ताल वाद्य एकल क्या है?
ताल (आघात) वाद्य वे हैं जो मारने, हिलाने या रगड़ने से बजते हैं। एकल (सोलो) वह प्रस्तुति है जिसे अकेला कलाकार बजाता है, चाहे पीछे हल्की संगत हो या न हो। ताल वाद्य का एकल वादक एक वाद्य (तबला, स्नेयर ड्रम, मरिम्बा) या कई वाद्यों का समूह (ड्रम किट, ड्रम, घंटियाँ और झाँझ) इस्तेमाल कर सकता है।
यहाँ कोई गायक या धुन वाला वाद्य नहीं होता, इसलिए वादक को सिर्फ़ लय, आवाज़ की ऊँच-नीच और ध्वनि के रंग से सुनने वाले को बाँधे रखना होता है।
सुरीले और बिना सुर के ताल वाद्य
सुरीले ताल वाद्य साफ़ स्वर और धुन भी बजा सकते हैं: ज़ाइलोफ़ोन, मरिम्बा, वाइब्राफ़ोन, ग्लॉकेनस्पील, टिम्पनी और तबले का दायाँ हिस्सा। पट्टी छोटी या खाल ज़्यादा कसी हो तो स्वर ऊँचा होता है।
बिना सुर के ताल वाद्य ऐसी आवाज़ देते हैं जिसमें साफ़ स्वर नहीं होता: स्नेयर ड्रम, बास ड्रम, झाँझ, डफली, क्लेव्स। ये लय और रंग देते हैं।
- खाल वाले ड्रम (अवनद्ध वाद्य): तनी हुई खाल से आवाज़।
- पट्टियाँ, घंटियाँ और झाँझ (घन वाद्य): पूरा ठोस हिस्सा काँपता है।
तकनीक: चोट की जगह, बल और स्टिक
एकल वादक हाथों या स्टिक से आवाज़ को सँभालता है।
- चोट की जगह: खाल के बीच में आवाज़ गहरी और गोल; किनारे के पास तेज़ और छोटी। झाँझ पर किनारा गुंबद से ज़्यादा गूँजता है।
- बल (डायनामिक्स): स्टिक जितनी ऊँची, आवाज़ उतनी तेज़। धीमे को पियानो (p) और ज़ोर के को फ़ोर्टे (f) कहते हैं। इनके बीच बदलने को डायनामिक्स कहते हैं।
- चोट का प्रकार: उछलती चोट में स्टिक वापस उछलती है और आवाज़ खुली रहती है; रुकी हुई चोट में स्टिक खाल पर दबी रहती है और आवाज़ छोटी और सूखी आती है।
- स्टिक और मैलेट: कड़ी स्टिक से तेज़ आवाज़; नरम फ़ेल्ट मैलेट से पट्टियों पर मुलायम आवाज़। तबले में उँगलियाँ और हथेली इस्तेमाल होती हैं।
ढीले हाथ, स्थिर ताल और बराबर चोट, गति से ज़्यादा ज़रूरी हैं।
एकल बनाना और अभ्यास करना
जो एकल सिर्फ़ तेज़ हो, वह सुनने में थका देता है। उसे एक आकार दो:
- थीम: छोटी, याद रहने वाली लय, जैसे 4 मात्राएँ।
- दोहराव: उसे फिर बजाओ ताकि सुनने वाले को याद हो जाए।
- बदलाव: कोई एक चीज़ बदलो (नया ज़ोर, नया ड्रम, अलग डायनामिक्स)।
- चढ़ाव: ज़ोर, भराव या गति बढ़ाओ।
- अंत: साफ़ आख़िरी चोट, अक्सर थोड़ी चुप्पी के बाद।
पहले मेट्रोनोम या ताली के साथ धीरे अभ्यास करो, फिर गति बढ़ाओ। ख़ुद को रिकॉर्ड करके सुनो। विराम (चुप्पी) इस्तेमाल करो: चुप्पी अगली आवाज़ को ज़्यादा असरदार बनाती है।
करके देखें
मेज़ और पेंसिल लो। 4 मात्राओं की लय बनाओ। उसे दो बार धीमे बजाओ, फिर आख़िरी मात्रा बदलो, फिर दोनों हाथों से ज़ोर से बजाओ। बताओ कौन-सा हिस्सा थीम, बदलाव और चढ़ाव है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- एकल (सोलो) = एक कलाकार, अकेला
- एकल वादक के चार नियंत्रण: वाद्य, जगह, बल, लय
- सुरीले ताल वाद्य: साफ़ स्वर (ज़ाइलोफ़ोन, मरिम्बा, टिम्पनी)
- बिना सुर के ताल वाद्य: साफ़ स्वर नहीं (स्नेयर, झाँझ, डफली)
- लंबी पट्टी या ढीली खाल = नीचा स्वर
- ऊँची चोट = तेज़ आवाज़ (डायनामिक्स: धीमा p, ज़ोर का f)
- एकल की योजना: थीम, दोहराव, बदलाव, चढ़ाव, अंत
हल किए गए उदाहरण
1. सुरीले और बिना सुर के में बाँटो: मरिम्बा, स्नेयर ड्रम, झाँझ, टिम्पनी।
सुरीले: मरिम्बा और टिम्पनी (साफ़ स्वर बजाते हैं)। बिना सुर के: स्नेयर ड्रम और झाँझ (लय और रंग देते हैं, साफ़ स्वर नहीं)।
2. एकल वादक 4 मात्राओं की थीम बजाता है, एक बार दोहराता है, 4 मात्राओं का बदलाव और 4 मात्राओं का चढ़ाव बजाता है। अंत से पहले कुल कितनी मात्राएँ?
थीम 4 + दोहराव 4 + बदलाव 4 + चढ़ाव 4 = 16 मात्राएँ।
3. एक वादिका ड्रम से पहले गहरी, गर्म आवाज़ और फिर तेज़, चमकदार ज़ोर चाहती है। वह दोनों बार कहाँ मारेगी?
गहरी, गर्म आवाज़ के लिए खाल के बीच में। तेज़, चमकदार ज़ोर के लिए किनारे (रिम) के पास।
4. एक एकल उबाऊ लगता है क्योंकि हर चोट बराबर ज़ोर की है और गति कभी नहीं बदलती। दो सुधार बताओ।
डायनामिक्स जोड़ो (धीमे और ज़ोर के हिस्से) और योजना बनाओ: बदलाव में लय थोड़ी बदलो और ज़ोरदार अंत तक चढ़ाव करो। विराम इस्तेमाल करना भी मदद करता है।
आम गलतियाँ
- जितना हो सके उतना तेज़ बजाना। स्थिर, साफ़ ताल जल्दबाज़ी वाली उलझी ताल से बेहतर लगती है।
- हर चोट एक ही ज़ोर से मारना। एकल में धीमा और ज़ोर का, दोनों चाहिए।
- यह सोचना कि सब ताल वाद्य स्वर बजाते हैं। स्नेयर ड्रम और झाँझ बिना सुर के होते हैं।
- स्टिक को बहुत कसकर पकड़ना। कसी पकड़ स्टिक को उछलने नहीं देती और आवाज़ बेजान हो जाती है।