हैं, और कई देशों में मिलते-जुलते हैं):
- दावा (वाद) कार्यवाही: सामान्य रास्ता। वादी कहता है प्रतिवादी ने अधिकार तोड़ा, प्रतिवादी जवाब देता है, अदालत दोनों को सुनकर फ़ैसला करती है।
- आदेश (रिट) कार्यवाही: छोटे, साफ़ पैसे के दावों या ऐसी माँगों के लिए तेज़ रास्ता जिन पर विवाद नहीं दिखता। न्यायाधीश बिना सुनवाई के आदेश जारी करता है; कर्ज़दार आपत्ति करे तो मामला सामान्य दावा बन जाता है।
- विशेष कार्यवाही: कोई विरोधी नहीं। अदालत कानूनी रूप से अहम तथ्य या स्थिति मानती है, जैसे किसी को लापता या मृत घोषित करना, या परिवार से जुड़ा तथ्य।
कौन-सी अदालत? सामान्य, वाणिज्यिक (आर्बिट्रेज) और ऊँची अदालतें
कहाँ दायर करें, यह इस पर है कि विवाद में कौन है और विवाद किस बारे में है।
- स्थानीय सामान्य अदालत: लोगों, परिवारों, पड़ोसियों, उपभोक्ताओं के ज़्यादातर विवाद।
- वाणिज्यिक अदालत: कारोबारों के बीच विवाद, जैसे अनुबंध, आपूर्ति, कंपनी के नियम और दिवालियापन। कई देशों में इन्हें आर्बिट्रेज अदालत कहते हैं (यह निजी मध्यस्थता से अलग है, जिसमें पक्ष सरकारी अदालतों के बाहर अपना पंच चुनते हैं)।
- अपील अदालत: पहले फ़ैसले से असहमति पर तथ्य और कानून दोबारा जाँचती है।
- सर्वोच्च (कैसेशन) अदालत: आख़िरी सीढ़ी; देखती है कि कानून ठीक लगा या नहीं।
हर सीढ़ी पर अपील की समय-सीमा है। दायर करने से पहले क्षेत्राधिकार (कौन-सी अदालत सुन सकती है) देखिए; ग़लत अदालत दावा लौटा देती है।
दावा-पत्र
दीवानी मामला तब शुरू होता है जब वादी अदालत को लिखित दावा-पत्र देता है। अच्छे दावा-पत्र में होता है:
- अदालत का नाम जिसे वह संबोधित है।
- पक्षकार: वादी और प्रतिवादी के नाम, पते (और संपर्क)।
- माँग: ठीक क्या चाहिए: पैसा दो, चीज़ लौटाओ, कोई काम बंद करो।
- तथ्य और कानून: क्या हुआ, कब, और कौन-सा नियम टूटा।
- सबूत: दस्तावेज़ों और गवाहों की सूची जो तथ्य साबित करें।
- शुल्क और हस्ताक्षर: अदालती शुल्क की रसीद (अक्सर दावे की रकम का प्रतिशत) और वादी के दस्तख़त। एक प्रति दूसरे पक्ष को जाती है।
कुछ छूट जाए तो न्यायाधीश दावा लौटाता है और सुधारने का समय देता है।
दीवानी कार्यवाही के पक्षकार
- अदालत (न्यायाधीश): स्वतंत्र; मामला चलाता और फ़ैसला करता है।
- वादी: दावा लाता है।
- प्रतिवादी: जिसके विरुद्ध दावा है; उसे जवाब देने का अधिकार है।
- तीसरे पक्ष: जिनके अधिकार नतीजे से प्रभावित हो सकते हैं और जो किसी पक्ष की ओर से या अपने नाम से मामले में जुड़ते हैं।
- प्रतिनिधि (वकील): पक्ष की ओर से बोलते हैं।
- गवाह और विशेषज्ञ: गवाह जो देखा वह बताते हैं; विशेषज्ञ विशेष ज्ञान वाली राय देते हैं, जैसे इमारत का सर्वे।
सिद्धांत: पक्षों की बराबरी, दोनों को बहस का अधिकार, हर पक्ष अपना दावा खुद साबित करे, और सुनवाई आम तौर पर खुली हो।
