कथ्य और ढाँचा
कथ्य वह है जो रचना कहती है: घटनाएँ, पात्र और विचार। ढाँचा वह है कि भाग कैसे सजे हैं: क्रम और आकार।
दो कहानियों में घटनाएँ एक जैसी हों, फिर भी क्रम अलग हो तो अनुभव अलग होता है। ढाँचा तय करता है कि पढ़ते हुए हम कैसा महसूस करें।
कथानक के भाग
- शुरुआत: कौन, कहाँ, कब। पात्र से मिलना।
- बढ़ता तनाव: समस्या शुरू होकर बढ़ती है।
- चरम बिंदु: सबसे तनाव का पल। समस्या सबसे बड़ी।
- ढलान: बातें सुलझने लगती हैं।
- अंत: कहानी शांत होती है। कुछ बदल चुका होता है।
कुछ कहानीकार चार भाग भी रखते हैं: परिचय, विकास, मोड़, समापन। हमेशा पूछिए: मोड़ कहाँ है?
कविता में भी ढाँचा होता है
कविता के भाग पंक्तियाँ और पद (पंक्तियों के समूह) होते हैं। हर पद में अकसर एक विचार होता है। देखिए कविता कैसे शुरू होती है, कहाँ मुड़ती है (अकसर "पर" या "लेकिन" से) और कैसे खत्म होती है। तुक और दोहराई गई पंक्तियाँ भी ढाँचा देती हैं।
कथानक समझना और सार लिखना
कथानक समझने के लिए: घटनाएँ लिखिए, क्रम में रखिए, देखिए कौन-सी बात किस कारण से हुई, और चरम बिंदु खोजिए। सार लिखने के लिए: हर भाग की मुख्य बात अपने शब्दों में लिखिए। अच्छा सार छोटा, क्रम में और छोटी बातों के बिना होता है।
खुद करके देखिए: कोई कार्टून का एपिसोड लीजिए। पाँच घटनाएँ लिखिए। पहाड़ बनाकर तनाव के हिसाब से घटनाएँ रखिए। फिर तीन वाक्य का सार लिखिए। 3D में अगला दबाने से पहले घटना बोलकर बताइए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- कथानक = शुरुआत + बढ़ता तनाव + चरम बिंदु + ढलान + अंत
- चरम बिंदु = सबसे ज़्यादा तनाव का पल
- सार = हर भाग की मुख्य बात, क्रम में, अपने शब्दों में
- कविता का ढाँचा = पंक्तियाँ + पद + मोड़
हल किए गए उदाहरण
1. मीना पतंग बनाती है। वह उड़ती है। डोर टूटती है और पतंग पेड़ पर अटक जाती है। पड़ोसी सीढ़ी लाते हैं। मीना फिर पतंग उड़ाती है। चरम बिंदु कौन-सा है?
डोर टूटकर पतंग का पेड़ पर अटकना। यहाँ समस्या सबसे बड़ी है और मीना सबसे ज़्यादा घबराई है।
2. ऊपर की कहानी का एक वाक्य में सार लिखिए।
मीना की पतंग ऊँचे पेड़ पर अटक गई, पर पड़ोसी ने मदद की और उसने उसे फिर उड़ाया।
3. एक कविता के दो पद हैं। पद 1: धूप वाला दिन, बच्चे खेलते हैं। पद 2 शुरू होता है "पर बादल आ गए..." से। मोड़ कहाँ है?
पद 2 की शुरुआत में, "पर" शब्द से। इससे मन खुशी से चिंता की तरफ़ बदलता है।
आम गलतियाँ
- घटनाओं को गलत क्रम में रखना, जिससे कारण और नतीजा खो जाता है।
- पहली रोमांचक बात को चरम बिंदु कह देना, जबकि वह सबसे तनाव का पल होना चाहिए।
- सार में हर छोटी बात दोहराना।
- अपने शब्दों की जगह पाठ के वाक्य उतार देना।