क्षेत्रीकरण क्या है?
क्षेत्रीकरण (zonation, या zonality) का अर्थ है कि प्राकृतिक लक्षण पट्टियों या क्षेत्रों में बदलते हैं। हर क्षेत्र में तापमान, वर्षा, मिट्टी और पौधे लगभग एक जैसे होते हैं।
ऐसा क्यों होता है? मुख्य कारण सूर्य की गर्मी है। पृथ्वी गोल है, इसलिए सूर्य अलग-अलग जगह को अलग मात्रा में गर्म करता है। गर्मी जलवायु तय करती है। जलवायु पौधे और मिट्टी तय करती है।
दो मुख्य प्रकार जानने ज़रूरी हैं:
- अक्षांशीय क्षेत्रीकरण: पूर्व-पश्चिम फैली पट्टियाँ, जो भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर बदलती हैं।
- ऊर्ध्वाधर (ऊँचाई के अनुसार) क्षेत्रीकरण: पर्वत पर ऊपर चढ़ते हुए एक के ऊपर एक रखी पट्टियाँ।
अक्षांशीय क्षेत्रीकरण
भूमध्य रेखा पर सूर्य आसमान में ऊँचा रहता है, इसलिए किरणें लगभग सीधी पड़ती हैं और छोटे क्षेत्र को गर्म करती हैं। ध्रुवों के पास किरणें तिरछी होती हैं और बड़े क्षेत्र में फैलती हैं, इसलिए हर वर्ग मीटर को कम गर्मी मिलती है। इसी कारण अक्षांश बढ़ने पर तापमान घटता है।
प्राकृतिक पट्टियाँ गर्मी और वर्षा के पीछे चलती हैं। एक सरल आदर्श रूप में, भूमध्य रेखा से उत्तरी ध्रुव की ओर:
- विषुवतीय पट्टी: साल भर गर्म और नम, वर्षावन।
- उष्णकटिबंधीय पट्टी: गर्म, गीले-सूखे मौसम, सवाना घास और मानसूनी वन।
- उपोष्ण शुष्क पट्टी: नीचे उतरती सूखी हवा, इसलिए कई जगह मरुस्थल और झाड़ियाँ।
- शीतोष्ण पट्टी: चार ऋतुएँ, चौड़ी पत्ती वाले व मिश्रित वन या घास के मैदान।
- शीत शीतोष्ण (उप-ध्रुवीय) पट्टी: लंबी ठंडी सर्दी, टैगा (शंकुधारी वन)।
- ध्रुवीय पट्टी: बहुत ठंडी, टुंड्रा और बर्फ़।
दक्षिणी गोलार्ध में यही पट्टियाँ उलटे क्रम (दर्पण जैसी) में हैं। असली मानचित्र में पट्टियाँ सीधी धारियाँ नहीं हैं। महासागर, पर्वत और समुद्री धाराएँ उन्हें मोड़ देते हैं। उसी अक्षांश पर स्थल और समुद्र के कारण पूर्व-पश्चिम अंतर भी होते हैं (तट गीला हो सकता है और महाद्वीप का भीतरी भाग सूखा)। जो लक्षण पट्टियों का पालन नहीं करते उन्हें अक्षेत्रीय (non-zonal) कहते हैं, जैसे कोई पर्वत श्रृंखला या ज्वालामुखी द्वीप।
ऊर्ध्वाधर क्षेत्रीकरण
ऊपर जाने पर हवा पतली और ठंडी होती जाती है। औसतन हर 1 किमी ऊँचाई पर तापमान लगभग 6.5 °C घटता है। इसे ह्रास दर (lapse rate) कहते हैं।
इसलिए ऊँचे पर्वत पर पट्टियों की परतें मिलती हैं। भूमध्य रेखा के पर्वत पर तल से शिखर तक:
- तल पर उष्णकटिबंधीय वर्षावन।
- चौड़ी पत्ती वाला (पर्वतीय) वन।
- शंकुधारी वन।
- अल्पाइन घास और खुली चट्टान।
- शिखर पर बर्फ़।
