किरदार असली कब लगता है?
किरदार (पात्र) कहानी का इंसान (या जानवर या चीज़) होता है। सिर्फ़ नाम से किरदार असली नहीं बनता। हम तब विश्वास करते हैं जब तीन बातें पता हों: वह क्या चाहता है, क्यों चाहता है, और उसे क्या रोकता है।
फिर हम किरदार को उसके बोलने और करने के ढंग से दिखाते हैं।
किरदार की प्रेरणा
प्रेरणा वह वजह है जिससे किरदार कुछ करता है। इसके दो भाग हैं।
- चाह (लक्ष्य): किरदार क्या पाना चाहता है। उदाहरण: स्कूल की दौड़ जीतना।
- क्योंकि (वजह): यह क्यों ज़रूरी है। उदाहरण: माँ को खुश करना, क्योंकि उसने परिवार के लिए बहुत त्याग किया।
दो-तीन बार "क्यों?" पूछो। पहला जवाब आमतौर पर सरल होता है; दूसरे और तीसरे जवाब गहराई देते हैं।
रुकावट
रुकावट वह है जो चाह को रोकती है। यह कोई इंसान (मज़बूत प्रतिद्वंद्वी), कोई चीज़ (चोट लगा पैर) या कोई भावना (डर) हो सकती है। रुकावट न हो तो कहानी नहीं बनती, किरदार को तुरंत सब मिल जाता है।
अलग बोली
दो किरदार एक जैसे नहीं सुनाई देने चाहिए। ये चीज़ें बदलो:
- लंबाई: छोटे, तीखे वाक्य या लंबे, बहते वाक्य।
- रफ़्तार: तेज़ और घबराई हुई या धीमी और शांत।
- शब्दों का चुनाव: सीधे शब्द या भारी शब्द, बोलचाल या शिष्ट भाषा।
- आदतें: तकिया-कलाम, अंत में सवाल, मज़ाक।
जाँच: पटकथा में नाम ढक दो। क्या तुम फिर भी बता सकते हो कि कौन-सा संवाद किसका है? हाँ, तो बोली अलग है।
अलग हरकत
किरदार जो करता है, उससे पता चलता है कि वह कैसा है। बेचैन किरदार उँगलियाँ बजाता है, टहलता है और हिलता-डुलता है। शांत किरदार स्थिर रहता है। घमंडी तनकर खड़ा होता है; शर्मीला नीचे देखता है।
दिखाओ, बताओ मत। "मैं घबराया हूँ" कहने की जगह किरदार को बार-बार घड़ी देखने दो और काग़ज़ को मोड़ते रहने दो। चाह से मेल खाती हरकतें सबसे अच्छी हैं: जो किरदार जाना चाहता है, वह बार-बार दरवाज़े को देखता है।
करके देखो: दो इंसान, एक संवाद
संवाद लो: "हमें बात करनी है।" इसे दो किरदारों के लिए दो बार लिखो: एक बेचैन और तेज़, दूसरा शांत और धीमा। लंबाई, रफ़्तार और एक आदत बदलो। पहले बिना आवाज़ के दोनों को दोस्त के सामने करो: क्या वह सिर्फ़ हरकत से दोनों को पहचान सकता है? फिर आख़िरी 3D चरण में पट्टियाँ चलाओ।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- किरदार = चाह + वजह (क्योंकि) + रुकावट
- प्रेरणा: गहराई के लिए दो-तीन बार "क्यों" पूछो
- रुकावट नहीं = कहानी नहीं
- अलग बोली = लंबाई + रफ़्तार + शब्दों का चुनाव + आदत
- अलग हरकत = ऐसी चाल जो स्वभाव दिखाए (बेचैन, शांत, घमंडी, शर्मीला)
- दिखाओ, बताओ मत
हल किए गए उदाहरण
1. एक लड़का दोपहर तक सारे फूल बेचना चाहता है। चाह, वजह और रुकावट बताओ।
चाह: दोपहर तक सारे फूल बेचना। क्योंकि: कल बहन की स्कूल फ़ीस जमा करनी है और उसके पास कुछ बचा नहीं है। रुकावट: बारिश शुरू हो जाती है और लोग घरों में रुक जाते हैं।
2. एक घबराए छात्र और एक आत्मविश्वासी छात्र के लिए, जो अध्यापिका से ज़्यादा समय माँग रहे हैं, एक-एक संवाद लिखो।
घबराया: "मैडम, वो... शायद... अगर ठीक हो तो थोड़ा और समय?" (टूटा, झिझकता, धीमा)। आत्मविश्वासी: "मैडम, अच्छे से पूरा करने के लिए मुझे दस मिनट और चाहिए।" (साफ़, छोटा, दृढ़)। चाह एक है; बोली स्वभाव दिखाती है।
3. एक दादी अपनी थकान छिपाना चाहती है। इसे दिखाने वाली दो हरकतें बताओ।
वह काम करती रहती है और कहती है "मैं ठीक हूँ", पर जब कोई नहीं देखता तो बैठ जाती है और घुटना सहलाती है। दो छोटी हरकतें वह दिखा देती हैं जो शब्द छिपाते हैं।
आम गलतियाँ
- किरदार को चाह देना पर वजह नहीं। "क्योंकि" के बिना दर्शक परवाह नहीं करते।
- रुकावट हटा देना ताकि किरदार को तुरंत सब मिल जाए। तब कहानी नहीं बनती।
- सारे किरदारों को एक ही आवाज़ में बोलवाना। लंबाई, रफ़्तार और शब्द बदलो।
- भावना को शब्दों में बताना, हरकत से दिखाना नहीं।