निजी और साझा स्थान
निजी स्थान तुम्हारे चारों ओर का गुब्बारा है। पैर हिलाए बिना हाथ-पैर हर तरफ़ फैलाओ: जहाँ तक पहुँचे, वही तुम्हारी निजी जगह है। चलने पर यह तुम्हारे साथ चलती है।
साझा स्थान (सामान्य स्थान) पूरा कमरा या मंच है जहाँ सब नर्तक चलते हैं। साझा करने के नियम:
- चलने से पहले आगे और आसपास देखो।
- अपना गुब्बारा दूसरों के गुब्बारे से मत छुआओ।
- फ़र्श की ख़ाली जगहें भरो ताकि समूह संतुलित दिखे।
- टकराने वाले हो तो तुरंत रुक जाओ।
स्तर और दिशाएँ
स्तर
स्तर का मतलब है कि शरीर फ़र्श से कितना ऊँचा या नीचा है।
- निम्न स्तर: झुकना, घुटनों पर बैठना, लेटना या रेंगना।
- मध्यम स्तर: खड़े होना, चलना, घुटने मोड़ना।
- ऊँचा स्तर: पंजों पर खड़े होना, कूदना या बाँहें ऊपर तानना।
दिशाएँ
दिशा यानी शरीर किधर जाता या देखता है: आगे, पीछे, बाएँ, दाएँ और तिरछी भी। दिशा बदलने से रास्ता बनता है और रास्ते से आकृति, जैसे टेढ़ा-मेढ़ा या गोल।
स्तर और दिशा मिलाओ: नीचे-नीचे आगे जाओ, फिर मुड़कर ऊँचे उठो। इससे नृत्य में विविधता आती है और कहानी बनती है।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- मुख्य शब्द: निजी स्थान = तुम्हारे चारों ओर का गुब्बारा, जहाँ तक पहुँच हो
- मुख्य शब्द: साझा स्थान = वह पूरा फ़र्श जिसे सब नर्तक इस्तेमाल करते हैं
- मुख्य शब्द: स्तर = शरीर की निम्न, मध्यम या ऊँची ऊँचाई
- मुख्य शब्द: दिशा = आगे, पीछे, बाएँ, दाएँ या तिरछी
- याद रखो: गुब्बारा, साझा, स्तर, दिशा
हल किए गए उदाहरण
1. छोटे फ़र्श पर चार नर्तक हैं। टकराने से कैसे बचें?
हर नर्तक बाँहें अपने निजी गुब्बारे में रखे, चलने से पहले देखे, फ़र्श की ख़ाली जगह में फैले और दूसरों के पास धीमा हो या रुक जाए।
2. अलग-अलग स्तरों वाले तीन क़दमों का रास्ता बनाओ।
चाल 1: निम्न स्तर पर रेंगकर आगे। चाल 2: मध्यम स्तर पर खड़े होकर दाएँ मुड़ना। चाल 3: ऊँचे स्तर पर पंजों पर बाँहें ऊपर कर कूदना। तीन स्तर, दो दिशाएँ।
3. नर्तक 'दुख से ख़ुशी' दिखाना चाहता है। स्तर कैसे मदद करेंगे?
नीचे फ़र्श पर सिकुड़कर शुरू करो (दुख)। धीरे-धीरे मध्यम स्तर से उठो और ऊँचे स्तर पर बाँहें चौड़ी करके ख़त्म करो (ख़ुशी)।
आम गलतियाँ
- यह सोचना कि निजी जगह एक ही जगह रहती है। यह तुम्हारे साथ चलती है।
- बिना देखे चलना। पहले साझा जगह देखो।
- सिर्फ़ मध्यम स्तर इस्तेमाल करना। निम्न और ऊँचा स्तर नृत्य को भरपूर बनाते हैं।
- सिर्फ़ एक दिशा चुनना। दिशा बदलने से आकृतियाँ रोचक बनती हैं।