जिस रेखा के ऊपर साल भर बर्फ़ टिकी रहती है उसे हिम रेखा (snow line) कहते हैं। यह भूमध्य रेखा के पास ऊँची (लगभग 4.5 से 5 किमी) और ध्रुवों के पास नीची (समुद्र तल के पास) होती है। इसलिए ध्रुव की ओर जाने पर पर्वत पर पट्टियाँ कम और हिम रेखा नीची मिलती है।
और बातें भी मायने रखती हैं। सूर्य की ओर वाली ढलान छाया वाली ढलान से गर्म होती है। वर्षा लाने वाली हवा की ओर वाली ढलान दूसरी ओर की सूखी ढलान से गीली होती है। इसीलिए पर्वत के दोनों ओर पट्टियाँ अलग हो सकती हैं।
करके देखिए
- टॉर्च को मेज़ पर सीधा नीचे चमकाइए, फिर तिरछा। कौन-सा धब्बा छोटा और चमकीला है? कौन-सा बड़ा और धुंधला? यही भूमध्य रेखा और ध्रुव का अंतर है।
- 3D में "भूमध्य रेखा पर" चुनिए और 4 किमी तक चढ़िए। कौन-सी पट्टी है? अब "ध्रुव के पास" चुनिए। किस ऊँचाई पर बर्फ़ शुरू होती है?
- पहले अनुमान लगाइए: समुद्र तल पर 27 °C हो तो 2 किमी ऊँचाई पर तापमान क्या होगा? फिर स्लाइडर से जाँचिए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- h किमी ऊँचाई पर तापमान = समुद्र तल का तापमान − 6.5 × h
- ह्रास दर = 6.5 °C प्रति किमी (लगभग 150 मीटर पर 1 °C)
- हिम रेखा की ऊँचाई = समुद्र तल का तापमान ÷ 6.5 (किमी में, जहाँ तापमान 0 °C हो)
- अक्षांशीय क्षेत्रीकरण: भूमध्य रेखा से ध्रुव की ओर पट्टियाँ बदलती हैं
- ऊर्ध्वाधर क्षेत्रीकरण: पर्वत के तल से शिखर तक पट्टियाँ बदलती हैं
हल किए गए उदाहरण
1. भूमध्य रेखा के एक पर्वत के तल पर 27 °C है। 3 किमी ऊँचाई पर तापमान निकालिए।
घटाव = 6.5 × 3 = 19.5 °C। तापमान = 27 − 19.5 = 7.5 °C। यह शंकुधारी वन के लिए काफ़ी ठंडा है।
2. इसी पर्वत पर 0 °C रेखा (हिम रेखा) लगभग कितनी ऊँचाई पर होगी?
ऊँचाई = 27 ÷ 6.5 = 4.15 किमी। लगभग 4.2 किमी के ऊपर बर्फ़ टिकी रहेगी।
3. मध्य अक्षांश पर समुद्र तल का तापमान 14 °C है। वहाँ हिम रेखा की ऊँचाई निकालकर भूमध्य रेखा से तुलना कीजिए।
ऊँचाई = 14 ÷ 6.5 = 2.15 किमी। यह भूमध्य रेखा के पर्वत (4.15 किमी) से लगभग 2 किमी नीची है। ध्रुव के पास हिम रेखा नीची होती है।
आम गलतियाँ
- क्षेत्रीकरण और जलवायु को एक ही समझना। जलवायु कारण है; क्षेत्रीकरण उससे बनी पट्टियों का रूप है।
- सोचना कि असली दुनिया में पट्टियाँ बिल्कुल सीधी धारियाँ हैं। महासागर, धाराएँ और पर्वत उन्हें मोड़ते हैं।
- भूलना कि तापमान सिर्फ़ अक्षांश से नहीं, ऊँचाई से भी घटता है।
- दोनों को मिला देना: अक्षांशीय पट्टियाँ पृथ्वी पर पूर्व-पश्चिम फैली हैं; ऊर्ध्वाधर पट्टियाँ पर्वत पर एक के ऊपर एक हैं।