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सरकार की भूमिका: आधारभूत ढाँचा, पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा और उपभोक्ता सुरक्षा

बाज़ार सब कुछ नहीं कर सकता। सरकार कर (टैक्स) के पैसे से ऐसी सड़कें और पुल बनाती है जिन्हें सब बाँटते हैं, प्रदूषण रोकने के नियम बनाती है, पेंशन और ज़रूरतमंदों को मदद देती है, और खरीदारों को ख़राब या बेईमान माल से बचाती है। बजट सीमित है, इसलिए सरकार को चुनना पड़ता है।

🎬 कदम-दर-कदम कहानी

  1. यह एक छोटा शहर है: घर, दुकान, कारख़ाना और नदी। सरकार ने अभी कुछ नहीं किया है: न सड़क, न कोई नियम।
  2. अब सरकार सड़क और पुल बनाती है। इन्हें सब इस्तेमाल कर सकते हैं। कोई निजी कंपनी इन्हें नहीं बनाती, क्योंकि वह हर चलने वाले से पैसे नहीं ले सकती।
  3. कारख़ाना गंदा धुआँ छोड़ता है और नदी भूरी हो जाती है। बटन दबाइए: प्रदूषण का नियम लगते ही धुआँ और नदी साफ़ हो जाते हैं।
  4. काम करने वाले लोग कर देते हैं। सरकार उसी से बुज़ुर्ग को पेंशन देती है। सिक्कों को कामगारों से पेंशन पाने वाले तक जाते देखिए।
  5. दुकान "1 किलो" का पैकेट बेचती है जो असल में 800 ग्राम है। बटन दबाइए: निरीक्षक जाँच करता है। यही उपभोक्ता सुरक्षा है।
  6. खुद चलाइए: 100 सिक्के सड़क, पर्यावरण, सामाजिक सुरक्षा और उपभोक्ता के बीच बाँटिए। सब पर पूरा ख़र्च नहीं हो सकता, इसलिए चुनना पड़ता है।

टिप: 3D दृश्य को घुमाने के लिए खींचें। ज़ूम के लिए दो उंगलियाँ इस्तेमाल करें।

🤔 आम शंकाएँ और उनके जवाब

सड़क कंपनी की जगह सरकार क्यों बनाती है?

सड़क पर कोई भी बिना पैसे चल सकता है, इसलिए कंपनी हर उपयोगकर्ता से कमा नहीं सकती। कर से सब ख़र्च बाँट लेते हैं।

अगर कारख़ाना फ़िल्टर का पैसा दे, तो क्या यह कारख़ाने के साथ अन्याय है?

कारख़ाना अपनी लागत मुफ़्त में शहर पर डाल रहा था। नियम से धुआँ करने वाला ही उसका ख़र्च उठाता है, यह न्यायपूर्ण है।

पेंशन सरकार देती है या कामगार?

ज़्यादातर देशों में पैसा आज के कामगारों के कर और अंशदान से आता है; सरकार उसे इकट्ठा करके बाँटती है।

खरीदार तराज़ू ख़ुद क्यों नहीं जाँच सकता?

हर दुकान का हर पैकेट जाँचना संभव नहीं, और पैसे देने के बाद ही पता चलता है। निरीक्षक की नियमित जाँच सब खरीदारों को बचाती है।

चारों कामों पर ख़ूब ख़र्च क्यों नहीं हो सकता?

कर का पैसा सीमित है। एक खंभा ऊँचा हुआ तो दूसरा नीचे करना पड़ेगा। सरकार को चुनना और कारण बताना पड़ता है।

क्या बड़ी पेंशन का मतलब ज़्यादा कर है?