दीवानी मामले के चरण
- दायर करना: शुल्क के साथ दावा जमा होता है।
- स्वीकार: न्यायाधीश जाँचकर मामला खोलता है, या सुधार के लिए लौटाता है।
- तैयारी: प्रतिवादी जवाब भेजता है; दोनों दस्तावेज़ों का आदान-प्रदान और गवाहों के नाम देते हैं; न्यायाधीश समझौते में मदद की कोशिश कर सकता है।
- मूल सुनवाई: शुरुआत, सबूत, बहस, अंतिम बातें।
- फ़ैसला: अदालत कारण सहित तय करती है।
- अपील और अमल: समय-सीमा में अपील; अंतिम होने पर बेलिफ़ अमल कराता है (खाते से पैसा लेना, संपत्ति ज़ब्त करना)।
करके देखिए: सरल दावा लिखिए
कोई छोटा विवाद सोचिए: दोस्त ने आपका क्रिकेट बैट माँगकर तोड़ दिया। काग़ज़ पर छह शीर्षक लिखिए (अदालत, पक्षकार, माँग, तथ्य, सबूत, शुल्क)। हर एक में एक पंक्ति भरिए। फिर 3D में जाँचिए कि कौन-सी कार्यवाही और कौन-सी अदालत ठीक रहेगी।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- तीन कार्यवाहियाँ: दावा (विवाद) · आदेश (साफ़ कर्ज़) · विशेष (तथ्य मानना)
- अदालतें: स्थानीय → अपील अदालत → सर्वोच्च अदालत; कारोबारी विवाद → वाणिज्यिक (आर्बिट्रेज) अदालत
- दावा-पत्र: अदालत · पक्षकार · माँग · तथ्य और कानून · सबूत · शुल्क और हस्ताक्षर
- चरण: दायर → स्वीकार → तैयारी → सुनवाई → फ़ैसला → अपील या अमल
हल किए गए उदाहरण
1. पड़ोसी मानता है कि उस पर आपका थोड़ा पैसा बकाया है और लिखकर भी दिया है, पर चुकाता नहीं। कौन-सी कार्यवाही सबसे तेज़ है?
आदेश (रिट) कार्यवाही। कर्ज़ साफ़ और बिना विवाद का है, इसलिए न्यायाधीश बिना पूरी सुनवाई के आदेश जारी कर सकता है। वह आपत्ति करे तो मामला सामान्य दावा बन जाता है।
2. एक बेकरी कंपनी और आटा आपूर्तिकर्ता देर से हुई डिलीवरी के अनुबंध पर असहमत हैं। कौन-सी अदालत?
वाणिज्यिक (आर्बिट्रेज) अदालत, क्योंकि दोनों पक्ष कारोबार हैं। यह दावा (वाद) मामला है।
3. परिवार चाहता है कि सालों की ख़बर न मिलने पर अदालत एक रिश्तेदार को लापता घोषित करे। यह कौन-सी कार्यवाही है?
विशेष कार्यवाही। कोई विरोधी नहीं है; अदालत सिर्फ़ कानूनी रूप से अहम तथ्य मानती है।
4. अदालती शुल्क का प्रमाण न होने पर न्यायाधीश दावा-पत्र लौटा देता है। वादी को क्या करना चाहिए?
न्यायाधीश के दिए समय में शुल्क की रसीद (और बाक़ी कमियाँ) जोड़कर दोबारा दायर करे।
आम गलतियाँ
- सोचना कि दीवानी मामले में हारने वाला जेल जाता है। दीवानी मामले अधिकार तय करते हैं; हारने वाला पैसा देता है या जो बनता है वह करता है।
- वादी और प्रतिवादी को उलझाना। वादी मामला शुरू करता है; प्रतिवादी जवाब देता है।
- ग़लत अदालत में दायर करना। देखिए पक्ष कारोबार हैं या नहीं और किस अदालत का क्षेत्राधिकार है।
- सबूतों की सूची या शुल्क की रसीद छोड़ देना। न्यायाधीश दावा लौटा देगा।