निर्देशक लेखक के रूप में
ऑत्योर (auteur) फ़्रेंच में 'लेखक' है। सिद्धांत कहता है कि फ़िल्म, उपन्यास की तरह, एक कलाकार की निजी अभिव्यक्ति हो सकती है — आमतौर पर निर्देशक की — भले बहुत लोग उसे बनाएँ।
ऑत्योर की फ़िल्मों पर एक छाप (signature) होती है:
- बार-बार आने वाले विषय (अपराध-बोध, परिवार, बाहरी लोग, जुनून)
- दृश्य शैली (लंबे शॉट, सममिति, नीचे से कोण, रंग-योजना)
- पात्रों के प्रकार और पसंदीदा अभिनेता
- ध्वनि और संगीत (वही संगीतकार, ख़ामोशी)
खुद करो: किसी निर्देशक की तीन फ़िल्में लिखो। एक चीज़ लिखो जो तीनों में है।
विचार कहाँ से आया: Cahiers du cinéma और सैरिस
1950 के दशक में फ़्रांसीसी पत्रिका Cahiers du cinéma के युवा आलोचकों (फ़्रांस्वा त्रूफ़ो, ज़्याँ-लुक गोदार आदि, जिन्होंने बाद में फ़्रेंच न्यू वेव की फ़िल्में बनाईं) ने 'politique des auteurs' की बात की (त्रूफ़ो का 1954 का लेख अहम था)। उन्होंने सिर्फ़ उपन्यास उतारने वाली 'गुणवत्ता' फ़िल्मों को नकारा और निजी नज़र वाले निर्देशकों की तारीफ़ की।
1962 में अमेरिकी आलोचक ऐंड्रयू सैरिस ने इसे अंग्रेज़ी में 'auteur theory' नाम दिया और तीन घेरे बताए:
- बाहरी: तकनीकी कौशल
- बीच का: पहचानी जाने वाली निजी शैली
- अंदर का: आंतरिक अर्थ (निर्देशक के व्यक्तित्व और सामग्री के बीच का तनाव)
स्टूडियो सिस्टम के अंदर ऑत्योर
फ़्रांसीसी आलोचकों को हैरानी यह थी कि उन्हें क्लासिकल हॉलीवुड के अंदर ऑत्योर मिले, जहाँ स्टूडियो पटकथा, सितारे, बजट और फ़ाइनल कट चुनते थे और प्रोडक्शन कोड सामग्री सीमित करता था। अल्फ़्रेड हिचकॉक (सस्पेंस, अपराध-बोध, ताक-झाँक, 'ग़लत आदमी', पहले से बने सटीक शॉट), जॉन फ़ोर्ड (वेस्टर्न, विशाल प्रकृति, समुदाय और खोना), हॉवर्ड हॉक्स (पेशेवर टोलियाँ, तेज़ संवाद, कई जॉनर में) ने फिर भी अपनी शैली दिखाई।
तर्क: जब नियंत्रण कड़ा हो, तो छाप कहानी के चुनाव में नहीं, दी गई कहानी को कैसे फ़िल्माया गया — मिज़-आँ-सेन — में दिखती है। न्यू हॉलीवुड (1960 के अंत–70) में स्टूडियो ने निर्देशकों को ऑत्योर के रूप में बेचा और उन्हें ज़्यादा नियंत्रण मिला।
आलोचना और सिद्धांत का सही इस्तेमाल
- फ़िल्म टीमवर्क है: लेखक, सिनेमैटोग्राफ़र, एडिटर, संगीतकार, डिज़ाइनर, निर्माता, सितारे सब गढ़ते हैं। आलोचक पॉलीन केल ने इसी बात पर सैरिस का विरोध किया।
- स्टूडियो और जॉनर ऐसे पैटर्न थोपते हैं जो निजी शैली जैसे लगते हैं।
- सिर्फ़ निर्देशक देखने से संदर्भ और दर्शक छूट जाते हैं।
- किसे ऑत्योर कहा गया — ज़्यादातर कुछ देशों के पुरुष; यह सूची अब बढ़ाई जा रही है।
सही इस्तेमाल: कई फ़िल्मों के सबूत से छाप पहचानो, किसी ख़ास दृश्य में दिखाओ, फिर दूसरे असर (स्टूडियो, सितारा, लेखक, जॉनर, दौर) भी तौलो।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- ऑत्योर = फ़िल्मों पर निजी छाप वाला निर्देशक-लेखक
- शुरुआत: Cahiers du cinéma, 1950 का दशक · त्रूफ़ो 1954 · सैरिस 1962
- सैरिस के घेरे: तकनीकी कौशल → निजी शैली → आंतरिक अर्थ
- स्टूडियो-दौर के ऑत्योर: हिचकॉक, फ़ोर्ड, हॉक्स — शैली मिज़-आँ-सेन में
- आलोचना: टीमवर्क, स्टूडियो/जॉनर, संदर्भ, सीमित सूची
हल किए गए उदाहरण
1. हिचकॉक की फ़िल्मों में मिलने वाली तीन छापें बताओ।
दर्शक को वह ख़तरा दिखाकर सस्पेंस बनाना जो पात्र नहीं देख पाते; अपराध-बोध, ताक-झाँक और बेगुनाह 'ग़लत आदमी' के विषय; सोच-समझकर बने शॉट, POV और नाटकीय कैमरा हरकत; और उनका छोटा-सा ख़ुद परदे पर आना।
2. अगर पटकथा स्टूडियो चुनता था तो स्टूडियो निर्देशक ऑत्योर कैसे?
शैली इसमें दिखती है कि कहानी कैसे फ़िल्माई गई: फ़्रेमिंग, कैमरा हरकत, रोशनी, गति, अभिनय। कई दी गई पटकथाओं में दोहराए गए ये चुनाव निर्देशक का व्यक्तित्व दिखाते हैं।
3. किसी निर्देशक पर सैरिस के घेरे लगाओ।
बाहरी: क्या फ़िल्में तकनीकी रूप से कुशल हैं? बीच: क्या फ़िल्मों में पहचानी शैली है? अंदर: क्या निर्देशक और सामग्री के तनाव से गहरा निजी अर्थ निकलता है? तीनों पार करने वाला ही सैरिस के अर्थ में ऑत्योर है।
4. फ़िल्म को सिर्फ़ निर्देशक का काम कहने के ख़िलाफ़ एक मज़बूत तर्क दो।
मशहूर लुक सिनेमैटोग्राफ़र से, प्रसिद्ध संगीत संगीतकार से और ढाँचा पटकथा लेखक से आ सकता है; एक ही एडिटर या संगीतकार के साथ लंबी साझेदारी साझा लेखकत्व दिखाती है।
आम गलतियाँ
- मान लेना कि हर निर्देशक अपने आप ऑत्योर है — कई फ़िल्मों में एक जैसी निजी छाप चाहिए।
- कहना कि सिद्धांत हॉलीवुड में बना — यह 1950 के दशक में फ़्रांसीसी आलोचकों से शुरू हुआ।
- शैली का श्रेय निर्देशक को देते समय साथियों और स्टूडियो को भूल जाना।
- किसी ख़ास दृश्य में छाप दिखाए बिना सिर्फ़ फ़िल्मों की सूची देना।