अगर कामगारों की संख्या वही रहे तो हाँ: हर पेंशनर को ज़्यादा देने के लिए ज़्यादा पैसा जुटाना होगा।

सार्वजनिक वस्तुएँ और आधारभूत ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर)

आधारभूत ढाँचा (इन्फ्रास्ट्रक्चर) का मतलब है देश को चलाने के लिए ज़रूरी बड़ी साझा चीज़ें: सड़क, पुल, रेल, बंदरगाह, पानी के पाइप, बिजली की लाइनें और स्ट्रीट लाइट।

इनमें से बहुत-सी सार्वजनिक वस्तुएँ हैं। सार्वजनिक वस्तु की दो पहचान हैं:

जब सब मुफ़्त में इस्तेमाल कर सकते हैं तो हर कोई चाहता है कि दूसरा पैसे दे। इसे मुफ़्तख़ोरी की समस्या (free-rider problem) कहते हैं। निजी कंपनी की कमाई कम होती है, इसलिए वह बहुत कम बनाती है। तब सरकार कर के पैसे से बनाती है।

प्रदूषण नियंत्रण: पर्यावरण की रक्षा

जब कारख़ाना धुआँ या गंदा पानी छोड़ता है, तो कारख़ाने का पैसा बचता है, पर पूरे शहर की सेहत बिगड़ती है। अर्थशास्त्र में इसे नकारात्मक बाह्यता (negative externality) कहते हैं: ऐसी लागत जो दूसरों को चुकानी पड़ती है।

सरकार ये कर सकती है:

नियम से कारख़ाने का ख़र्च बढ़ता है, पर शहर को साफ़ हवा और पानी मिलता है।

बूढ़ी होती आबादी में सामाजिक सुरक्षा

सामाजिक सुरक्षा उन लोगों को बचाती है जो पर्याप्त कमा नहीं सकते: बुढ़ापा, बीमारी, नौकरी जाना, विकलांगता या ग़रीबी। कई देशों में इसके चार हिस्से हैं: सामाजिक बीमा (पेंशन, स्वास्थ्य और बेरोज़गारी बीमा), सार्वजनिक सहायता (बहुत ग़रीबों को पैसा), सामाजिक कल्याण (बच्चों, दिव्यांगों और बुज़ुर्गों की देखभाल) और जन-स्वास्थ्य।

कई पेंशन व्यवस्थाएँ ऐसे चलती हैं: आज काम करने वाले अंशदान या कर देते हैं और उससे आज के पेंशनरों को पैसा मिलता है। जब समाज बूढ़ा हो रहा हो (बुज़ुर्ग ज़्यादा, युवा कामगार कम), तो हर कामगार को ज़्यादा पेंशनरों का बोझ उठाना पड़ता है। तब देश को चुनना पड़ता है: अंशदान बढ़ाना, पेंशन की उम्र बढ़ाना, पेंशन घटाना, या और कामगार जोड़ना। जापान, इटली और चीन यह सामना कर रहे हैं; भारत अभी युवा है पर आगे बूढ़ा होगा।

उपभोक्ता सुरक्षा

विक्रेता को अक्सर खरीदार से ज़्यादा पता होता है। खरीदार हर खाने के पैकेट या बिजली के प्लग को जाँच नहीं सकता। इसलिए सरकार कानून और दफ़्तरों से उपभोक्ताओं की रक्षा करती है:

कुछ देशों में कूलिंग-ऑफ़ नियम से आप कुछ सौदे कुछ दिनों में रद्द कर सकते हैं।

करके देखिए: बजट में चुनना पड़ता है

3D में: आख़िरी चरण में चारों स्लाइडर चलाइए। पहले सड़क पर 60 रखिए और देखिए कितना बचा। फिर चारों कामों पर 100 को अपने हिसाब से न्यायपूर्ण बाँटिए।

घर पर: अपनी गली या स्कूल की पाँच चीज़ें लिखिए जिन्हें कर का पैसा चलाता है (बत्ती, नाली, बस, मिड-डे मील, पुलिस)। हर एक के आगे लिखिए कि वह चारों में से किस काम का है। किसी बड़े से पूछिए: सबसे पहले किसे घटाएँगे और किसे नुकसान होगा?

