पैसा कहाँ से आया
बहुत पहले लोग चीज़ों की अदला-बदली करते थे: अनाज के बदले कपड़ा। इसे वस्तु विनिमय (बार्टर) कहते हैं। यह मुश्किल था क्योंकि दोनों को वही चाहिए होता था जो दूसरे के पास है। इसलिए लोग ऐसी चीज़ें चलाने लगे जो सब मानें: कौड़ियाँ, नमक, धातु के टुकड़े। फिर राजा या बैंक की मुहर वाले धातु के सिक्कों से भुगतान पर भरोसा आसान हुआ। फिर कागज़ के नोट आए क्योंकि वे हल्के होते हैं। आज बहुत-सा पैसा बैंक खाते और फोन में सिर्फ़ अंक है।
अच्छा पैसा सबको मान्य, ले जाने में आसान, नकल करने में कठिन, टिकाऊ और छोटे हिस्सों में बँटने वाला होना चाहिए।
पैसा कौन बनाता है?
ज़्यादातर देशों में केंद्रीय बैंक तय करता है कि कितना नकद बने और नोट जारी करता है। सिक्के आमतौर पर सरकार टकसाल में बनाती है। बहुत ज़्यादा पैसा छापना खतरनाक है क्योंकि दाम बढ़ते हैं (इसे महँगाई कहते हैं, देखो महँगाई का पाठ)। कई केंद्रीय बैंक संग्रहालय चलाते हैं जहाँ पुराने सिक्के और नोट देखकर पैसे का इतिहास समझ आता है।
सिक्का कैसे बनता है
- धातु पिघलाकर लंबी चादर में बेली जाती है।
- चादर से गोल चकतियाँ कटती हैं जिन्हें ब्लैंक कहते हैं।
- ब्लैंक साफ़ होते हैं और नरम करने के लिए गर्म किए जाते हैं।
- दो डाई (स्टील के ठप्पे) वाला प्रेस हर ब्लैंक को दबाता है। चित्र, मान और किनारे की बनावट एक ही चोट में बन जाती है।
- सिक्के गिने, जाँचे और थैलों में भरे जाते हैं।
कुछ सिक्कों में दो धातुएँ (बाहर का छल्ला और बीच का हिस्सा) या धारीदार किनारा होता है। इनकी नकल मुश्किल है।
नोट कैसे बनता और कैसे जाँचें
नोट खास कागज़ (अक्सर कपास का) या पॉलीमर नाम के प्लास्टिक पर छपते हैं। छपाई में बारीक रेखाएँ और स्याही की कई परतें होती हैं। आम सुरक्षा निशान:
- वाटरमार्क: रोशनी की ओर करने पर दिखने वाली हल्की तस्वीर।
- सुरक्षा धागा: कागज़ के अंदर पतली पट्टी, रोशनी में काली लकीर जैसी दिखती है।
- रंग बदलने वाली स्याही: नोट झुकाने पर रंग बदलने वाला निशान।
- उभरी छपाई: कुछ जगह छूने पर खुरदरी लगती है।
- सूक्ष्म अक्षर: इतने छोटे अक्षर कि आवर्धक लेंस चाहिए।
नोट जाँचने के लिए देखो, झुकाओ, छुओ।
मुद्राशास्त्र: सिक्के और नोट जमा करना
मुद्राशास्त्र (न्यूमिस्मैटिक्स) सिक्कों, नोटों और पदकों का अध्ययन और संग्रह है। संग्रहकर्ता इनसे इतिहास सीखते हैं। कुछ देश किसी घटना या व्यक्ति की याद में स्मारक सिक्के निकालते हैं। ये संग्रहकर्ताओं के लिए बनते हैं पर आमतौर पर चल भी सकते हैं। सिक्कों को सूखा रखो और किनारों से पकड़ो ताकि सतह पर खरोंच न आए।
मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ
- वस्तु विनिमय: चीज़ के बदले चीज़ (दोनों की ज़रूरतें मिलनी चाहिए)
- अच्छे पैसे के गुण: मान्य, ले जाने योग्य, टिकाऊ, विभाज्य, नकल कठिन
- नोट जाँच: देखो (रोशनी में), झुकाओ, छुओ
- सिक्का: ब्लैंक → गर्म करना → डाई प्रेस → गिनती
हल किए गए उदाहरण
1. एक दुकान को ऐसा नोट मिला जिसमें रोशनी में न धागा दिखता है न वाटरमार्क। दुकानदार क्या करे?
उसे संदिग्ध मानो। मत लो और बैंक या पुलिस को बताओ। असली नोट में दोनों निशान होते हैं।
2. टकसाल 500 ब्लैंक काटती है और 20 खराब निकलते हैं। कितने सिक्के बनेंगे?
500 − 20 = 480 सिक्के अच्छे ब्लैंक से बनेंगे।
3. तुम्हारे पास 5 के 3 सिक्के, 2 के 4 और 1 के 6 सिक्के हैं। कुल कितना?
3 × 5 = 15, 4 × 2 = 8, 6 × 1 = 6। कुल 15 + 8 + 6 = 29।
4. गाँव में किसान के पास चावल है और उसे हल चाहिए। वस्तु विनिमय कठिन क्यों है?
हल वाले लोहार को भी चावल चाहिए होना चाहिए। ऐसा मेल कम होता है। पैसा यह परेशानी हटा देता है क्योंकि सब उसे लेते हैं।
5. कुछ सिक्कों के किनारे पर धारियाँ क्यों बनाते हैं?
धारियाँ नकल कठिन करती हैं और छूकर सिक्का पहचानने में मदद करती हैं। साथ ही दिखता है कि किनारा घिसा तो नहीं।
आम गलतियाँ
- नोट को केवल रंग या आकार से परखना। नकली नोट इन्हें मिला सकते हैं, असली प्रमाण छिपे निशान हैं।
- सोचना कि ज़्यादा पैसा छापने से देश अमीर हो जाता है। इससे सिर्फ़ दाम बढ़ते हैं।
- सोचना कि स्मारक सिक्के चल नहीं सकते। कई चलते हैं, पर संग्रहकर्ता के लिए उनका मोल ज़्यादा है।
- केवल एक निशान देखना। तीनों जाँच करो: देखो, झुकाओ, छुओ।