कहानी और कथानक
कहानी (story) समय क्रम में सारी घटनाएँ हैं, वे भी जो हम नहीं देखते। कथानक (plot) वह है जो फ़िल्म दिखाती है और जिस क्रम में दिखाती है। फ़िल्म अंत से शुरू हो सकती है, पीछे जा सकती है (फ़्लैशबैक) या सालों छोड़ सकती है।
क्रम क्यों बदलें? रहस्य और हैरानी के लिए, या कारण जानने से पहले ही हमें परवाह कराने के लिए।
तीन अंक की संरचना
- अंक 1, शुरुआत: नायक और दुनिया से मिलते हैं, और कुछ घटता है जो समस्या शुरू करता है।
- अंक 2, टकराव: नायक कोशिश करता है, असफल होता है और समस्या बढ़ती है। यह सबसे लंबा हिस्सा है।
- अंक 3, अंत: चरम (तनाव की चोटी) और फिर वह अंत जहाँ सब शांत होता है।
टोडोरोव का संतुलन
टज़्वेतान टोडोरोव ने कहानी को पाँच चरणों में बताया: (1) संतुलन (शांत दुनिया), (2) गड़बड़ी (शांति टूटती है), (3) पहचान (पात्र समस्या देखते हैं), (4) सुधार (ठीक करने की कोशिश), (5) नया संतुलन (फिर शांति, पर बदली हुई)।
और काम की बातें: विपरीत जोड़े (अच्छा-बुरा, पुराना-नया) और पात्रों के काम: नायक, खलनायक, सहायक और लक्ष्य (प्रॉप का विचार)।
विधा (genre)
विधा ऐसी फ़िल्मों का समूह है जिनके साझा ढर्रे होते हैं, जिन्हें परंपराएँ (conventions) कहते हैं: ख़ास पात्र, जगहें, चीज़ें, संगीत और कहानी के क़दम। उदाहरण: रोमांस, कॉमेडी, डरावनी, एक्शन, वेस्टर्न, विज्ञान-कथा, संगीतमय।
- दोहराव और फ़र्क: दर्शकों को जाना-पहचाना ढर्रा और छोटी हैरानी पसंद है।
- मिली-जुली विधाएँ: जैसे रोमांटिक कॉमेडी।
- समाज और तकनीक बदलने से विधाएँ बदलती हैं।
फ़िल्म में विचारधारा
विचारधारा (ideology) फ़िल्म के पीछे की मान्यताएँ और मूल्य हैं, जो अक्सर सीधे नहीं कहे जाते। देखो नायक कौन है, खलनायक कौन, कौन ग़ायब है, और अंत में किसे इनाम मिलता है।
- कौन-से परिवार, काम या जगहें "सामान्य" दिखाई गई हैं?
- सफलता क्या है: पैसा, कर्तव्य, प्यार, साहस?
- हम किसके नज़रिये से देखते हैं?
फ़िल्में आम मान्यताओं का साथ दे सकती हैं या उन पर सवाल उठा सकती हैं। हमेशा किसी दृश्य का सबूत दो।
पटकथा (screenplay)
पटकथा (साहित्यिक पटकथा) फ़िल्म को शब्दों में ऐसे लिखती है कि पूरी टीम काम कर सके। इसके चरण: विचार, सार (synopsis), क़दम-सूची (step outline) जिसमें हर दृश्य की एक पंक्ति क्रम से होती है, ट्रीटमेंट (कहानी गद्य में), पहला मसौदा दृश्यों के साथ, फिर सुधार।
- दृश्य एक जगह और समय में होता है। उसकी शुरुआत शीर्षक से होती है, जैसे "अंदर - रसोई - सुबह"।
- अनुक्रम (sequence) कई दृश्यों का समूह है जो कहानी का एक बड़ा हिस्सा बनाता है।
- पटकथा में सिर्फ़ वही लिखते हैं जो देखा या सुना जा सके: क्रिया और संवाद। विचार चित्र या बात बनने चाहिए।
फ़िल्म के कथानक का विश्लेषण कैसे करें
पाँच सवाल पूछो: कहानी क्या है और कथानक का क्रम क्या? यह दृश्य किस अंक या चरण में है? किसका क्या काम है? कौन-से विधा के ढर्रे इस्तेमाल या तोड़े गए? अंत किन मूल्यों को इनाम देता है?
खुद करो
3D में तीन अंक वाली रेखा चलाओ, फिर टोडोरोव वाली। फिर कोई जानी-पहचानी फ़िल्म सोचो और बताओ कि गड़बड़ी वाला दृश्य कौन-सा है और चरम कौन-सा। घर पर खोए हुए स्कूल-बैग की कहानी की सात पंक्तियों की क़दम-सूची लिखो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कहानी = समय क्रम की घटनाएँ; कथानक = दिखाया गया क्रम
- तीन अंक: शुरुआत → टकराव → अंत
- टोडोरोव: संतुलन → गड़बड़ी → पहचान → सुधार → नया संतुलन
- काम: नायक, खलनायक, सहायक, लक्ष्य
- पटकथा: विचार → सार → क़दम-सूची → ट्रीटमेंट → मसौदा
- दृश्य = एक जगह-समय; अनुक्रम = दृश्यों का समूह
हल किए गए उदाहरण
1. फ़िल्म एक बूढ़ी महिला के कहानी सुनाने से शुरू होती है, फिर कहानी शुरू से दिखती है। यह कथानक की कौन-सी तरकीब है?
फ़्रेम कहानी और फ़्लैशबैक। कथानक वर्तमान से शुरू होता है फिर बीती घटनाएँ दिखाता है। कहानी (समय क्रम) पहले शुरू होती है।
2. गाँव में पानी भरपूर है, फिर सूखा आता है, लोग कारण देखते हैं, कुआँ बनाते हैं और गाँव फलता-फूलता है। टोडोरोव के चरण बताओ।
संतुलन: भरपूर पानी। गड़बड़ी: सूखा। पहचान: कारण देखना। सुधार: कुआँ बनाना। नया संतुलन: गाँव फलता-फूलता है, नई सीख के साथ।
3. छोटी कहानी की क़दम-सूची लिखो: बच्चा स्कूल-बैग खो देता है।
1. बच्चा बैग लेकर घर से निकलता है। 2. स्कूल में बैग नहीं मिलता। 3. बच्चा शिक्षक को बताता है। 4. दोस्त खोजने में मदद करते हैं। 5. बैग बस में मिलता है। 6. बच्चा सबको धन्यवाद देता है।
आम गलतियाँ
- कहानी और कथानक मिला देना। कहानी समय क्रम है; कथानक दिखाया गया क्रम।
- मान लेना कि हर फ़िल्म में बराबर लंबाई के तीन अंक होते हैं। अक्सर वे असमान होते हैं।
- विधा को सिर्फ़ विषय कहना। यह परंपराओं का ढर्रा है।
- विचारधारा को बिना सबूत की राय मानना। हमेशा दृश्य बताओ।