मुख्य सूत्र और परिभाषाएँ

हल किए गए उदाहरण

1. क्या स्ट्रीट लाइट सार्वजनिक वस्तु है? कारण बताइए।

हाँ। राहगीर को उसकी रोशनी से रोकना कठिन है, और एक के इस्तेमाल से अगले के लिए रोशनी कम नहीं होती। इसलिए निजी कंपनी की कमाई कम होती है और सरकार ख़र्च उठाती है।

2. एक शहर में 4 कामगार पेंशन के लिए 15-15 सिक्के कर देते हैं। 2 पेंशनर हैं। सारा पैसा बराबर बाँटें तो हर पेंशनर को कितना मिलेगा?

कुल = 4 × 15 = 60 सिक्के। हर पेंशनर को 60 ÷ 2 = 30 सिक्के।

3. अब उसी 60 सिक्कों के साथ 4 कामगार और 3 पेंशनर हैं। हर पेंशन का क्या होगा और यह क्या दिखाता है?

हर पेंशनर को 60 ÷ 3 = 20 सिक्के, पहले 30 थे। प्रति पेंशनर कामगार कम (बूढ़ी होती आबादी) हों तो अंशदान बढ़ाए बिना पेंशन गिरती है।

4. एक कारख़ाना नदी में कचरा डालता है। सरकार इसे घटाने के दो तरीके बताइए।

सीमा और जुर्माने वाला नियम बनाना (जैसे कचरा डालने पर रोक), और हर इकाई कचरे पर शुल्क या कर लगाना ताकि कारख़ाना नुकसान की कीमत चुकाए। फ़िल्टर के लिए मदद देना तीसरा तरीका है।

5. एक शहर का बजट 200 सिक्के है। 45% सामाजिक सुरक्षा, 25% सड़क और 10% पर्यावरण को जाता है। उपभोक्ता सुरक्षा और बाकी के लिए कितने सिक्के बचे?

ख़र्च हुआ हिस्सा = 45 + 25 + 10 = 80%। बचा = 200 का 20% = 40 सिक्के।

6. दुकान 1 kg लिखे पैकेट बेचती है जो 800 g के हैं। दुकानदार ₹100 प्रति पैकेट लेता है। खरीदार से हर पैकेट पर कितनी ठगी हुई?

खरीदार को वादे का सिर्फ़ 0.8 मिला। 800 g का सही दाम = 0.8 × ₹100 = ₹80। खरीदार ₹20 ज़्यादा देता है, इसीलिए निरीक्षण ज़रूरी है।

आम गलतियाँ

अभ्यास क्विज़

1. सार्वजनिक वस्तु का सबसे अच्छा उदाहरण कौन-सा है?
2. कारख़ाने का धुआँ शहर को नुकसान दे, इसे कहते हैं:
3. बूढ़ी होती आबादी का मतलब है:
4. दुकान के तराज़ू की निरीक्षक द्वारा जाँच किस काम में आती है?
5. इन कामों के लिए सरकार का ज़्यादातर पैसा कहाँ से आता है?

अभ्यास: खुद जवाब दो

अपना जवाब लिखो या चुनो, फिर जाँचें दबाओ। अटको तो संकेत देखो; जवाब देने के बाद पूरा हल दिखेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सार्वजनिक वस्तु सरल शब्दों में क्या है?

ऐसी चीज़ जिसे सब इस्तेमाल कर सकें और किसी को रोका न जा सके, जैसे स्ट्रीट लाइट, और एक के इस्तेमाल से दूसरे के लिए कम न पड़े।

अर्थव्यवस्था में सरकार के मुख्य काम क्या हैं?

कर के पैसे से साझा आधारभूत ढाँचा बनाना, पर्यावरण बचाना, सामाजिक सुरक्षा देना और उपभोक्ताओं की रक्षा करना।

बूढ़ी होती आबादी क्या है?

ऐसा समाज जिसमें बुज़ुर्गों का हिस्सा बड़ा और बढ़ रहा हो, इसलिए हर पेंशनर के पीछे कामगार कम हों।

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