पर्वत से प्रेरित नृत्य
पर्वत की तरह चलने के लिए उसके गुण सोचो: ऊँचा, मज़बूत, स्थिर, भारी, नुकीला।
- चौड़े, जमे हुए पैर (मज़बूत आधार)।
- बाँहें और शरीर तिकोन या चोटी बनाएँ।
- धीमी, भारी, स्थिर चालें; ऐसे ठहराव जो चट्टान जैसे लगें।
पानी से प्रेरित नृत्य
पानी शांत झील, नदी, लहरें या बारिश हो सकता है। उसके गुण हैं बहना, हल्कापन, घुमाव, लगातार चलना।
- बाँहें और रीढ़ लहरें बनाएँ।
- शरीर बिना झटकों के लहराए, मुड़े और घूमे।
- चालें एक-दूसरे में लहरियों की तरह घुलें।
फ़र्श के रास्ते: सीधी रेखा पर्वत पर, टेढ़ी-मेढ़ी रेखा झरने पर, लहरदार रेखा नदी पर जँचती है।
खुली जगह में नाचना
बाहर नाचना बहुत अच्छा है, पर वह मंच नहीं है। शुरू करने से पहले:
- ज़मीन जाँचो: पत्थर, डंडियाँ और काँच हटाओ; फिसलन या बहुत ऊबड़-खाबड़ हिस्सों से बचो।
- सही जूते पहनो या नंगे पैर सिर्फ़ साफ़, सुरक्षित घास पर नाचो।
- पानी साथ रखो और बार-बार पियो।
- धूप और मौसम देखो: दोपहर की गर्मी से बचो, छाया ढूँढो, बिजली या तेज़ बारिश में रुक जाओ।
- ढलान और किनारों का ध्यान रखो (खाई, पानी)।
- प्रकृति का सम्मान करो: कचरा घर ले जाओ और पौधों को नुकसान मत पहुँचाओ।
करके देखो
घर या पार्क में: पहले 8 गिनती पर्वत बनो (नीचे और मज़बूत, लहराना नहीं)। फिर 8 गिनती पानी बनो (चलते रहो, मुड़ो और लहराओ)। कौन सा कठिन है? फिर टेढ़े-मेढ़े रास्ते पर चलो, फिर लहरदार पर, और हर का एहसास देखो।
3D में: बाहर वाले चरण में बटन दबाकर पत्थर हटाओ और सुरक्षा की गिनती 2/3 से 3/3 होते देखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- पर्वत = ऊँचा + मज़बूत + स्थिर + भारी
- पानी = बहता + हल्का + घुमावदार + लगातार
- बाहर सुरक्षा = ज़मीन जाँचो + सही जूते + पानी + धूप व ढलान
हल किए गए उदाहरण
1. नदी के लिए कौन सा फ़र्श का रास्ता जँचेगा: सीधा, टेढ़ा-मेढ़ा या लहरदार?
लहरदार। चिकनी, घुमावदार रेखा बहाव दिखाती है।
2. नर्तक चौड़ा खड़ा है, बाँहें तिकोन की तरह ऊपर हैं और धीरे चलता है। कौन सा दृश्य दिखता है?
पर्वत: चौड़ा आधार, चोटी का आकार और धीमी भारी चाल।
3. बाहर की जाँच-सूची में 3 बातें हैं और तुमने 2 कर ली हैं। कितना हुआ और कितना बचा?
2/3 हुआ। एक बात बची है।
4. तुम मई में दोपहर 1 बजे धूप वाले मैदान में नृत्य सोच रहे हो। क्या बदलोगे?
सुबह जल्दी या शाम को करो, या छाया ढूँढो, और पानी साथ रखो, क्योंकि दोपहर की गर्मी जोखिम भरी है।
आम गलतियाँ
- बिना जाँचे ऊबड़-खाबड़ या पथरीली ज़मीन पर नाचना।
- पर्वत और पानी की चालें एक जैसी बना देना।
- सोचना कि प्रकृति नृत्य हूबहू नक़ल है। बस उसका गुण (स्थिर या बहता) पकड़ना है।
- गर्म दिन में पानी और छाया भूल जाना।