फ़िल्म की सराहना: अच्छे से कैसे देखें
क्लासिक वह फ़िल्म है जो कई सालों बाद भी पसंद की जाती है और देखी जाती है। फ़िल्म की सराहना का मतलब है फ़िल्म ध्यान से देखना और बताना कि तुमने क्या देखा और क्यों पसंद आई।
तीन सवाल पूछो:
- कहानी: क्या होता है? हीरो क्या चाहता है? क्या बदलता है?
- दृश्य: रंग, जगहें, कपड़े कैसे हैं? कैमरा कहाँ है?
- आवाज़: कौन-सा संगीत, आवाज़ें या चुप्पी सुनाई देती है? उससे कैसा लगता है?
पहले कहो क्या देखा, फिर कैसा लगा, फिर तुम्हें क्यों लगता है कि फ़िल्म ने ऐसा किया। यह सिर्फ़ "अच्छी थी" कहने से कहीं ज़्यादा है।
दृश्य सुनाना और दोबारा करना
सुनाने का मतलब है दृश्य अपने शब्दों में बताना। उसे तीन भागों में बाँटो: शुरुआत (कौन और कहाँ), बीच (क्या बिगड़ा या बदला), अंत (आख़िर में क्या हुआ)। "पहले", "फिर", "आख़िर में" जैसे शब्द इस्तेमाल करो।
दोबारा करने (री-एनैक्ट) का मतलब है दृश्य का अभिनय। दो या ज़्यादा दोस्त भूमिकाएँ निभाते हैं। हर शब्द की नक़ल नहीं करनी। चेहरे, आवाज़ और चाल से भाव दिखाओ।
- दो पात्रों वाला छोटा दृश्य चुनो।
- जगह तय करो और कौन कहाँ खड़ा होगा।
- एक बार धीरे करो, फिर एक बार भाव के साथ।
- बात करो: फ़िल्म ने हमें कैसा महसूस कराया, इससे हमने क्या सीखा?
ट्रिब्यूट क्लिप बनाना
ट्रिब्यूट क्लिप एक छोटा वीडियो है जो किसी पसंदीदा फ़िल्म या फ़िल्मकार को "धन्यवाद" कहता है। तुम फ़िल्म के अंदाज़ में नए शॉट बनाते हो या दृश्य दोबारा करते हो और उन्हें जोड़ते हो।
- योजना: वह भाव या विचार चुनो जो तुम्हें पसंद आया। उसे एक वाक्य में लिखो।
- शूट: अपने 3 से 6 छोटे क्लिप बनाओ, हर एक लगभग 5 से 10 सेकंड का।
- एडिट: उन्हें क्रम में लगाओ, सादा संगीत या अपनी आवाज़ जोड़ो और अंत में नाम-कार्ड (टाइटल कार्ड) लगाओ जिसमें उस फ़िल्म का नाम हो।
- ईमानदारी: अपने दृश्य खुद शूट करो, वही संगीत लो जिसकी अनुमति हो और बताओ कि किसके काम से प्रेरणा मिली।
कुल समय = (क्लिप की संख्या × हर क्लिप के सेकंड) + नाम-कार्ड।
खुद करो
दो दोस्तों के साथ अपनी पसंदीदा फ़िल्म का एक छोटा दृश्य चुनो। उसे तीन भागों में सुनाओ, एक बार अभिनय करो और फ़ोन पर 8 सेकंड के तीन क्लिप शूट करो। उन्हें जोड़ो और नाम-कार्ड लगाओ। तुम्हारा ट्रिब्यूट कितना लंबा है?
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- क्लासिक = कई सालों बाद भी पसंद की जाने वाली फ़िल्म
- सराहना = कहानी + दृश्य + आवाज़, फिर भाव और क्यों
- सुनाना = शुरुआत, बीच, अंत अपने शब्दों में
- री-एनैक्ट = भाव के साथ दृश्य करना, शब्द-दर-शब्द नहीं
- ट्रिब्यूट कुल समय = (क्लिप × हर क्लिप के सेकंड) + नाम-कार्ड
हल किए गए उदाहरण
1. उस दृश्य की तीन भागों में कहानी सुनाओ जिसमें एक लड़के की पतंग खो जाती है और अजनबी उसकी मदद करता है।
शुरुआत: एक लड़का छत पर पतंग उड़ा रहा है। बीच: डोर टूट जाती है और पतंग उड़ जाती है; वह उदास हो जाता है। अंत: एक अजनबी उसे वापस लाता है और दोनों साथ उड़ाते हैं।
2. तीन सवालों से बारिश के गीत वाले दृश्य की सराहना करो।
कहानी: दो दोस्त मिलते हैं और क़रीब आते हैं। दृश्य: चटक छाते, भीगी सड़कें, हल्का स्लेटी आसमान। आवाज़: बारिश पर मीठी धुन। भाव: खुशी और आज़ादी, क्योंकि संगीत और रंग मस्ती भरे हैं।
3. एक ट्रिब्यूट में 6 सेकंड के 4 क्लिप और 3 सेकंड का नाम-कार्ड है। कुल समय?
4 × 6 = 24 सेकंड। 24 + 3 = 27 सेकंड।
4. री-एनैक्ट करते समय हर शब्द की नक़ल क्यों नहीं करते?
लक्ष्य भाव समझना है। अपनी आवाज़ और चाल से दिखता है कि तुमने दृश्य सचमुच समझा।
आम गलतियाँ
- सिर्फ़ "अच्छी थी" कहना। बताओ क्या देखा और क्यों अच्छा लगा।
- हर छोटी बात सुनाना। शुरुआत, बीच और अंत पर रहो।
- भाव दिखाने के बजाय अभिनेताओं की हूबहू नक़ल करना।
- ट्रिब्यूट में किसी और का वीडियो या संगीत बिना अनुमति इस्तेमाल करना।