China 八年级(初二) Arts: Drama (incl. xiqu)
अध्याय: 8
1. Sem.1 U1 Into drama
Classroom as theatre; drama from life
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
2. Sem.1 U2 Front and back stage
Forming a crew; production planning
- नाटक का दल बनाना और प्रस्तुति की योजना – नाटक के लिए एक टीम चाहिए जिसे दल (crew) कहते हैं। अभिनेता आगे के मंच पर दर्शकों के सामने काम करते हैं। निर्देशक, मंच-प्रबंधक, प्रकाश, ध्वनि और वेश-भूषा वाले पीछे के मंच पर काम करते हैं। दल प्रोडक्शन रिकॉर्ड रखता है, जैसे नाम और तारीख़ वाली काम-सूची, और योजना-बैठक में कहानी, काम-बँटवारा और समय-सारणी तय करता है।
3. Sem.1 U3 Actors, take your places
Auditions; complex emotions; actor training
- ऑडिशन, मिले-जुले भाव और अभिनेता का प्रशिक्षण – ऑडिशन एक छोटी परीक्षा है जिसमें अभिनेता जजों के सामने अपना हुनर दिखाते हैं। इसके लिए एक छोटा अंश तैयार करो, साफ़ आवाज़ में अपना नाम बताओ (स्लेट) और शांत रहो। असली ज़िंदगी में हम अक्सर दो भाव एक साथ महसूस करते हैं, जैसे खुशी और उदासी। अच्छा अभिनेता दोनों को निभाना सीखता है। अभिनेता रोज़ अभ्यास भी करते हैं: आवाज़ के लिए पेट से साँस और साफ़ उच्चारण, और शरीर के लिए वार्म-अप और स्ट्रेचिंग।
4. Sem.1 U4 The stage
Stage space; lighting
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
5. Sem.2 U1 From novel to drama
Adapting a story into a script
जल्द आ रहा है
6. Sem.2 U2 Choosing a story
Bringing characters to life
- किरदार को ज़िंदा करना: प्रेरणा, बोली और हरकत – किरदार तब असली लगता है जब हमें पता हो कि वह क्या चाहता है (प्रेरणा), क्यों चाहता है, और उसे क्या रोकता है (रुकावट)। फिर हम उसे उसकी अपनी बोली और अपनी चाल-ढाल से दिखाते हैं। छोटे, तेज़ वाक्य और लंबे, धीमे वाक्य अलग सुनाई देते हैं, और बेचैन टहलने वाला शांत खड़े रहने वाले से अलग लगता है। लेखक और अभिनेता चाह, वजह, रुकावट, बोली और हरकत से पन्ने के नाम को मंच का इंसान बनाते हैं।
7. Sem.2 U3 How to tell a story
Dramatic structure; conflict
- नाटक: तत्व, मंचकला और प्रस्तुति – नाटक ऐसी कहानी है जिसे अभिनेता पात्र बनकर दर्शकों के सामने करके दिखाते हैं। हर नाटक में पात्र होते हैं जो कुछ चाहते हैं, उनकी चाहतें टकराती हैं तो द्वंद्व बनता है, कथानक तनाव को चरम तक ले जाकर सुलझाता है, और साथ में संवाद, परिवेश और विषय होते हैं। मंच पर अभिनेता आवाज़ और शरीर से काम करते हैं, और प्रकाश, सेट, वेशभूषा व ध्वनि मंचन को पूरा करते हैं।
8. Sem.2 U4 Future playwrights
Adapting and staging
- कहानी का रूपांतरण और मंचन – कहानी का रूपांतरण यानी उसे नाटक में बदलना। कहानी में लंबा वर्णन हो सकता है, पर मंच पर सिर्फ़ वही दिखता है जो लोग बोलते और करते हैं। इसलिए समूह वर्णन को संवाद और क्रिया में बदलता है, काम बाँटता है (लेखक, निर्देशक, अभिनेता, डिज़ाइनर) और मंच का रूप चुनता है: प्रोसेनियम (दर्शक एक तरफ़), थ्रस्ट (तीन तरफ़) या गोल (चारों तरफ़)। प्रस्तुति के बाद समूह समीक्षा करता है कि क्या अच्छा रहा और क्या सुधारना है।